​बिहार में औद्योगिक क्रांति को रफ्तार देने की बड़ी कवायद: उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने की उच्चस्तरीय समीक्षा, निवेश और रोजगार सृजन पर कड़ा जोर

पटना, 18 मई 2026। बिहार के आर्थिक विन्यास को औद्योगिक आत्मनिर्भरता प्रदान करने, राज्य के भीतर बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश को आकर्षित करने और विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को तीव्र गति देने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत समीक्षा की शुरुआत की गई है। उद्योग विभाग की मंत्री श्रेयसी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में प्रणालियों के आधुनिकीकरण और वर्तमान में संचालित योजनाओं की भौतिक प्रगति का गहन सांगठनिक आकलन किया गया। विकास भवन स्थित मुख्य सभागार में संपन्न हुई इस बैठक के दौरान उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार सहित विभाग के तमाम वरीय प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी निदेशक, वित्तीय सलाहकार और क्षेत्रीय महाप्रबंधक मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक का मूल ध्येय बिहार के भीतर ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार सुगमता) के मानकों को वैश्विक स्तर पर अपग्रेड करना और नए उद्यमों की स्थापना के मार्ग में आने वाली लिपिकीय व तकनीकी बाधाओं को पूरी कड़ाई से ब्लॉक करना है।

निवेश प्रोत्साहन और सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण

​समीक्षा बैठक के प्रथम सत्र में राज्य के भीतर नए निवेशकों को आकर्षित करने और पूर्व से प्राप्त निवेश प्रस्तावों की वर्तमान स्थिति की बिंदुवार समीक्षा की गई। उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बिहार में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है और इस दिशा में किसी भी स्तर पर प्रशासनिक शिथिलता को विधिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एसआईपीबी) के माध्यम से आने वाले प्रस्तावों के त्वरित निष्पादन का विलेख तैयार करने का निर्देश दिया।

​विभागीय अधिकारियों को यह हिदायत दी गई कि सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम (एकल खिड़की प्रणाली) को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि देश-विदेश के बड़े औद्योगिक घरानों को बिहार में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों के चक्कर न काटने पड़ें। सचिव कुंदन कुमार ने इस संदर्भ में तकनीकी इनपुट्स साझा करते हुए बताया कि विभाग द्वारा एक नया ऑनलाइन ट्रैकिंग विन्यास विकसित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से भूमि आवंटन, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और वित्तीय अनुदानों की स्वीकृति की समय-सीमा की लाइव मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय स्तर से की जा सकेगी।

औद्योगिक आधारभूत संरचना और बियाडा प्रक्षेत्रों का आधुनिक विन्यास

​राज्य के भीतर उपलब्ध औद्योगिक भूमि और बुनियादी ढांचे की समीक्षा करते हुए अवसंरचनात्मक विकास को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए। उद्योग मंत्री ने बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) के अंतर्गत आने वाले विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जल निकासी और लॉजिस्टिक पार्कों की भौतिक अवस्थिति को दुरुस्त करने का हुक्म दिया। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में विभाग को पूरी सक्रियता के साथ काम करना होगा।

​बैठक में ‘प्लस एंड प्ले’ (Plug and Play) इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्णय लिया गया, ताकि छोटे और मध्यम दर्जे के उद्यमी बिना किसी शुरुआती ढांचागत निवेश के सीधे अपनी मशीनें स्थापित कर उत्पादन शुरू कर सकें। भूमि आवंटन की प्रविधि में पूर्ण पारदर्शिता बरतने और जिन आवंटियों द्वारा लंबे समय से भूमि का औद्योगिक उपयोग नहीं किया जा रहा है, उनके विलेखों की समीक्षा कर भूमि वापस लेने की विधा को भी कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया गया ताकि वास्तविक निवेशकों को ससमय जमीन संधारित कराई जा सके।

