ओवैसी की AIMIM ने हुमायूं कबीर से तोड़ा गठबंधन, वायरल वीडियो के बाद बंगाल की सियासत में हलचल

कोलकाता, 10 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। की पार्टी (AIMIM) ने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता से अपना गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है।

यह फैसला उस कथित वीडियो के सामने आने के बाद लिया गया, जिसमें हुमायूं कबीर चुनाव में पैसों के इस्तेमाल को लेकर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और इसके साथ छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है।

वीडियो विवाद के बाद त्वरित कार्रवाई

वीडियो वायरल होते ही AIMIM ने तुरंत दूरी बनाते हुए सोशल मीडिया के जरिए गठबंधन खत्म करने की घोषणा की। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि वह किसी भी ऐसे विवाद या गतिविधि का हिस्सा नहीं बन सकती, जिससे समुदाय की छवि पर सवाल उठे।

AIMIM ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के मुसलमान लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े रहे हैं, ऐसे में उनके मुद्दों को गंभीरता से उठाना जरूरी है, न कि विवादों में उलझाना।

1000 करोड़ की कथित डील से बढ़ा विवाद

वायरल वीडियो में कथित तौर पर 1000 करोड़ रुपये की डील की चर्चा होने से मामला और ज्यादा गंभीर हो गया है। इसके बाद विपक्षी दलों ने हुमायूं कबीर पर निशाना साधते हुए उन्हें भाजपा की “बी टीम” तक करार दिया।

(टीएमसी) के नेताओं ने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम भाजपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य राज्य के वोट समीकरण को प्रभावित करना है।

चुनाव से पहले बदला समीकरण

गौरतलब है कि 25 मार्च को ही AIMIM और हुमायूं कबीर के बीच गठबंधन की घोषणा हुई थी। उस समय इसे पश्चिम बंगाल में तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यह गठबंधन मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकता है और सत्तारूढ़ तथा अन्य दलों के समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

लेकिन मतदान से ठीक पहले इस विवाद के सामने आने से यह संभावित गठजोड़ टूट गया और चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया।

मुस्लिम वोट बैंक पर असर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। राज्य में उनकी आबादी लगभग 27 से 30 प्रतिशत के बीच मानी जाती है और करीब 100 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां उनका प्रभाव सीधा परिणाम तय करता है।

2021 के विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में मुस्लिम विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, जिनमें अधिकांश से थे।

अब AIMIM के अकेले चुनाव लड़ने के फैसले से मुस्लिम वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ गई है, जिसका सीधा फायदा सत्तारूढ़ दल को मिल सकता है।

टीएमसी बनाम भाजपा आरोप-प्रत्यारोप

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। टीएमसी जहां भाजपा पर पर्दे के पीछे राजनीति करने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों को खारिज किया जा रहा है।

आगे क्या

AIMIM और हुमायूं कबीर के बीच गठबंधन टूटने से पश्चिम बंगाल चुनाव में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस फैसले का वोटिंग पैटर्न और चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है।

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