मोहर्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट, भागलपुर प्रमंडल में शांति और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा

भागलपुर। आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से भागलपुर प्रमंडल प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। विधि-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रमंडल स्तर पर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी कड़ी में आयुक्त, मुंगेर सह भागलपुर प्रमंडल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मोहर्रम के दौरान सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई।

आयुक्त कार्यालय प्रकोष्ठ में आयोजित इस प्रमंडल स्तरीय बैठक में भागलपुर और मुंगेर प्रमंडल के सभी जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी शामिल हुए। जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, पुलिस उप महानिरीक्षक बेगूसराय और पुलिस उप महानिरीक्षक मुंगेर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े। बैठक का मुख्य उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती और सभी जिलों में एक समन्वित रणनीति सुनिश्चित करना था।

बैठक में भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, जमुई, खगड़िया, बेगूसराय और शेखपुरा जिलों में मोहर्रम की तैयारियों का बिंदुवार आकलन किया गया। अधिकारियों से पूछा गया कि जिला स्तर पर संयुक्त आदेश जारी करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और किस प्रकार से शांति व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। समीक्षा के दौरान यह भी देखा गया कि जिला, अंचल और थाना स्तर पर शांति समिति की बैठकों का आयोजन किस स्तर तक हुआ है।

आयुक्त ने कहा कि शांति समिति की बैठकें मोहर्रम जैसे संवेदनशील पर्व के दौरान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। स्थानीय समुदायों, धार्मिक संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने से किसी भी संभावित तनाव को पहले ही कम किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि जहां भी आवश्यक हो, अतिरिक्त बैठकें आयोजित की जाएं और स्थानीय स्तर पर विश्वास कायम रखा जाए।

बैठक में जिला नियंत्रण कक्षों की स्थापना और उनकी सक्रियता की भी समीक्षा हुई। आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में कंट्रोल रूम पूरी तरह सक्रिय रहे और 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की जाए। किसी भी आपात स्थिति में सूचना का त्वरित आदान-प्रदान राहत और नियंत्रण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

दंडाधिकारियों और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126, 129 और 135 के तहत की गई कार्रवाई की भी समीक्षा हुई। इन धाराओं के तहत शांति भंग की आशंका वाले मामलों में प्रशासन एहतियाती कदम उठा सकता है। आयुक्त ने कहा कि कानून के तहत उपलब्ध सभी प्रावधानों का उचित उपयोग कर संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाए।

ताजिया जुलूस के लिए लाइसेंस निर्गत करने की प्रक्रिया भी समीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि सभी जुलूस निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों। बिना अनुमति किसी भी जुलूस या आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

त्वरित कार्रवाई दल यानी QRT के गठन पर भी विशेष जोर दिया गया। आयुक्त ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली विशेष टीम तैयार रहे, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में तत्काल हस्तक्षेप किया जा सके। विशेषकर भीड़ वाले इलाकों में QRT की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारी की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मोहर्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता, एंबुलेंस की तैनाती और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी आपात चिकित्सा स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध होनी चाहिए।

ताजिया जुलूस की वीडियोग्राफी को भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। प्रशासन का मानना है कि वीडियोग्राफी सुरक्षा निगरानी के साथ-साथ किसी विवाद की स्थिति में साक्ष्य के रूप में भी उपयोगी साबित होती है। इसके लिए तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा की गई।

आयुक्त प्रेम सिंह मीणा ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि पिछले चार से पांच वर्षों के मोहर्रम से जुड़े आंकड़ों और घटनाओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जाए। इससे संवेदनशील स्थानों की पहचान अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पूर्व में तनाव या विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई हो, वहां अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए।

ऐसे संवेदनशील इलाकों में विशेष शांति समिति बैठकें आयोजित करने और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए। प्रशासन का मानना है कि संवाद और समन्वय ही शांति बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

बैठक में बाउंड डाउन कार्रवाई पर भी विशेष चर्चा हुई। आयुक्त ने निर्देश दिया कि संभावित रूप से शांति भंग करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ समय रहते नोटिस की तामिला सुनिश्चित की जाए और आवश्यकतानुसार पर्याप्त संख्या में बाउंड डाउन कार्रवाई की जाए। इससे संभावित उपद्रव की संभावना कम की जा सकती है।

पुलिस उप महानिरीक्षक, बेगूसराय ने पर्याप्त पुलिस बल की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वहीं पुलिस उप महानिरीक्षक, मुंगेर ने सुझाव दिया कि बाउंड डाउन प्रस्तावों की संख्या बढ़ाई जाए और नव नियुक्त सिपाहियों का योगदान भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाए।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नए सिपाहियों को प्रशिक्षण के लिए भेजना आवश्यक हो, तो उसे मोहर्रम के बाद तक स्थगित किया जाए ताकि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। साथ ही कर्बला स्थलों पर तीन पालियों में पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया, क्योंकि इन स्थानों पर सबसे अधिक भीड़ एकत्रित होती है।

आयुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि मोहर्रम के दौरान डीजे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि इस आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए। किसी भी उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक के अंत में आयुक्त प्रेम सिंह मीणा ने कहा कि मोहर्रम एक संवेदनशील पर्व है और इसके शांतिपूर्ण आयोजन के लिए प्रशासनिक सतर्कता, सामुदायिक सहयोग और प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन बेहद आवश्यक है। उन्होंने सभी अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी, सजगता और समन्वय के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का निर्देश दिया।

कुल मिलाकर प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इस बार मोहर्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर, मजबूत पुलिस तैनाती और निरंतर निगरानी के जरिए प्रशासन शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है।

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