
नवादा: बिहार के नवादा शहर स्थित हरिश्चंद्र स्टेडियम में प्रशासनिक लापरवाही का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। स्टेडियम के गेट नंबर-3 का जर्जर लोहे का दरवाजा अचानक गिर जाने से एक 8 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है, जबकि लोगों ने प्रशासन और स्टेडियम प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
खेलते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, पुरानी जेल रोड निवासी मुकेश कुमार का 8 वर्षीय पुत्र दीपक कुमार सोमवार की शाम करीब पांच बजे हरिश्चंद्र स्टेडियम के गेट के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान गेट नंबर-3 का जर्जर लोहे का हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा।
गेट की चपेट में आने से दीपक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग और परिजन उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मासूम दीपक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मोहल्ले और आसपास के इलाके में भी शोक की लहर दौड़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक छोटी सी लापरवाही ने एक परिवार से उसका चिराग छीन लिया।
पहले भी गिर चुका था स्टेडियम का गेट
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, स्टेडियम का यह जर्जर गेट पहले भी दो से तीन बार गिर चुका था। इसके बावजूद प्रशासन और स्टेडियम प्रबंधन ने इसकी मरम्मत या बदलाव को लेकर कोई गंभीर कदम नहीं उठाया।
लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते गेट की मरम्मत कर दी जाती, तो आज यह हादसा नहीं होता और एक मासूम की जान बच सकती थी।
बदहाल है हरिश्चंद्र स्टेडियम
हरिश्चंद्र स्टेडियम जिले का प्रमुख मैदान माना जाता है, जहां स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन अवसरों पर जिले के तमाम अधिकारी और जनप्रतिनिधि पहुंचते हैं।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यक्रम खत्म होने के बाद स्टेडियम की देखभाल लगभग बंद हो जाती है। मैदान में गंदगी, टूटी संरचनाएं और सुरक्षा व्यवस्था की कमी लंबे समय से बनी हुई है।
लोगों का आरोप है कि स्टेडियम नियमित रूप से रखरखाव के अभाव में बदहाल स्थिति में पड़ा रहता है।
जिम्मेदार कौन?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी है?
- नगर परिषद?
- जिला प्रशासन?
- खेल विभाग?
- या स्टेडियम प्रबंधन?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की कमी और उदासीनता की वजह से यह हादसा हुआ है।
जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद लोगों ने स्टेडियम की सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग उठाई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस मामले में जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं।
लोगों में आक्रोश
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही की कीमत एक मासूम बच्चे को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है।
अब सभी की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर इस दर्दनाक हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।


