
पटना, 18 मई 2026। बिहार के घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक प्रक्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और ऊर्जा अवसंरचना के आधुनिक विन्यास को तीव्र गति देने की दिशा में एक बहुत बड़ा नीतिगत संज्ञान लिया गया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत सोमवार को संकट प्रबंधन समूह (क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप – CMG) की छठी उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की। सचिवालय में संपन्न हुई इस गहन समीक्षा के दौरान राज्य के भीतर पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों की भौतिक प्रगति, घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की दैनिक आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति और पेट्रोल-डीजल जैसे अनिवार्य पेट्रोलियम उत्पादों की बाजार में उपलब्धता की सघन और बिंदुवार समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों और तेल विपणन कंपनियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए कि उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए वितरण विलेखों में पूर्ण पारदर्शिता और प्रशासनिक कड़ाई हर हाल में संधारित रहनी चाहिए।
बांका और सहरसा के जुड़ाव से आधे से अधिक बिहार हुआ गैसयुक्त, पीएनजी कनेक्शन में रिकॉर्ड उछाल
बैठक के दौरान प्रस्तुत की गई प्रगति रिपोर्ट के विलेखों से यह साफ हुआ है कि बिहार में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) के बुनियादी ढांचे का विस्तार अब अत्यंत तीव्र गति से हो रहा है। गत 5 मई 2026 को सहरसा और आज यानी 18 मई 2026 को बांका जिले को इस नेटवर्क से विधिक रूप से जोड़ने के साथ ही बिहार के कुल 20 जिले अब पूरी तरह से गैस नेटवर्क ग्रिड के अंतर्गत आ चुके हैं। भौगोलिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो राज्य के 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से में अब यह आधुनिक जन-सुविधा पहुंच चुकी है।
ढांचागत प्रगति के आंकड़ों की बात करें तो पिछले वर्ष तक राज्य के भीतर पीएनजी कनेक्शन प्रदान करने की गति महज 3,000 से 3,500 प्रति माह के आंशिक स्तर पर संधारित थी। चालू वर्ष के अप्रैल 2026 में इसमें एक रिकॉर्ड उछाल दर्ज किया गया और यह रफ्तार बढ़कर 10,952 कनेक्शन प्रति माह के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई। मई महीने के शुरुआती 18 दिनों के भीतर ही कुल 6,252 नए घरेलू पीएनजी (D-PNG) कनेक्शनों को लाइव कर उपभोक्ताओं के रसोईघरों से जोड़ दिया गया है। 18 मई 2026 की वर्तमान स्थिति के अनुसार, पूरे बिहार में कुल 1.15 लाख घरेलू पीएनजी कनेक्शन पूरी तरह से क्रियाशील हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पिछले दो महीनों के भीतर 70 नए बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को भी इस संजाल से एकीकृत किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप मार्च की तुलना में अप्रैल 2026 में दैनिक गैस बिक्री की मात्रा में लगभग 27 प्रतिशत की भारी व्यावसायिक वृद्धि दर्ज की गई है।
एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी के खिलाफ महाअभियान, 154 प्राथमिकियां दर्ज
घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों (LPG) की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने वाले और सिलेंडरों के अवैध डायवर्जन में लिप्त डिफाल्टरों के खिलाफ की गई दंडात्मक प्रविधियों का विवरण लिया। आंकड़ों के अनुसार, 18 मई 2026 तक की अवस्थिति के मुताबिक राज्य भर में औसत दैनिक रिफिल आपूर्ति 3,59,391 सिलेंडरों की दर्ज की गई है। वर्तमान समय में उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंचने में राज्य स्तर पर औसतन 4.33 दिनों का डिलीवरी बैकलॉग चल रहा है। इस व्यावहारिक देरी को शून्य पर लाने और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए पूरे सूबे में कड़े और औचक छापेमारी अभियानों का विन्यास तैयार किया गया।
गैस एजेंसियों की मनमानी को पूरी तरह से ब्लॉक करने के लिए चलाए गए इस महाअभियान के तहत अब तक राज्य भर की कुल 30,500 गैस एजेंसियों और 29,663 अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों व होटलों का प्रशासनिक निरीक्षण किया गया है। इस सघन चेकिंग के दौरान घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग करने की विसंगति पाए जाने पर कुल 2,333 अवैध सिलेंडर ऑन-स्पॉट जब्त किए गए। जमाखोरी और कालाबाजारी की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 6ए (6A) के तहत कुल 40 कड़े विभागीय मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि गंभीर अनियमितताओं में संलिप्त डिफाल्टरों और दलालों के खिलाफ कुल 154 नियमित प्राथमिकियां (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया है।
कृषि सीजन के चलते डीजल की मांग में 10 प्रतिशत की वृद्धि, पेट्रोल पंपों पर परिचालन सामान्य
पेट्रोलियम उत्पादों की बाजार अवस्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए बैठक में यह जानकारी दी गई कि बिहार के सभी जिलों में संचालित हो रहे कुल 3,590 रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंप) पर ईंधन का स्टॉक पूरी तरह संधारित है और वहां परिचालन सामान्य रूप से चल रहा है। वर्तमान समय में खरीफ फसलों की तैयारी और ग्रीष्मकालीन कृषि सीजन के चरम पर होने के कारण सिंचाई कार्यों के लिए प्रयुक्त होने वाले हाई-स्पीड डीजल (HSD) की नोजल बिक्री में मार्च 2026 की तुलना में 10 प्रतिशत का एक बड़ा उछाल दर्ज किया गया है।
