पटना-गया रेलखंड पर हाईटेंशन तार काटकर चोरी, तीन घंटे बाधित रहा रेल परिचालन, कई ट्रेनें प्रभावित

जहानाबाद। बिहार के जहानाबाद जिले से गुजरने वाले पटना-गया रेलखंड पर गुरुवार तड़के हुई चोरी की एक बड़ी घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऊंटा-मदारपुर के समीप अज्ञात चोरों ने डाउन लाइन के ओवरहेड हाईटेंशन बिजली तार का करीब 35 मीटर हिस्सा काट दिया, जिससे रेल परिचालन पूरी तरह प्रभावित हो गया। इस घटना के कारण लगभग तीन घंटे तक ट्रेनों की आवाजाही बाधित रही और कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस तथा पैसेंजर ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ा। सूचना मिलने के बाद रेलवे, आरपीएफ और तकनीकी टीमों ने संयुक्त अभियान चलाकर क्षतिग्रस्त तार की मरम्मत की, जिसके बाद रेल सेवाएं दोबारा सामान्य हो सकीं।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार घटना गुरुवार सुबह तड़के सामने आई, जब दानापुर रेल मंडल को ओवरहेड विद्युत आपूर्ति में तकनीकी गड़बड़ी की सूचना मिली। प्रारंभिक जांच के दौरान पता चला कि जहानाबाद जिले के ऊंटा-मदारपुर के पास डाउन लाइन पर लगे हाईटेंशन ओवरहेड तार को काट दिया गया है। इसके बाद तत्काल इसकी जानकारी स्थानीय रेलवे अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को दी गई।

सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), सरकारी रेल पुलिस (जीआरपी) तथा रेलवे के तकनीकी अधिकारी घटनास्थल के लिए रवाना हुए। मौके पर पहुंचने के बाद अधिकारियों ने पाया कि ओवरहेड लाइन का लगभग 35 मीटर लंबा हिस्सा काटा जा चुका था। इस कारण संबंधित रेलखंड की विद्युत आपूर्ति और सिग्नल प्रणाली प्रभावित हो गई, जिससे सुरक्षा कारणों से ट्रेनों का संचालन तत्काल रोकना पड़ा।

घटना के दौरान चोर मौके से फरार हो गए। अधिकारियों के अनुसार पुलिस टीम के पहुंचने की भनक मिलते ही आरोपी वहां से भाग निकले। तलाशी अभियान के दौरान आसपास के क्षेत्र में एक गड्ढे से काटा गया हाईटेंशन तार बरामद किया गया। बरामद तार को जब्त कर लिया गया है और उसे जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चोर तार को ले जाने से पहले ही क्यों छोड़कर भाग गए।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मध्य रेलवे की विशेष तकनीकी टीम को तत्काल मौके पर भेजा गया। रेलवे के विशेष रखरखाव वाहन के माध्यम से इंजीनियरों और तकनीशियनों ने घटनास्थल पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त ओवरहेड लाइन की मरम्मत शुरू की। कई घंटों की मशक्कत के बाद बिजली आपूर्ति, सिग्नल प्रणाली और संचार व्यवस्था को फिर से बहाल किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे ट्रेनों का परिचालन सामान्य किया गया।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार सुबह लगभग चार बजे से सात बजे तक इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहा। सुरक्षा कारणों से कई ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोककर नियंत्रित तरीके से संचालन किया गया। इससे यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा और कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चलीं।

इस घटना का असर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों पर पड़ा। गंगा-दामोदर एक्सप्रेस, हटिया-इस्लामपुर एक्सप्रेस, पलामू एक्सप्रेस तथा गया-पटना मेमू सहित कई अन्य ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कुछ ट्रेनों को बीच रास्ते में रोका गया, जबकि कुछ को निर्धारित स्टेशनों पर रोककर परिचालन बहाल होने का इंतजार कराया गया। यात्रियों को लंबे समय तक ट्रेन में ही रुकना पड़ा, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं केवल संपत्ति की चोरी तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि रेल परिचालन और यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं। ओवरहेड हाईटेंशन लाइन विद्युत चालित ट्रेनों के संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें किसी भी प्रकार की क्षति से ट्रेन संचालन पूरी तरह बाधित हो सकता है और बड़ा हादसा होने की आशंका भी बनी रहती है।

आरपीएफ प्रभारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी। आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया गया और घटनास्थल से कटे हुए हाईटेंशन तार को बरामद कर लिया गया। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और घटना में शामिल आरोपियों की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।

रेलवे सुरक्षा बल ने यह भी बताया कि तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा आसपास के गांवों और बाजारों में कबाड़ खरीदने-बेचने वालों से भी पूछताछ की जाएगी, ताकि चोरी किए गए रेलवे सामान की खरीद-फरोख्त से जुड़े किसी नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

रेलवे प्रशासन ने इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि रेलवे ट्रैक और ओवरहेड लाइन की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। संवेदनशील स्थानों पर नियमित गश्त बढ़ाने, सीसीटीवी निगरानी मजबूत करने और रात्रि सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर विचार किया जा रहा है।

रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि हाईटेंशन तार की चोरी केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि इससे पूरे रेल नेटवर्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन में छेड़छाड़ से ट्रेन संचालन रोकना पड़ता है, जिससे यात्रियों के समय के साथ-साथ रेलवे को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करना आवश्यक है।

फिलहाल रेलवे ने क्षतिग्रस्त लाइन की मरम्मत पूरी कर परिचालन सामान्य कर दिया है। हालांकि आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम मामले की जांच में जुटी हुई है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, स्थानीय लोगों से पूछताछ और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश जारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि घटना में शामिल लोगों की पहचान होने पर उनके खिलाफ रेलवे अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और महत्वपूर्ण रेल संरचनाओं की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों की सुरक्षा और रेल परिचालन को निर्बाध बनाए रखने के लिए अब रेलवे प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अतिरिक्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।

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