आरजेडी के सिंबल पर चुनाव लड़ने की अटकलों पर बोले सूरजभान सिंह – “मैं तो राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी में हूं”

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनज़र राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। इसी बीच राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) की अहम बैठक रविवार को पटना में संपन्न हुई। बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “14 अक्टूबर को यह तय किया जाएगा कि पार्टी का अगला रुख क्या होगा।”

पारस ने साफ किया कि अभी तक किसी गठबंधन या सीट बंटवारे पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा,

“किसी भी गठबंधन में सीट शेयरिंग अभी फाइनल नहीं हुई है। जब फाइनल होगा, तब हम अपना फैसला लेंगे। सोमवार रात या मंगलवार तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।”


सूरजभान सिंह ने दी सफाई: आरजेडी के सिंबल पर चुनाव लड़ने से इनकार

बैठक के बाद पूर्व सांसद सूरजभान सिंह से जब यह सवाल पूछा गया कि क्या वे या उनके परिवार के सदस्य राजद (RJD) के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे, तो उन्होंने कहा,

“अभी ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। मैं तो राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी में हूं। फैसले के लिए सारा अधिकार पारस जी को दे दिया गया है।”

सूरजभान ने यह भी स्पष्ट किया कि राजद में पार्टी विलय की कोई चर्चा नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि गठबंधन और सीट बंटवारे से जुड़ा अंतिम निर्णय कल रात या परसों सुबह तक घोषित किया जाएगा।


तीसरे मोर्चे की तैयारी में पारस?

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, आरजेडी ने पशुपति पारस को पार्टी विलय के बदले तीन सीटों का प्रस्ताव दिया था, लेकिन पारस इसके लिए तैयार नहीं हुए। अब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि पशुपति पारस बीएसपी और एआईएमआईएम के साथ तीसरा मोर्चा बना सकते हैं। बताया जा रहा है कि वे असदुद्दीन ओवैसी के संपर्क में भी हैं।


सूरजभान परिवार को RJD का प्रस्ताव

वहीं सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी ने सूरजभान सिंह और उनके परिवार को अपने सिंबल पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है।
सूत्र बताते हैं कि

  • सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को मोकामा सीट से
  • और उनके भाई चंदन सिंह को लखीसराय सीट से
    चुनाव लड़ने का ऑफर मिला है।

अगर यह प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो यह राजद के लिए एक बड़ा राजनीतिक दांव साबित हो सकता है।


निष्कर्ष

आरजेडी और पशुपति पारस के बीच बातचीत अभी निर्णायक मोड़ पर है। पारस के 14 अक्टूबर तक अंतिम फैसला लेने के ऐलान के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वे महागठबंधन में शामिल होंगे, तीसरा मोर्चा बनाएंगे या अकेले मैदान में उतरेंगे।


 

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