​बिहार की ग्रामीण सड़कों पर अब नहीं होगा जान का जोखिम: सचिव का सख्त फरमान, लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों की खैर नहीं

पटना। बिहार के ग्रामीण अंचलों में सुगम और सुरक्षित सफर को लेकर राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक घेराबंदी शुरू कर दी है। ग्रामीण कार्य विभाग ने प्रदेश के सुदूरवर्ती इलाकों में बिछी सड़कों के नेटवर्क को न केवल आधुनिक बनाने, बल्कि उन्हें दुर्घटनामुक्त करने के लिए एक व्यापक ‘सेफ्टी ऑडिट’ और सुधार कार्यक्रम का आगाज़ किया है। गुरुवार, 07 मई 2026 को विभागीय सचिव दिवेश सेहरा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया कि अब ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। विभाग ने विशेष रूप से उन दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) की पहचान कर ली है, जहाँ ‘लाइन ऑफ साइट’ यानी चालक की दृश्यता बाधित होती है। इन स्थलों पर अब शत-प्रतिशत रेट्रो-रिफ्लेक्टिव ट्रैफिक साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह पहल न केवल हादसों को रोकने में सहायक होगी, बल्कि रात के समय और धुंध के दौरान भी ग्रामीण सड़कों पर ड्राइविंग को सुरक्षित बनाएगी।

रेट्रो-रिफ्लेक्टिव संकेतों से सजेगी ग्रामीण सड़कें: सुरक्षा का नया मापदंड

​बिहार के ग्रामीण विकास के विजन में अब सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। समीक्षा बैठक के दौरान यह आदेश जारी किया गया कि ग्रामीण पथों पर दृश्यता बाधित करने वाले मोड़ों और जंक्शनों पर उच्च श्रेणी के रेट्रो-रिफ्लेक्टिव ट्रैफिक साइन लगाए जाएं। ये ऐसे संकेतक होते हैं जो हल्की रोशनी पड़ने पर भी तेजी से चमकते हैं, जिससे वाहन चालक को मोड़ या अवरोध की जानकारी काफी पहले मिल जाती है।

​इसके अतिरिक्त, विभाग ने ग्रामीण पथों के सौंदर्यीकरण और सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित कार्यों को अनिवार्य बनाया है:

  • जेब्रा क्रॉसिंग का निर्माण: गांवों के मुख्य चौराहों और स्कूलों के पास अनिवार्य रूप से जेब्रा क्रॉसिंग बनाई जाएगी।
  • ग्राम सूचना पट्ट: हर गांव के प्रवेश द्वार पर स्पष्ट बोर्ड लगाए जाएंगे।
  • किलोमीटर और 200 मीटर स्टोन्स: पथों की दूरी को दर्शाने वाले पत्थरों की स्थापना हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी ताकि यात्रियों को सटीक स्थान की जानकारी मिल सके।

​सचिव ने निर्देश दिया है कि ये कार्य केवल दिखावा नहीं होने चाहिए, बल्कि इनकी गुणवत्ता ऐसी हो कि ये लंबे समय तक सड़कों पर बने रहें। इन सुरक्षा उपायों की अनदेखी करने वाले संवेदकों पर भारी जुर्माना लगाने की भी योजना है।

क्वालिटी कंट्रोल सेल का पुनर्गठन: परमानेंट फ्लाइंग स्क्वॉड रखेगा नजर

​बिहार की ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों पर विराम लगाने के लिए विभाग ने एक नया ‘निगरानी तंत्र’ विकसित किया है। विभाग के क्वालिटी कंट्रोल सेल (गुणवत्ता नियंत्रण प्रकोष्ठ) को पूरी तरह से पुनर्गठित किया जा रहा है। इसके तहत अब राज्य स्तर पर एक परमानेंट फ्लाइंग स्क्वॉड (स्थायी उड़नदस्ता) का गठन किया जा रहा है। यह दस्ता बिना किसी पूर्व सूचना के राज्य के किसी भी हिस्से में चल रही सड़क निर्माण योजना की औचक जांच कर सकेगा।

​सिर्फ इतना ही नहीं, विभाग ने क्षेत्रीय और मुख्यालय स्तर पर संचालित प्रयोगशालाओं (Labs) के उन्नयन का भी निर्णय लिया है। इन लैबों को अत्याधुनिक मशीनरी से लैस किया जाएगा ताकि निर्माण सामग्री की जांच में कोई मानवीय त्रुटि या पक्षपात न हो सके। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण के हर चरण पर गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित हो और यदि कहीं भी मानकों के विपरीत काम पाया जाता है, तो तुरंत कार्य रोक दिया जाए।

