
पटना, 22 जुलाई 2025: सीबीआई की एक विशेष अदालत ने आज डाक विभाग, पटना के पूर्व वरिष्ठ लेखापाल लोहरा भगत को सरकारी पद पर रहते हुए धोखाधड़ी एवं जालसाजी करने के आरोप में दोषी करार देते हुए दो वर्ष की कठोर कारावास एवं ₹1.10 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है।
यह मामला केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा 31 मार्च 2014 को दर्ज किया गया था। आरोप था कि लोहरा भगत, जो वर्ष 2010 से 2013 के बीच डाक विभाग के लेखा निदेशक कार्यालय, पटना में वरिष्ठ लेखापाल पद पर कार्यरत थे, उन्होंने ललित भगत के नाम से फर्जी पहचान बनाकर बिहार सरकार की अनुसूचित जनजाति आयोग में उपाध्यक्ष के रूप में तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए नियुक्ति प्राप्त की और दोनों पदों से वेतन प्राप्त करते रहे।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि लोहरा भगत और ललित भगत एक ही व्यक्ति हैं। उन्होंने जुलाई 2010 से जुलाई 2011 तक एक साथ दोनों पदों पर काम करते हुए भारत सरकार से ₹3,41,444 और बिहार सरकार से ₹14,87,591 का वेतन एवं अन्य लाभ जैसे कि प्रति माह ₹32,850 की लीज गाड़ी का खर्च भी प्राप्त किया। इस प्रकार उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों को धोखा देते हुए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचाया और स्वयं को आर्थिक लाभ पहुँचाया।
CBI ने 31 मार्च 2015 को इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था। विस्तृत सुनवाई के बाद माननीय अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए यह सजा सुनाई।


