पटना की युवा प्रतिभाओं का अंतरराष्ट्रीय आगाज़: इंडो-नेपाल चैंपियंस ट्रॉफी के लिए रवाना हुई हाई परफॉर्मेंस क्रिकेट एकेडमी की टीम

पटना। बिहार की राजधानी पटना के मैदानों पर पसीना बहाने वाले नन्हे क्रिकेटरों के सपनों को अब एक नया और अंतरराष्ट्रीय आसमान मिलने जा रहा है। राजधानी की प्रतिष्ठित ‘हाई परफॉर्मेंस क्रिकेट एकेडमी’ (HPCA) की अंडर-13 टीम सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को भारत और नेपाल के बीच आयोजित होने वाली ‘इंडो-नेपाल अंडर-13 चैंपियंस ट्रॉफी’ में अपनी धाक जमाने के लिए रवाना हो गई। यह दौरा न केवल इन खिलाड़ियों के करियर के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि बिहार के उभरते हुए क्रिकेट तंत्र के लिए भी एक गौरवपूर्ण क्षण है। सीमा पार होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारत और नेपाल की सर्वश्रेष्ठ युवा टीमें शिरकत कर रही हैं, जहाँ खिलाड़ियों को अपनी तकनीक, धैर्य और खेल कौशल को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में परखने का एक सुनहरा अवसर मिलेगा। पटना से रवाना होते समय खिलाड़ियों के चेहरों पर जीत का आत्मविश्वास और तिरंगे का मान बढ़ाने का जज्बा साफ दिखाई दे रहा था। इस टीम के साथ उम्मीदों का एक बड़ा कारवां जुड़ा है, जो सरहद पार नेपाल की पिचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने को तैयार है।

नेपाल की धरती पर पहला इम्तिहान: 15 अप्रैल को फुलबारी एकेडमी से भिड़ंत

​टूर्नामेंट के कार्यक्रम के अनुसार, पटना की इस टीम का पहला मुकाबला 15 अप्रैल 2026 को नेपाल की स्थानीय दिग्गज टीम ‘फुलबारी क्रिकेट एकेडमी’ के खिलाफ खेला जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला मैच खेलने को लेकर खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त उत्साह और सकारात्मक तनाव देखा जा रहा है। कोच रेहान दास गुप्ता के मार्गदर्शन में टीम ने पिछले कई महीनों से विशेष रणनीति पर काम किया है। नेपाल की पिचों पर गेंद की उछाल और वहां के मौसम के अनुकूल खुद को ढालने के लिए खिलाड़ियों को मानसिक रूप से भी तैयार किया गया है।

​टीम प्रबंधन का मानना है कि पहले मैच में जीत दर्ज करना पूरे टूर्नामेंट की लय तय करने के लिए अनिवार्य है। फुलबारी क्रिकेट एकेडमी को उनके घरेलू मैदान पर कड़ी चुनौती देने के लिए हाई परफॉर्मेंस क्रिकेट एकेडमी ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग के हर विभाग में सधी हुई तैयारी की है। खिलाड़ियों ने रवानगी से पहले पटना में अभ्यास मैचों के जरिए अपनी कमजोरियों को दूर किया है और अब वे नेपाल के खिलाड़ियों के साथ मैदान पर अपनी रणनीतियों को धरातल पर उतारने के लिए बेताब हैं।

नेतृत्व और प्रबंधन का भरोसा: हिमांशु हरी और प्रतीक कुमार का विजन

​एकेडमी की इस सफलता और अंतरराष्ट्रीय दौरे के पीछे एकेडमी के डायरेक्टर हिमांशु हरी और प्रतीक कुमार की दूरदर्शी सोच और कड़ा परिश्रम छिपा है। टीम की रवानगी के अवसर पर दोनों निदेशकों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें खेल भावना के साथ मैदान पर उतरने की सीख दी। हिमांशु हरी ने कहा कि इन युवा खिलाड़ियों ने पिछले सत्र में जिस तरह की मेहनत की है, वह काबिले तारीफ है। उनके अनुसार, यह टूर्नामेंट केवल हार-जीत का मंच नहीं है, बल्कि यह इन बच्चों के लिए सीखने का एक बहुत बड़ा विश्वविद्यालय है, जहाँ वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के दबाव और अनुशासन को समझेंगे।

