
जयपुर। भारत की सैन्य रणनीति और आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति को लेकर एक बार फिर बड़ा संदेश सामने आया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक साल पूरा होने के मौके पर भारतीय सेना ने साफ कहा कि यह अभियान किसी अंत का संकेत नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ लंबी लड़ाई की शुरुआत थी। जयपुर में आयोजित विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑपरेशन की सफलता, भारत की सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली को लेकर कई अहम बातें साझा कीं।
इस मौके पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी Rajiv Ghai ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रहा, बल्कि जरूरत पड़ने पर सटीक और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य केवल जवाब देना नहीं था, बल्कि दुश्मन की रणनीति और उसकी आतंक समर्थक संरचना को गहरा संदेश देना भी था।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर अंत नहीं है, यह सिर्फ शुरुआत है। आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।” उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान सेना ने अपने तय लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किए और सीमित समय में प्रभावी सैन्य कार्रवाई कर दुश्मन को स्पष्ट संदेश दिया।
सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि भारत ने बिना किसी लंबे युद्ध में उलझे अपने सैन्य और रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल किया। अधिकारियों ने बताया कि पूरी कार्रवाई बेहद सुनियोजित तरीके से की गई थी और इसमें सटीक खुफिया जानकारी, तकनीकी समन्वय और आधुनिक सैन्य संसाधनों की बड़ी भूमिका रही।
सेना ने इस दौरान भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता को भी ऑपरेशन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि आज भारतीय सेना के 65 प्रतिशत से अधिक रक्षा उपकरण देश में ही तैयार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल की गई कई आधुनिक हथियार प्रणालियां, मिसाइलें, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित थे।
उन्होंने विशेष रूप से BrahMos और Akash जैसी स्वदेशी प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन हथियारों ने अभियान को निर्णायक बढ़त दिलाई। इसके अलावा आधुनिक निगरानी प्रणाली, लक्ष्य पहचान तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट ने भी अभियान की सफलता में अहम योगदान दिया।
सेना के मुताबिक, स्वदेशी हथियारों और उपकरणों के इस्तेमाल से भारत को केवल आत्मनिर्भरता ही नहीं मिली, बल्कि ऑपरेशन के दौरान जरूरत के अनुसार संसाधनों को तुरंत अनुकूलित करने की क्षमता भी मिली। अधिकारियों ने कहा कि घरेलू उत्पादन के कारण सप्लाई चेन प्रभावित नहीं हुई और सेना ने पूरी गति और आत्मविश्वास के साथ जवाबी कार्रवाई को अंजाम दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाइयों ने अहम भूमिका निभाई। भारतीय एजेंसियों ने सूचना युद्ध में बढ़त बनाए रखी और दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी। सेना ने कहा कि खुफिया एजेंसियों द्वारा दी गई सटीक जानकारी के कारण लक्ष्य चुनने और कार्रवाई को सफल बनाने में मदद मिली।
सेना ने इस अभियान के दौरान सरकार की भूमिका की भी सराहना की। अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माहौल को संभालने, आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने और देश की जनता को आश्वस्त करने का काम प्रभावी ढंग से किया। इसके कारण सैन्य कार्रवाई को राजनीतिक और रणनीतिक समर्थन मिला।
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए बड़े आतंकी हमले के बाद हुई थी। उस हमले में कई लोगों की जान गई थी और पूरे देश में भारी आक्रोश देखने को मिला था। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचों और लॉन्च पैड्स को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की थी।
सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान कई आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया और सीमा पार स्थित कई रणनीतिक स्थानों को नुकसान पहुंचाया गया। भारत की इस सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान पर भारी दबाव बना और बाद में उसने तनाव कम करने की अपील की थी। भारत ने भी अपने रणनीतिक उद्देश्य हासिल करने के बाद आगे की सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय लिया।
सेना के अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी दिखाया कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि सूचना, तकनीक, साइबर क्षमता और रणनीतिक समन्वय भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। भारत ने इस अभियान में बहुस्तरीय रणनीति अपनाई, जिससे दुश्मन की कमान और नियंत्रण प्रणाली प्रभावित हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की नई सुरक्षा नीति का प्रतीक बन चुका है। पहले जहां आतंकवादी हमलों के बाद केवल कूटनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिलती थी, वहीं अब भारत सैन्य और रणनीतिक स्तर पर जवाब देने की क्षमता दिखा चुका है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर भी असर पड़ा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सेना ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि भारत भविष्य में भी किसी भी आतंकी चुनौती का सख्ती से जवाब देगा। अधिकारियों ने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक और सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सोच को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दी है। खासतौर पर स्वदेशी रक्षा उपकरणों के सफल इस्तेमाल ने भारत के रक्षा उद्योग को भी मजबूती दी है।
अब ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर सेना के इस स्पष्ट संदेश को केवल एक सैन्य बयान नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति अब अधिक आक्रामक, तकनीकी और आत्मनिर्भर स्वरूप में सामने आ रही है।


