
बिक्रमगंज (रोहतास)। बिहार के रोहतास जिले में रिश्तों की पवित्रता और समाज की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के काशी घाट मोहल्ले में रविवार, 12 अप्रैल 2026 को एक फौजी की 25 वर्षीया पत्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। विवाहिता का शव उसके अपने ही घर की रेलिंग से फंदे के सहारे लटका हुआ पाया गया। घटना के बाद से ही घर में मौजूद ससुराल पक्ष के सभी सदस्य—सास, ससुर और देवर—मौके से फरार बताए जाते हैं, जिसने इस पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है। मृतका की पहचान अमृता पटेल के रूप में हुई है, जिसकी शादी महज चार साल पहले हुई थी। एक तरफ जहाँ पति देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपनी ड्यूटी पर तैनात है, वहीं दूसरी ओर घर की चारदीवारी के भीतर उसकी जीवनसंगिनी की संदिग्ध मौत ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिजनों ने ससुराल वालों पर दहेज के लिए हत्या करने और ससुर पर अमानवीय व्यवहार के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। 13 अप्रैल 2026 की सुबह तक इस मामले को लेकर इलाके में जबरदस्त तनाव और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
चार साल पहले बंधा था सात जन्मों का बंधन
इस दुखद दास्तां की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी, जब नोखा थाना क्षेत्र के छतौना गांव निवासी अशोक चौधरी की पुत्री अमृता पटेल का विवाह बड़े ही धूमधाम के साथ दावथ थाना क्षेत्र के बभनी गांव निवासी मनीष कुमार से हुआ था। मनीष कुमार भारतीय सेना में कार्यरत हैं और देश सेवा के अपने कर्तव्य के कारण अक्सर घर से बाहर रहते हैं। शादी के बाद अमृता अपने ससुराल वालों के साथ बिक्रमगंज के काशी घाट स्थित एक नवनिर्मित मकान में रहने लगी थी।
शादी के शुरुआती दिन सामान्य रहे, लेकिन परिजनों का आरोप है कि धीरे-धीरे घर के भीतर लालच और प्रताड़ना ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए। अमृता अपने पति की अनुपस्थिति में सास, ससुर और देवर के साथ उसी मकान में रहती थी। हालांकि शादी को चार वर्ष बीत चुके थे, लेकिन इस दंपति की अभी तक कोई संतान नहीं थी। संतान न होने की बात को लेकर भी अमृता को अक्सर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था, लेकिन मौत की असली वजह कुछ और ही बनकर सामने आई है।
चार पहिया गाड़ी की मांग और ससुर की ‘गंदी नीयत’
अमृता की मौत की खबर मिलते ही उसके पिता अशोक चौधरी और अन्य परिजन भागे-भागे बिक्रमगंज पहुँचे। बेटी का बेजान शरीर देखकर पिता का कलेजा फट पड़ा और उन्होंने ससुराल पक्ष पर अत्यंत गंभीर और घिनौने आरोप लगाए। अशोक चौधरी ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी को निरंतर दहेज के लिए तंग किया जा रहा था। ससुराल वालों की मांग थी कि अमृता के पिता उन्हें एक चार पहिया वाहन (गाड़ी) उपहार स्वरूप दें। जब भी अमृता इस मांग का विरोध करती, उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की जाती थी।
इससे भी अधिक चौंकाने वाला आरोप अमृता के पिता ने अपने समधी यानी अमृता के ससुर पर लगाया है। पिता के अनुसार, अमृता ने कई बार रोते हुए उन्हें फोन पर बताया था कि उसके ससुर की उस पर ‘गंदी नजर’ रहती थी और वह अक्सर उसके साथ अभद्र व्यवहार करने की कोशिश करता था। पति के घर में न होने का फायदा उठाकर ससुर अमृता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। पिता का स्पष्ट आरोप है कि इसी प्रताड़ना और दहेज की मांग पूरी न होने के कारण उनकी बेटी की हत्या कर उसे फंदे से लटका दिया गया है ताकि यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो सके।
पति की कॉल और ससुराल वालों का सामूहिक पलायन
घटनाक्रम के अनुसार, रविवार की सुबह अमृता के पति मनीष कुमार, जो अपनी ड्यूटी पर बाहर तैनात हैं, उन्होंने ही फोन पर अशोक चौधरी को सूचना दी कि अमृता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। यह सुनते ही अमृता के मायके में कोहराम मच गया। जब परिजन काशी घाट स्थित मकान पर पहुँचे, तो वहां का दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर के भीतर नवनिर्मित हिस्से की रेलिंग से अमृता का शव झूल रहा था।