विभागीय योजनाओं का समयबद्ध निष्पादन और अंतर-विभागीय समन्वय

​योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाले व्यावहारिक विलंब पर चिंता व्यक्त करते हुए उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने विभागीय योजनाओं के समयबद्ध निष्पादन पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना सहित विभिन्न प्रोत्साहन नीतियों का लाभ लाभार्थियों तक पूरी पारदर्शिता और तय समय-सारणी के भीतर पहुंचना अनिवार्य है। फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने वाले पटल सहायकों और प्रभारियों के खिलाफ कड़े दंडात्मक विलेख तैयार किए जाएंगे।

​औद्योगिक विकास की कड़ियों को मजबूत करने के लिए उद्योग विभाग का अन्य संबंधित विभागों जैसे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, ऊर्जा विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ एक मजबूत अंतर-विभागीय ग्रिड (समन्वय) स्थापित करने का निर्देश दिया गया। सचिव कुंदन कुमार ने आश्वस्त किया कि विभाग के भीतर कार्य-संस्कृति को पूरी तरह अनुशासनबद्ध किया जा रहा है और साप्ताहिक आधार पर योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट संकलित की जाएगी ताकि बजटीय आवंटन का शत-प्रतिशत और सही उपयोग धरातल पर सुनिश्चित किया जा सके।

व्यापक रोजगार सृजन और स्थानीय कौशल विकास का रणनीतिक एकीकरण

​इस पूरी समीक्षा बैठक का एक सबसे महत्वपूर्ण और सामाजिक कोण राज्य के भीतर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसरों का सृजन करने से जुड़ा हुआ था। उद्योग मंत्री ने रेखांकित किया कि औद्योगिक विकास का वास्तविक पैमाना यही है कि वह स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के संबल निर्मित कर सके। इसके लिए बिहार की नई टेक्सटाइल, लेदर और फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) नीतियों के तहत स्थापित होने वाले उद्योगों में स्थानीय जनशक्ति (लेबर फोर्स) के नियोजन को कड़ाई से प्राथमिकता देने की बात कही गई।

​श्रम संसाधन विभाग और विभिन्न तकनीकी शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर उद्योगों की तात्कालिक मांग के अनुरूप स्थानीय युवाओं के कौशल संवर्द्धन (स्किल डेवलपमेंट) की प्रविधि तय की गई है। टेक्सटाइल पार्कों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के आस-पास विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे विनिर्माण क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की कमी को दूर किया जा सके और बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए अन्य विकसित राज्यों की ओर पलायन करने के विसंगतिपूर्ण चक्र से विधिक मुक्ति मिल सके।

उद्यमियों के लिए अनुकूल इकोसिस्टम और निरंतर फीडबैक तंत्र का विन्यास

​बैठक के अंतिम चरण में बिहार के भीतर उद्योग अनुकूल वातावरण को और अधिक मजबूत और लचीला बनाने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि वे केवल कार्यालयों के भीतर बैठकर नीतियां न बनाएं, बल्कि धरातल पर काम कर रहे उद्यमियों, चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों और स्टार्ट-अप संस्थापकों के साथ निरंतर संवाद और फीडबैक की प्रणालियां स्थापित करें। इसके लिए जिला स्तर पर ‘उद्यमी चौपाल’ और प्रमंडलीय स्तर पर औद्योगिक सम्मेलनों का सांगठनिक खाका तैयार करने को कहा गया है।

​उद्यमियों की समस्याओं और उनकी विधिक शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक समर्पित ‘ग्रीवांस रिड्रेसल सेल’ (शिकायत निवारण प्रकोष्ठ) को पूरी तरह क्रियाशील करने की प्रविधि पर भी सहमति बनी, जिसकी सीधी कमान उद्योग विभाग के वरीय निदेशकों के हाथों में संधारित होगी। सरकार की मंशा साफ है कि स्थापित हो चुकी औद्योगिक इकाइयों को किसी भी प्रकार के स्थानीय व्यवधान या प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े, जिससे राज्य की छवि एक सुरक्षित और प्रगतिशील औद्योगिक गंतव्य के रूप में राष्ट्रीय विलेखों में सुदृढ़ हो सके।

  • ये भी पढ़े..

    ‘संसद चलो’ मार्च के बाद दिल्ली में तनाव बरकरार: घायल छात्रा की हालत नाजुक, ICU में वेंटिलेटर पर इलाज; जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन जारी

    Share Add as a preferred…