
पटना, 22 जुलाई 2025: भारतीय सेना के शहीदों की वीरांगनाओं और पूर्व सैनिकों की पत्नियों एवं पुत्रियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रेरक पहल की गई है। अब देशभर के सेना संचालित स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की स्कूली पोशाकें इन्हीं वीरांगनाओं द्वारा तैयार की जाएंगी। इस पहल के तहत उन्हें सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, साथ ही उन्नत स्वचालित मशीनें और उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
यह कार्यक्रम सैनिक कल्याण निदेशालय, भारतीय स्टेट बैंक, और नव अस्तित्व फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है। राजधानी पटना के अल्बर्ट एक्का भवन में इन महिलाओं के लिए दस दिवसीय सिलाई प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ किया गया है।
ब्रिगेडियर जसपाल बोले: वीरांगनाओं को मिलेगा सेना का बाजार
इस शिविर का उद्घाटन करते हुए बिहार रेजीमेंट सेंटर के ब्रिगेडियर केडी जसपाल ने कहा कि यह पहल शहीद सैनिकों के परिवारों के प्रति समाज और सेना की जिम्मेदारी को दर्शाती है। उन्होंने कहा:
“आप बस काम शुरू कीजिए, आपके उत्पादों के लिए बाजार सेना उपलब्ध कराएगी।”
ब्रिगेडियर जसपाल ने यह भी बताया कि सेना के देशभर में संचालित सैकड़ों स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पोशाक सिलने का ऑर्डर वीरांगनाओं को दिया जाएगा। उन्होंने इसे एक अभूतपूर्व और मानवीय प्रयास करार दिया।
प्रशिक्षण के बाद मिलेगा स्वचालित उपकरण और बाजार से जुड़ाव
- प्रशिक्षण के बाद भारतीय स्टेट बैंक की ओर से स्वचालित सिलाई मशीन और सिलाई टूल किट भी प्रदान की जाएगी।
- नव अस्तित्व फाउंडेशन द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
- प्रशिक्षण के उपरांत महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि सेना के स्थायी ऑर्डर के माध्यम से उन्हें स्थायी रोजगार भी मिल सकेगा।
प्रशिक्षण शिविर में शामिल रहे कई सैन्य अधिकारी
इस अवसर पर कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:
- बीके बंगारराजू, मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक (बिहार-झारखंड)
- ब्रिगेडियर मृगेंद्र कुमार, निदेशक, सैनिक कल्याण निदेशालय
- कर्नल संतोष कुमार त्रिपाठी, सहायक निदेशक
- कर्नल मनोज कुमार, जिला सैनिक कल्याण पदाधिकारी
- कई पूर्व सैनिक और वीरांगनाएं भी मौजूद रहीं।
अन्य जिलों में भी होगा आयोजन
सैन्य अधिकारियों ने यह भी घोषणा की कि इसी तरह के प्रशिक्षण शिविर अन्य जिलों में भी समय-समय पर आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक वीरांगनाएं इस पहल से लाभान्वित हो सकें।
यह पहल न सिर्फ शहीदों के परिवारों को सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और स्थायी आजीविका का अवसर भी प्रदान कर रही है।