सबसे संदिग्ध बात यह रही कि घर में रहने वाले सास, ससुर और देवर में से कोई भी वहां मौजूद नहीं था। जैसे ही अमृता की जान गई या उसकी हत्या की गई, ससुराल पक्ष के सभी सदस्य घर छोड़कर फरार हो गए। यदि यह साधारण आत्महत्या होती, तो ससुराल वाले वहां मौजूद रहकर पुलिस और मायके वालों का सामना करते, लेकिन उनका इस तरह सामूहिक रूप से गायब होना उनकी संलिप्तता की ओर बड़ा इशारा कर रहा है। पुलिस अब उन रास्तों और माध्यमों की तलाश कर रही है जिनसे ये लोग फरार हुए हैं।
पुलिसिया कार्रवाई: पोस्टमार्टम और जांच के विभिन्न आयाम
सूचना मिलते ही बिक्रमगंज थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुँची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने कमरे और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया ताकि किसी भी प्रकार के संघर्ष (Scuffle) के निशानों की पहचान की जा सके। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतरवाया और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल सासाराम भेज दिया। 13 अप्रैल 2026 की सुबह सासाराम अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के द्वारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, मामला प्रथम दृष्टया संदिग्ध है। बिक्रमगंज पुलिस ने बताया कि ससुराल पक्ष के लोगों का फरार होना और मायके वालों द्वारा लगाए गए दहेज हत्या के आरोप इस मामले को गंभीर बनाते हैं। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अमृता की मृत्यु फंदा लगने से दम घुटने के कारण हुई है या उसे पहले ही मौत के घाट उतार दिया गया था। पुलिस ने मनीष कुमार से भी संपर्क साधा है और उनसे उनके परिवार के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
सूनी कोख और प्रताड़ना का अनकहा दर्द
बिक्रमगंज के काशी घाट मोहल्ले में रहने वाले लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि अमृता एक शांत स्वभाव की महिला थी, लेकिन वह अक्सर उदास रहती थी। संतान न होना और पति का घर से दूर रहना उसके लिए मानसिक चुनौती थी ही, ऊपर से ससुराल वालों का कथित दुर्व्यवहार उसके लिए असहनीय होता जा रहा था। पिता अशोक चौधरी ने रोते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बेटी की खुशियों के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि फौजी की पत्नी होने के बावजूद उनकी बेटी अपने ही घर में सुरक्षित नहीं रहेगी।
समाज में आज भी दहेज की वेदी पर बेटियों की बलि चढ़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोहतास जैसे शिक्षित जिले में एक फौजी के परिवार में ऐसी घटना होना समाज के लिए एक चेतावनी है। पुलिस ने आरोपी सास, ससुर और देवर की गिरफ्तारी के लिए विशेष छापेमारी टीम का गठन किया है। पुलिस का कहना है कि बहुत जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और सच सामने लाया जाएगा। फिलहाल, पूरे मोहल्ले में पुलिस की तैनाती है और लोग इस घटना की निंदा कर रहे हैं।
अमृता पटेल की मौत ने एक बार फिर उन हजारों महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है जिनके पति देश की सुरक्षा के लिए सीमाओं पर डटे हैं। क्या सरहद पर तैनात जवान को अपनी पत्नी की सुरक्षा के लिए भी अब चिंतित होना पड़ेगा? यह सवाल बिक्रमगंज की इस घटना के बाद हर किसी के जेहन में कौंध रहा है। पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और यदि यह हत्या का मामला साबित होता है, तो दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। फिलहाल, सासाराम सदर अस्पताल से पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा, जिसके बाद मृतका का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव में किया जा सकता है।


