पटना में अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई, गंगा किनारे कार शोरूम और सर्विस सेंटरों पर चला बुलडोजर

पटना: बिहार की राजधानी पटना में नगर निगम ने अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए गंगा तट के पास स्थित कई संरचनाओं पर बुलडोजर कार्रवाई की। कुर्जी इलाके में चलाए गए इस अभियान के दौरान एक कार शोरूम और दो सर्विस सेंटरों को ध्वस्त कर दिया गया। निगम प्रशासन का कहना है कि ये निर्माण राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों और बिल्डिंग बायलाज का उल्लंघन कर बनाए गए थे।

सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई ने इलाके में हलचल मचा दी। भारी संख्या में पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और नगर निगम की टीम मौके पर मौजूद रही। बुलडोजर और अन्य भारी मशीनों की मदद से अवैध ढांचों को तोड़ा गया। पूरे अभियान की निगरानी ड्रोन कैमरे से की गई ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो और कार्रवाई का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जा सके।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, कुर्जी क्षेत्र में करीब एक बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया। बताया गया कि गंगा तट के समीप बने कुछ व्यावसायिक ढांचे निर्धारित नियमों के खिलाफ बनाए गए थे। कई बार नोटिस दिए जाने और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह कार्रवाई की गई।

अभियान के दौरान इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रशासन की ओर से लगभग 100 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी ताकि किसी प्रकार का विरोध या तनाव उत्पन्न न हो। नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी, दंडाधिकारी और स्थानीय प्रशासनिक टीम मौके पर मौजूद रही।

ध्वस्तीकरण के लिए छह जेसीबी, एक पोकलेन मशीन, हाइड्रा और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। मशीनों ने कुछ ही घंटों में बड़े हिस्से को खाली करा दिया। कार्रवाई के दौरान आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। लोग मोबाइल फोन से वीडियो बनाते और कार्रवाई को देखते नजर आए।

नगर निगम का कहना है कि गंगा किनारे निर्माण को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और नदी क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए नदी तट के आसपास सीमित निर्माण की अनुमति दी जाती है। इसके बावजूद कई लोगों द्वारा नियमों की अनदेखी कर स्थायी ढांचे तैयार कर लिए गए थे।

प्रशासन के मुताबिक, गंगा नदी की बाहरी सीमा से 200 मीटर के भीतर नए निर्माण या पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं होती। इसी तरह अन्य नदियों के किनारे भी तय सीमा के भीतर निर्माण पर रोक है। इन नियमों का उद्देश्य नदी तट को सुरक्षित रखना और पर्यावरणीय नुकसान को रोकना है।

अधिकारियों ने बताया कि जिन संपत्तियों पर कार्रवाई की गई, उन्हें पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था। नोटिस के बाद संबंधित भवनों का सीमांकन किया गया और अवैध हिस्सों को चिन्हित किया गया। कुछ मामलों में पूरी इमारत को अवैध माना गया, जबकि कुछ जगहों पर केवल कुछ हिस्सों को नियमों के खिलाफ पाया गया।

इस कार्रवाई से पहले अप्रैल महीने में भी नगर निगम ने दीघा से बांस घाट तक सीमांकन अभियान चलाया था। उस दौरान कई भवनों और व्यावसायिक परिसरों की जांच की गई थी। विजिलेंस मामलों में जिन संपत्तियों पर कार्रवाई के आदेश जारी हुए थे, उन्हें चिन्हित कर आगे की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार जारी रहेगा। सरकारी जमीन पर कब्जा, अवैध निर्माण और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में और भी कई इलाकों में इसी तरह की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

इधर स्थानीय लोगों के बीच इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने प्रशासन के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि नियमों का पालन सभी के लिए जरूरी है। उनका मानना है कि नदी किनारे अवैध निर्माण से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है और भविष्य में बाढ़ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

वहीं कुछ लोगों का कहना था कि बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई से कई लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। सर्विस सेंटर और शोरूम से जुड़े कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है।

नगर निगम की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि शहर के अन्य हिस्सों में भी अतिक्रमण हटाने का काम चल रहा है। बुद्धा कॉलोनी इलाके में एकता मॉल के लिए स्वीकृत जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया जारी है। वहां अब तक कई मकानों और खटालों को हटाया जा चुका है।

प्रशासन का कहना है कि राजधानी को व्यवस्थित और अतिक्रमणमुक्त बनाने के लिए यह अभियान जरूरी है। खासकर गंगा तट के आसपास अवैध निर्माण को लेकर सरकार और प्रशासन पहले से सख्त रुख अपनाए हुए हैं। एनजीटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार नदी तट क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करना अनिवार्य है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नदी किनारे अनियंत्रित निर्माण जारी रहा तो इससे पर्यावरणीय संकट गहरा सकता है। गंगा तट पर बढ़ते कंक्रीट निर्माण से जल निकासी, बाढ़ नियंत्रण और नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ता है। इसी कारण प्रशासन इस तरह की कार्रवाई को जरूरी बता रहा है।

फिलहाल पटना में हुई इस बड़ी बुलडोजर कार्रवाई की चर्चा पूरे शहर में हो रही है। आने वाले दिनों में निगम प्रशासन और भी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई कर सकता है। नगर निगम ने साफ किया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

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