LNJP अस्पताल में मरीजों को निजी अस्पताल भेजने के आरोपों की जांच तेज, स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण के बाद कई डॉक्टर जांच के दायरे में

पटना। राजधानी पटना के राजवंशी नगर स्थित लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) हड्डी अस्पताल में मरीजों को कथित रूप से निजी अस्पतालों में उपचार के लिए भेजने के आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई शिकायतों के बाद विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है, जो अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और संबंधित चिकित्सकों से पूछताछ कर पूरे मामले की पड़ताल करेगी। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले चिकित्सकों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह मामला तब सामने आया जब स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव कुमार रवि ने हाल ही में एलएनजेपी अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मरीजों और उनके परिजनों ने शिकायत की कि सरकारी अस्पताल में इलाज की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद कुछ मरीजों को निजी अस्पतालों में उपचार कराने की सलाह दी जा रही है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही जांच के निर्देश दिए गए।

अस्पताल राज्य के प्रमुख हड्डी रोग उपचार केंद्रों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मरीजों को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पतालों की ओर भेजे जाने की शिकायत ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विभाग का मानना है कि यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला होगा।

जांच के दायरे में उन चिकित्सकों को भी शामिल किया गया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को अपने निजी अस्पतालों या अन्य निजी संस्थानों में इलाज कराने के लिए प्रेरित किया। विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि कहीं मरीजों को अनावश्यक रूप से निजी अस्पतालों की ओर भेजने का कोई संगठित प्रयास तो नहीं किया गया।

प्रारंभिक जांच में न्यूरो सर्जन डॉ. श्याम किशोर का नाम सामने आया है। निरीक्षण के दौरान मिली शिकायत के अनुसार उन्होंने एक मरीज को निजी अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी चिकित्सक के खिलाफ अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।

जानकारी के अनुसार जांच केवल एक चिकित्सक तक सीमित नहीं रहेगी। अस्पताल के कुछ अन्य डॉक्टर भी जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए प्रेरित किया गया या वहां जाने की सलाह दी गई। विभाग अब यह भी जांच करेगा कि ऐसे मामलों की संख्या कितनी है और क्या यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी।

जांच टीम अस्पताल के ओपीडी रिकॉर्ड की भी समीक्षा करेगी। जिन मरीजों ने अस्पताल में पर्ची कटवाई लेकिन बाद में सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं कराया, उनकी जानकारी जुटाई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे मरीजों और उनके परिजनों से भी संपर्क कर पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्होंने सरकारी अस्पताल छोड़कर निजी अस्पताल का रुख क्यों किया।

स्वास्थ्य विभाग अस्पताल के रजिस्टर, मरीजों की उपचार संबंधी फाइलें और अन्य अभिलेखों का भी परीक्षण करेगा। यदि किसी मरीज को निजी अस्पताल भेजे जाने का रिकॉर्ड या उससे संबंधित कोई दस्तावेज मिलता है तो उसे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा। विभाग यह भी पता लगाएगा कि संबंधित मरीजों को किस आधार पर रेफर किया गया और क्या वह चिकित्सकीय रूप से आवश्यक था या नहीं।

सूत्रों के अनुसार डॉ. श्याम किशोर और डॉ. राकेश कुमार रोशन सहित अन्य संबंधित चिकित्सकों से भी पूछताछ की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों का बयान दर्ज करने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाएगा। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क या निर्धारित शुल्क पर उपचार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। यदि कोई चिकित्सक व्यक्तिगत लाभ के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर भेजता है तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होते हैं। यदि उन्हें बिना उचित कारण निजी अस्पतालों में भेजा जाता है तो उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। इसलिए ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है, ताकि आम लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास बना रहे।

हाल के वर्षों में बिहार सरकार सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाओं की आपूर्ति और अस्पतालों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। ऐसे में यदि किसी स्तर पर मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर भेजने जैसी शिकायतें सामने आती हैं तो सरकार उन्हें गंभीरता से ले रही है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जाएगी। किसी भी चिकित्सक के खिलाफ केवल आरोपों के आधार पर कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि सभी साक्ष्यों, मरीजों के बयान, अस्पताल के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी और उसके आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।

फिलहाल एलएनजेपी अस्पताल से जुड़े इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों के बाद शुरू हुई यह जांच आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा कर सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।

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