
पटना: बिहार की राजधानी पटना में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के बाद शहर में पेट्रोल की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है, जबकि डीजल के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब सीधे लोगों के घरेलू बजट और रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है।
नई दरें लागू होने के बाद पटना में पेट्रोल 110.47 रुपये प्रति लीटर और डीजल 96.53 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं प्रीमियम श्रेणी के एक्सपी95 पेट्रोल की कीमत भी बढ़कर 119.37 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल और डीजल दोनों में लगभग एक रुपये प्रति लीटर की वृद्धि ने वाहन चालकों के साथ-साथ परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
पिछले कुछ महीनों से लगातार ईंधन कीमतों में हो रही बढ़ोतरी ने आम आदमी की आर्थिक स्थिति पर असर डालना शुरू कर दिया है। पहले से महंगाई की मार झेल रहे लोगों के लिए अब रोज वाहन चलाना भी महंगा पड़ने लगा है। खासकर वे लोग जो रोजाना बाइक, कार या सार्वजनिक परिवहन के जरिए लंबी दूरी तय करते हैं, उन्हें अब अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे बाजार पर पड़ता है। जैसे ही डीजल की कीमत बढ़ती है, माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है। इससे फल, सब्जियां, अनाज, दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा होने लगता है। व्यापारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से बाजार में सामान महंगे दाम पर पहुंचता है, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ता है।
पटना के कई स्थानीय व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि पिछले कुछ समय में डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से उनका खर्च काफी बढ़ गया है। ट्रकों और छोटे मालवाहक वाहनों के संचालन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कुछ ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने तो किराया बढ़ाने पर भी विचार शुरू कर दिया है। अगर ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक महंगाई देखने को मिल सकती है।
ऑटो और टैक्सी चालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि किराया पहले जैसा ही है, लेकिन ईंधन का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में रोज की कमाई का बड़ा हिस्सा पेट्रोल और डीजल पर ही खर्च हो जाता है। कई चालकों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो उन्हें किराया बढ़ाने की मांग करनी पड़ सकती है।
गृहिणियों का कहना है कि पहले ही रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो रहा था और अब पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों का असर बाजार पर भी दिखने लगा है। सब्जियों और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की आशंका ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए खर्च नियंत्रित करना पहले से ज्यादा कठिन होता जा रहा है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, टैक्स संरचना और परिवहन लागत जैसे कई कारण ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। हालांकि आम उपभोक्ता के लिए सबसे अहम बात यह है कि हर बढ़ोतरी का असर उसकी जेब पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले समय में भी कीमतों में वृद्धि जारी रही तो महंगाई दर और तेजी से बढ़ सकती है।
पिछले दिनों भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई थी। अब एक बार फिर कीमतों में इजाफे ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि हर कुछ दिनों पर कीमत बढ़ने से आर्थिक योजना बनाना मुश्किल हो गया है। नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि उनकी आय सीमित है, लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
राजधानी पटना के अलावा बिहार के अन्य जिलों में भी ईंधन की कीमतों में बदलाव देखा गया है। हालांकि अलग-अलग शहरों में स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत के कारण दरों में थोड़ा अंतर हो सकता है। फिर भी राज्यभर में बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है।
ईंधन की नई और पुरानी कीमतों की तुलना करें तो पेट्रोल में करीब 96 पैसे और डीजल में लगभग 95 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी भले ही सुनने में कम लगे, लेकिन रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों के मासिक खर्च पर इसका बड़ा असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार और तेल कंपनियां कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई कदम नहीं उठातीं तो आने वाले दिनों में महंगाई और अधिक बढ़ सकती है। खासकर छोटे व्यवसायियों, किसानों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों पर इसका असर ज्यादा दिखाई देगा।
फिलहाल पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों ने राजधानी पटना में लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आम लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में ईंधन दरों में राहत मिले ताकि घरेलू बजट और बाजार दोनों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।


