BPSC में रेवेन्यू ऑफिसर बने रजनीश, अब UPSC पास कर बनना चाहते हैं DM

नालंदा: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में नालंदा जिले के एक युवा ने सफलता का परचम लहराया है। कपटिया गांव निवासी और सेवानिवृत्त दारोगा महेश कुमार के पुत्र रजनीश कुमार ने 1077वीं रैंक हासिल कर रेवेन्यू ऑफिसर (राजस्व पदाधिकारी) पद पर चयनित होने का गौरव प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है, वहीं क्षेत्र के युवाओं को भी नई प्रेरणा मिली है।

BPSC में सफलता, लेकिन लक्ष्य अभी बाकी

BPSC में रेवेन्यू ऑफिसर बने रजनीश, अब UPSC पास कर बनना चाहते हैं DM

रेवेन्यू ऑफिसर बनने के बावजूद रजनीश कुमार का लक्ष्य अभी बड़ा है। उन्होंने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे और UPSC परीक्षा पास कर जिलाधिकारी (DM) बनना चाहते हैं।

रजनीश ने बताया कि BPSC का यह उनका तीसरा प्रयास था, जबकि UPSC में वह दो बार मुख्य परीक्षा (Mains) तक पहुंच चुके हैं। उनका मानना है कि निरंतर मेहनत और धैर्य ही सफलता की असली कुंजी है।

“अभी पढ़ाई जारी रखूंगा और UPSC क्रैक कर DM बनना चाहता हूं। BPSC का यह मेरा तीसरा प्रयास था और आखिरकार सफलता मिल गई।” — रजनीश कुमार

असिस्टेंट कमांडेंट की नौकरी छोड़ चुना संघर्ष का रास्ता

रजनीश कुमार ने वर्ष 2020 में UPSC के माध्यम से मिली डिफेंस में असिस्टेंट कमांडेंट की नौकरी छोड़ दी थी, ताकि पूरी तरह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर ध्यान दे सकें। उनका यह फैसला आज उनकी सफलता की कहानी का अहम हिस्सा बन चुका है।

नेतरहाट से शुरू हुआ सफलता का सफर

रजनीश की प्रारंभिक शिक्षा झारखंड के प्रतिष्ठित नेतरहाट विद्यालय से हुई। वर्ष 2011 में उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में 88 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसके बाद इंटरमीडिएट में 78 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उच्च शिक्षा के लिए पटना पहुंचे।

पटना में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अन्य प्रतियोगी छात्रों की मेहनत और सफलता को करीब से देखा, जिसने उन्हें सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित किया।

दिल्ली में कोचिंग, फिर सेल्फ स्टडी से मिली सफलता

स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रजनीश दिल्ली गए और वहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। कोचिंग पूरी होने के बाद उन्होंने घर लौटकर सेल्फ स्टडी जारी रखी।

उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती अकेले रहकर जीवन की छोटी-छोटी जिम्मेदारियों को संभालना था।

अकेले रहकर खाना बनाया, कपड़े धोए, फिर भी नहीं टूटा हौसला

रजनीश कहते हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ रोजमर्रा के काम जैसे खाना बनाना, कपड़े धोना और समय का प्रबंधन करना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर लगातार फोकस बनाए रखा।

उनकी कहानी यह साबित करती है कि आत्मनिर्भरता और अनुशासन सफलता की मजबूत नींव होते हैं।

माता-पिता और भाई को दिया सफलता का श्रेय

BPSC में रेवेन्यू ऑफिसर बने रजनीश, अब UPSC पास कर बनना चाहते हैं DM

रजनीश अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और बड़े भाई को देते हैं। उनका कहना है कि परिवार ने हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया और पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

उनके पिता महेश कुमार पुलिस विभाग से सब-इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। बेटे की सफलता पर उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि कठिन परिश्रम का फल आज पूरे परिवार को मिला है।

परिवार में पहले भी सफलता की मिसाल

रजनीश के बड़े भाई मनीष कुमार SSC के माध्यम से चयनित होकर कोलकाता में ऑडिटर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि दूसरे भाई नीतीश कुमार गांव में व्यवसाय संभालते हैं।

पांच भाई-बहनों वाले इस परिवार में रजनीश सबसे छोटे पुत्र हैं और अब उनकी सफलता पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने रजनीश

नालंदा के इस युवा की सफलता यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों और लगातार असफलताओं के बावजूद यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो सफलता जरूर मिलती है।

अब रेवेन्यू ऑफिसर बनने के बाद भी रजनीश की नजर UPSC पर है और उनका अगला लक्ष्य DM बनकर समाज की सेवा करना है।

ये भी पढ़े..

भागलपुर प्रमंडल में बाढ़ और सुखाड़ से निपटने की तैयारी तेज, आठ जिलों की तैयारियों की हुई विस्तृत समीक्षा

Share Add as a preferred…

बिहार में कौशल विकास को नई रफ्तार, युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस

Share Add as a preferred…