
पटना, 26 जुलाई 2025 — बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग ने ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण में ग्लोबल की जगह केवल राष्ट्रीय स्तर पर निविदा आमंत्रित करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य स्थानीय संवेदकों की भागीदारी बढ़ाना और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।
ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि यह निर्णय पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इससे राज्य को अब तक 816.68 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
मुख्य घोषणाएँ एवं निर्णय:
- पथवार निविदा प्रणाली समाप्त, अब प्रखंडवार पैकेज नीति लागू
- सात वर्षों तक सड़कों का अनुरक्षण अनिवार्य; 5वें वर्ष में पुनः कालीकरण
- अब तक 2024-25 में 24,480 किमी के 14,036 पथ स्वीकृत
- 2025-26 में अब तक 6,484 किमी के 4,079 पथों को मंजूरी
- कुल 1038 पैकेज का कार्य आवंटित, जिनमें:
- 657 पैकेज – मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना (MMGSUY)
- 169 पैकेज – मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष)
- 212 पैकेज – मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना
नेशनल बिडिंग से स्थानीय कंपनियों को मिला लाभ
मंत्री चौधरी ने स्पष्ट किया कि नेशनल बिडिंग और पैकेज नीति के कारण अधिकतर कार्य स्थानीय पंजीकृत संवेदकों को मिले हैं। बिहार के बाहर से केवल कुछ कंपनियाँ (झारखंड, उत्तर प्रदेश) ही सफल हो सकीं।
नवीन पारदर्शिता उपाय:
- CMBD (Combined Model Bidding Document) से निविदा प्रक्रिया पूर्णत: डिजिटल और पेपरलेस
- Rapid Response Vehicle अनिवार्य, सड़क खराबी पर त्वरित सुधार हेतु
- 70-75% बजट पहले वर्ष में और 25-30% अगले सात वर्षों में
मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना पुनः आरंभ
नौ वर्षों बाद फिर से शुरू हुई योजना के तहत 704 पुलों की स्वीकृति, जबकि 260 प्रस्ताव प्रक्रियाधीन। इससे ग्रामीण आबादी को शहरों, बाजारों, स्कूलों और अस्पतालों तक बेहतर संपर्क मिलेगा।
उपस्थित अधिकारीगण:
प्रेस वार्ता में मंत्री अशोक चौधरी के साथ अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, सचिव एन. सरवण कुमार, विशेष सचिव उज्ज्वल कुमार सिंह, अभियंता प्रमुख निर्मल कुमार, सुल्तान अहमद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


