
पटना, 22 जुलाई 2025: राज्य के किसानों में कृषि तकनीकों को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। इसका उदाहरण है मिट्टी की जांच को लेकर किसानों की बढ़ती रुचि। बिहार सरकार के कृषि विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 5 लाख मिट्टी नमूनों का सफलतापूर्वक विश्लेषण किया गया है। यह कार्य मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के तहत किया गया, जो राज्य सरकार की एक प्रमुख कृषि पहल है।

उत्पादन में वृद्धि, लागत में कमी
मिट्टी जांच के बाद किसानों को यह जानकारी मिल रही है कि उनके खेत की मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और किसकी कमी है। इससे वे वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का चयन कर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर पा रहे हैं। परिणामस्वरूप किसानों की आय में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
राज्य भर में फैला है प्रयोगशालाओं का नेटवर्क
राज्य सरकार ने मिट्टी की जांच के लिए व्यापक आधारभूत ढांचा विकसित किया है:
- 38 जिलों में जिला स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।
- 9 प्रमंडलों में चलंत मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं संचालित हो रही हैं।
- ग्राम स्तर पर 72 प्रयोगशालाएं किसानों को सेवा दे रही हैं।
- अनुमंडल स्तर पर, 2023-24 में 3 तथा 2024-25 में 11 नई प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।
इसके अतिरिक्त, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं में भी नियमित रूप से नमूनों की जांच की जा रही है।
12 वैज्ञानिक मानकों पर होती है जांच
मिट्टी नमूनों की जांच पीएच स्तर, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (ईसी), नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सोडियम, जिंक, कॉपर, मैग्नीशियम और आयरन सहित 12 वैज्ञानिक मापदंडों पर की जाती है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने हेतु सॉफ्टवेयर आधारित नमूना संग्रहण प्रणाली लागू की गई है, जिसमें खेत का स्थान, किसान का विवरण और फोटो एकीकृत ऐप पर अपलोड किया जाता है।
अब मोबाइल पर भी मिल रहा डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड
जांच पूरी होने के बाद किसानों को अब डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड उनके मोबाइल पर भेजा जा रहा है, जिससे प्रक्रिया और अधिक तेज़ और पारदर्शी बनी है। जांच की गुणवत्ता की निगरानी हेतु केंद्रीय प्रयोगशाला के साथ-साथ राज्य के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं को रेफरल प्रयोगशाला के रूप में अधिसूचित किया गया है।