लापरवाह संवेदकों पर ‘डिजिटल’ और ‘लीगल’ प्रहार

​बैठक में विभाग ने उन ठेकेदारों के खिलाफ सबसे कड़ा रुख अपनाया है जो निविदा प्रक्रिया और काम के निष्पादन में गड़बड़ी करते रहे हैं। सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि दिसंबर 2025 से लेकर अब तक जितनी भी निविदा समिति की बैठकें हुई हैं, उनमें शामिल होने वाले संवेदकों के दस्तावेजों की फिर से जांच की जाए।

  1. ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई: जिन निविदाकारों ने फर्जी दस्तावेज पेश किए हैं या जिन्होंने काम का ‘एलओए’ (Letter of Acceptance) मिलने के बाद भी एग्रीमेंट (एकरारनामा) नहीं किया है, उन्हें तत्काल काली सूची में डाला जाए।
  2. कानूनी कार्रवाई: ऐसे फर्जीवाड़े में शामिल फर्मों पर केवल प्रतिबंध नहीं लगेगा, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा (FIR) भी दर्ज कराया जाएगा।
  3. रेट जस्टिफिकेशन: जिन ठेकेदारों ने निर्धारित लागत से बहुत कम दर पर बोली लगाई है, उन्हें अपना पक्ष रखना होगा। यदि वे यह साबित नहीं कर पाते कि वे कम दर पर गुणवत्तापूर्ण काम कैसे करेंगे, तो उनकी निविदा रद्द कर दी जाएगी।

​वित्तीय अनियमितता को लेकर भी विभाग सख्त है। जिन कार्यपालक अभियंताओं ने खराब काम के बावजूद ठेकेदारों की ‘परफॉरमेंस सिक्योरिटी’ राशि वापस कर दी है, उन्हें चिन्हित कर विभागीय कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।

‘हमारा बिहार हमारी सड़क’ ऐप: 31 मई तक की समय-सीमा

​डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने अपने आधिकारिक ऐप ‘हमारा बिहार हमारी सड़क’ के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया है। सभी पथों के मुख्य सूचना पट्टों पर इस ऐप के उपयोग से संबंधित जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए 31 मई 2026 तक की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। इस ऐप के जरिए कोई भी नागरिक खराब सड़क की फोटो खींचकर सीधे विभाग को शिकायत भेज सकता है। सचिव का मानना है कि जनता की भागीदारी से सड़कों के रखरखाव में पारदर्शिता आएगी और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

​इसके साथ ही, बैंक गारंटी का समय पर नवीनीकरण और ईएमडी (Earnest Money Deposit) की वापसी या जब्ती के मामलों की साप्ताहिक और मासिक आधार पर मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए एक एकीकृत डेटाबेस तैयार किया गया है, जिसकी निगरानी सीधे मुख्यालय स्तर से होगी।

ग्रिड नेटवर्क और सड़क चौड़ीकरण: सात निश्चय-3 का नया रोडमैप

​ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्कता को अगले स्तर पर ले जाने के लिए विभाग ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। सात निश्चय-3 और ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम के तहत अब ग्रामीण पथों की चौड़ाई को 3.75 मीटर से बढ़ाकर 5.5 मीटर किया जाएगा। यह बदलाव उन सड़कों पर प्राथमिकता के साथ लागू होगा जो अधिक आबादी वाले क्षेत्रों को जोड़ती हैं।

​सचिव ने विभाग के इंजीनियरों को निर्देश दिया है कि इसके लिए एक ग्रिड नेटवर्क तैयार किया जाए। इस ग्रिड नेटवर्क की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के लिए 15 मई 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सड़कों की चौड़ाई बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में भारी वाहनों का आवागमन आसान होगा और किसानों को अपनी फसल मंडी तक पहुँचाने में लगने वाला समय कम हो जाएगा। यह केवल सड़क का विस्तार नहीं है, बल्कि ग्रामीण बिहार की आर्थिक समृद्धि के लिए एक नया इंफ्रास्ट्रक्चरल ढांचा तैयार करने की कोशिश है।

​विभाग के इस आक्रामक और सुधारात्मक रुख से बिहार की ग्रामीण कार्य प्रणाली में एक नई ऊर्जा देखी जा रही है। सचिव ने स्पष्ट कर दिया है कि सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें बिना किसी भ्रष्टाचार और लापरवाही के धरातल पर उतारना है। अब आने वाले महीनों में बिहार की ग्रामीण सड़कों पर न केवल ‘रेट्रो-रिफ्लेक्टिव’ साइन बोर्ड चमकेंगे, बल्कि सड़कों की गुणवत्ता में भी एक बड़ा बदलाव महसूस होगा।

  • ये भी पढ़े..

    भागलपुर में बोरे से मिली महिला की लाश, रेलवे हॉल्ट के पास सनसनी; हत्या की आशंका से दहशत

    Share Add as a preferred…

    “मैं 36% अति पिछड़ों का अंगरक्षक हूं” : सम्राट चौधरी का बड़ा दावा, अपराधियों को दी चेतावनी

    Share Add as a preferred…