​प्रतीक कुमार ने भी टीम को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एकेडमी का मुख्य उद्देश्य बिहार से ऐसे खिलाड़ियों को तैयार करना है जो भविष्य में भारतीय राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन सकें। अंडर-13 स्तर पर अंतरराष्ट्रीय दौरा करना किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुँचा देता है। प्रबंधन को पूरा विश्वास है कि कोच रेहान दास गुप्ता की सधी हुई रणनीति और टीम मैनेजर सुमन शेखर के कुशल प्रबंधन में यह टीम नेपाल की धरती पर जीत का परचम लहराएगी। एकेडमी के अन्य सदस्यों और सहयोगी स्टाफ ने भी खिलाड़ियों को माला पहनाकर और तिलक लगाकर सुखद यात्रा की कामना की।

रणनीतिक चक्रव्यूह: कोच रेहान दास गुप्ता की योजना

​टीम के मुख्य कोच रेहान दास गुप्ता के कंधों पर इन 12 सदस्यीय टीम को एकजुट रखने और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराने की बड़ी जिम्मेदारी है। रेहान दास गुप्ता ने रवानगी से पहले बताया कि नेपाल की पिचों पर स्पिन और गति का मिश्रण काफी प्रभावी रहता है। उन्होंने विशेष रूप से खिलाड़ियों को ‘लाइन और लेंथ’ पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया है। अंडर-13 क्रिकेट में छोटी-छोटी गलतियां मैच का रुख बदल देती हैं, इसलिए कोच ने फील्डिंग प्लेसमेंट और रनिंग बिटवीन द विकेट्स पर काफी काम किया है।

​टीम मैनेजर सुमन शेखर की भूमिका भी इस दौरे पर बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। वे खिलाड़ियों के अनुशासन, उनके खान-पान और वहां के प्रवास के दौरान होने वाली हर छोटी-बड़ी जरूरतों का ध्यान रखेंगे। सुमन शेखर ने बताया कि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान होने वाली थकान से उबारने के लिए विशेष ‘रिकवरी सेशन’ की योजना बनाई गई है ताकि 15 अप्रैल के मैच में टीम पूरी ऊर्जा के साथ मैदान पर उतर सके।

स्क्वाड का विश्लेषण: पटना के ये धुरंधर बढ़ाएंगे मान

​हाई परफॉर्मेंस क्रिकेट एकेडमी की इस 12 सदस्यीय टीम में संतुलित खिलाड़ियों का चयन किया गया है। टीम में विस्फोटक बल्लेबाजों के साथ-साथ सधी हुई गेंदबाजी करने वाले प्रतिभावान युवा शामिल हैं:

  1. साहिल कुमार: टीम के एक प्रमुख स्तंभ, जिनसे बड़ी पारियों की उम्मीद है।
  2. आदित्य कुमार मिश्रा: मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज और शानदार क्षेत्ररक्षक।
  3. अनंत कुमार: अपनी सधी हुई गेंदबाजी से विपक्षी टीम को बांधने में माहिर।
  4. शशांक शेखर: ऑलराउंडर प्रदर्शन से टीम को मजबूती देंगे।
  5. अर्णव चंद्रा: ऑलराउंडर हीटर बल्लेबाज और शानदार क्षेत्ररक्षक।
  6. जीत ज्योति: विकेटों के बीच शानदार तालमेल और तेज बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं।
  7. कृष्णा: टीम के स्पिन विभाग की कमान संभालेंगे।
  8. आयुष कुमार: एक जुझारू खिलाड़ी जो दबाव में बेहतर खेलना जानते हैं।
  9. अंकित कुमार: गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में टीम के लिए तुरुप का इक्का।
  10. पर्थ देओ: तकनीकी रूप से सक्षम बल्लेबाज जो पारी को संभाल सकते हैं।
  11. अंश राज: टीम के आक्रामक बल्लेबाजों में शुमार।
  12. अंशु कुमार: अपनी फील्डिंग और डेथ ओवरों की गेंदबाजी से मैच पलटने की क्षमता रखते हैं।

