पटना समाहरणालय भवन बना पर्यावरण अनुकूल प्रशासनिक मॉडल

भूकम्परोधी संरचना, सौर ऊर्जा, जल शुद्धिकरण और दिव्यांग अनुकूल सुविधाओं से लैस

पटना, 20 जून।राजधानी पटना का नया समाहरणालय भवन जिला प्रशासन का अत्याधुनिक और पर्यावरण अनुकूल नया ठिकाना बन गया है। यह भवन न सिर्फ अपने भव्य स्थापत्य और तकनीकी विशेषताओं के लिए जाना जा रहा है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और नागरिक सुविधाओं की दृष्टि से भी राज्य भर में एक आदर्श स्थापित कर रहा है।

इस भवन का उद्घाटन 10 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। यह पूरी तरह से भूकम्परोधी तकनीक से निर्मित है, जिससे किसी भी आपदा की स्थिति में प्रशासनिक कार्य बाधित न हों।

हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को मिली प्राथमिकता

  • भवन की छत पर 40 किलोवाट क्षमता वाला सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है, जिससे बिजली की निर्भरता कम हुई है।
  • इसमें वाटर प्यूरीफिकेशन सिस्टम और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाया गया है, जो भवन को हरित भवन (Green Building) की श्रेणी में लाता है।
  • पुराने वृक्षों को काटा नहीं गया, बल्कि संरक्षित कर भवन परिसर में ही सजाया गया है।
  • पुराने समाहरणालय के ऐतिहासिक स्तंभों को भी कलात्मक रूप से परिसर में संरक्षित किया गया है।

सभी के लिए सुलभ: दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं

भवन में दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है:

  • मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर बेसमेंट तक रैम्प और लिफ्ट की सुविधा
  • बिना किसी बाधा के सभी मंजिलों तक पहुंच की व्यवस्था।

सुरक्षा और तकनीक से लैस आधुनिक भवन

  • परिसर में 204 वाहनों के लिए ओपन पार्किंग और 240 वाहनों के लिए बेसमेंट पार्किंग की व्यवस्था है।
  • सीसीटीवी नेटवर्क, आधुनिक डाटा नेटवर्क, और अत्याधुनिक इंटीरियर डिजाइन के साथ यह भवन पूर्णत: डिजिटल और स्मार्ट प्रशासनिक केंद्र है।

एक छत के नीचे सभी सेवाएं

इस भवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी प्रशासनिक विभाग एक ही परिसर में कार्यरत हैं, जिससे आमजनों को अलग-अलग दफ्तरों में भटकना नहीं पड़ता
लोगों के कार्य सरलता से, शीघ्रता से और बिना परेशानी के निपटाए जा रहे हैं।


पटना का यह नया समाहरणालय भवन केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि पर्यावरण जागरूकता, आपदा प्रबंधन और सुशासन की दृष्टि से बिहार के भविष्य का प्रतीक बनकर उभरा है।


 

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