मुख्य सचिव ने इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और गेल (GAIL) जैसी प्रमुख तेल कंपनियों के प्रबंधकों को निर्देश दिया कि ग्रामीण प्रक्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर डीजल का बंपर स्टॉक हमेशा आरक्षित रखा जाए ताकि किसानों को खेती के इस महत्वपूर्ण समय में ईंधन के लिए किसी भी प्रकार की जमाखोरी या ऊंचे दामों की प्रताड़ना न झेलनी पड़े। तेल कंपनियों ने आश्वस्त किया है कि उनके डिपो और परिवहन ग्रिड पूरी तरह मुस्तैद हैं और राज्य में डीजल की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
लंबित पीएनजी आवेदनों के निपटारे के लिए अतिरिक्त मानव बल और ठेकेदारों का प्रतिनियोजन
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने समीक्षा के उपरांत जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कतिपय कड़े दिशा-निर्देश और समयबद्ध टास्क सौंपे हैं। वर्तमान में राज्य के भीतर पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं के कुल 31,774 आवेदन विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़े हुए हैं। मुख्य सचिव ने इस लिपिकीय और तकनीकी देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी संबंधित सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं को सख्त हिदायत दी कि वे तुरंत अतिरिक्त तकनीकी मानव बल, पाइपलाइन इंजीनियरों और अनुबंधित ठेकेदारों की संख्या को दोगुना करें। इन सभी 31 हजार से अधिक लंबित आवेदनों का निपटारा एक निश्चित टाइमलाइन के भीतर पूरी तरह से ‘मिशन मोड’ में करने का आदेश दिया गया है ताकि शहरी उपभोक्ताओं को पाइपलाइन गैस का लाभ तुरंत मिल सके।
गैर-गैसयुक्त 9 जिलों के जिलाधिकारियों को भूमि आवंटन और वन विभाग की एनओसी का टास्क
गैस नेटवर्क के विस्तार की राह में आ रही प्रशासनिक और विधिक अड़चनों को दूर करने के लिए मुख्य सचिव ने जिला प्रशासनों की जवाबदेही तय की है। राज्य के जिन 9 जिलों (जैसे कैमूर, सीवान, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण आदि) में अभी तक गैस ग्रिड नहीं पहुंच सका है, वहां सिटी गेट स्टेशन (CGS) या डिस्ट्रिक्ट रेगुलेटिंग स्टेशन (DRS) के निर्माण के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने की प्रविधि चल रही है। मुख्य सचिव ने इन सभी 9 जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को कड़ा निर्देश जारी किया कि वे व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हुए तेल कंपनियों के साथ आपसी समन्वय स्थापित करें और स्टेशन निर्माण के लिए आवश्यक सरकारी भूमि के हस्तांतरण और निजी भूमि अर्जन से जुड़े मामलों को विधिक प्रक्रियाओं के भीतर तुरंत सुलझाएं।
इसके साथ ही, मधुबनी जिले में पिछले एक वर्ष की लंबी अवधि से कतिपय तकनीकी विसंगतियों के कारण लंबित पड़े वन विभाग की मंजूरी (Forest Clearance) के संवेदनशील मामले पर मुख्य सचिव ने गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने पर्यावरण एवं वन विभाग के आला अधिकारियों के साथ तुरंत समन्वय स्थापित कर इस अटके हुए विलेख को क्लीयर करने और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की प्रक्रिया को इसी सप्ताह के भीतर कड़ाई से पूर्ण करने का अंतिम आदेश जारी किया है ताकि मधुबनी में पाइपलाइन बिछाने का काम निर्बाध रूप से आगे बढ़ सके।
दूरसंचार टावरों की निरंतरता और अनुबंधित श्रमिकों के लिए 5 किग्रा छोटे सिलेंडरों की अनिवार्यता
बुनियादी ढांचे के विकास और नागरिक संचार व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए मुख्य सचिव ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया। उन्होंने कहा कि राज्य के भीतर चल रहे बड़े निर्माण कार्यों, एक्सप्रेसवे परियोजनाओं, पुल-पुलियों के निर्माण स्थलों और सुदूर देहातों में स्थापित दूरसंचार (टेलीकॉम) टावरों के निरंतर संचालन के लिए डीजल की आपूर्ति को बिना किसी रुकावट के संधारित रखा जाए। इन क्षेत्रों में ईंधन की कमी से डिजिटल कनेक्टिविटी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
इसके समानांतर, सामाजिक कल्याण के कोण को शामिल करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि विभिन्न निर्माण परियोजनाओं, रेलवे बुनियादी ढांचों और सड़क चौड़ीकरण के कार्यों में लगे हुए प्रवासी और अनुबंधित मजदूरों व दैनिक श्रमिकों की भोजन पकाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार में 5 किलोग्राम क्षमता वाले एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता को अनिवार्य रूप से बनाए रखा जाए। गैस कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन छोटे सिलेंडरों की जमाखोरी को रोकें और निर्माण स्थलों के समीप इनके वितरण काउंटरों का विन्यास करें ताकि गरीब मजदूरों को नशीले या पारंपरिक लकड़ी के धुओं से मुक्ति मिल सके और उन्हें सुगमता से स्वच्छ ईंधन संधारित हो सके।
बैठक के अंतिम चरण में संपूर्ण विलेखों की समीक्षा पूरी करने के बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बिहार की जनता को पूरी तरह से आश्वस्त किया कि वर्तमान समय में संपूर्ण बिहार राज्य के भीतर पेट्रोलियम तेल, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की कोई तीव्र, गंभीर या आंशिक संकट की स्थिति मौजूद नहीं है। वितरण, भंडारण और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सभी प्रणालियां पूरी तरह से सुचारू, सुदृढ़ और प्रशासनिक नियंत्रण के भीतर कड़ाई से संधारित हैं।