​इन खिलाड़ियों का आपसी तालमेल ही इस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत की जीत की राह प्रशस्त करेगा। हर खिलाड़ी ने अपने खेल को निखारने के लिए घंटों नेट प्रैक्टिस की है और अब वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

इंडो-नेपाल खेल संबंध: जमीनी स्तर पर बढ़ता समन्वय

​भारत और नेपाल के बीच क्रिकेट के क्षेत्र में बढ़ता यह सहयोग दक्षिण एशिया में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस तरह की चैंपियंस ट्रॉफी न केवल खिलाड़ियों को अनुभव प्रदान करती है, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और खेल संबंधों को भी नई मजबूती देती है। अंडर-13 स्तर पर इस तरह के आयोजन से खिलाड़ियों को कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय शिष्टाचार, विभिन्न देशों की खेल शैलियों और वहां की परिस्थितियों को समझने का मौका मिलता है।

​पटना की इस एकेडमी द्वारा अपने खिलाड़ियों को नेपाल भेजना यह दर्शाता है कि बिहार में क्रिकेट का बुनियादी ढांचा अब वैश्विक स्तर की सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। बिहार क्रिकेट के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि यहाँ की निजी एकेडमियां भी अपने खिलाड़ियों के एक्सपोजर के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो खिलाड़ी इस तरह के दबाव वाले टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, उन्हें आगे चलकर राज्य स्तर की टीमों (जैसे बिहार अंडर-16 या अंडर-19) के चयन में भी काफी लाभ मिलता है।

अभियान की चुनौतियां और उम्मीदें

​नेपाल का मौसम और वहां के मैदान भारतीय मैदानों से थोड़े भिन्न होते हैं। विशेष रूप से वहां की हवा और ऊंचाई गेंद की गति को प्रभावित करती है। कोच रेहान दास गुप्ता ने खिलाड़ियों को इन भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में विस्तार से समझाया है। खिलाड़ियों को निर्देश दिया गया है कि वे मैदान पर शांत रहें और अनावश्यक दबाव न लें। टीम का लक्ष्य केवल ट्रॉफी जीतना नहीं है, बल्कि हर मैच में सुधार करना और अपनी प्रतिभा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।

​खिलाड़ियों के माता-पिता भी इस दौरे को लेकर काफी भावुक और उत्साहित हैं। पटना रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर अपने बच्चों को विदा करने पहुँचे परिजनों ने बताया कि उनके बच्चों ने इस दिन के लिए बहुत त्याग किया है। सुबह की कड़ी धूप हो या कड़ाके की ठंड, इन बच्चों ने अभ्यास कभी नहीं छोड़ा। आज जब वे देश की सीमाओं के बाहर तिरंगे और अपनी एकेडमी का मान बढ़ाने जा रहे हैं, तो यह हर अभिभावक के लिए गर्व का क्षण है।

​15 अप्रैल का मैच केवल एक खेल नहीं, बल्कि इन 12 बच्चों के सपनों की पहली परीक्षा होगी। फुलबारी क्रिकेट एकेडमी के खिलाफ होने वाला यह मुकाबला यह तय करेगा कि पटना की इस टीम का सफर आगे कैसा रहने वाला है। टीम स्क्वाड में शामिल हर नाम—साहिल से लेकर अंशु तक—आज एक नई कहानी लिखने के लिए निकल पड़ा है। आने वाले एक सप्ताह तक पटना की खेल प्रेमियों की नजरें नेपाल के उन क्रिकेट मैदानों पर रहेंगी, जहाँ बिहार के लाल अपने बल्ले और गेंद से इतिहास रचने का प्रयास करेंगे। एकेडमी के प्रबंधन ने आश्वस्त किया है कि खिलाड़ियों को वहां हर संभव तकनीकी और मानसिक सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे बिना किसी डर के अपना स्वाभाविक खेल खेल सकें।

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