NEET UG 2026: बिहार के छात्रों के लिए बढ़े MBBS के मौके, जानिए PMCH में दाखिले के लिए कितने अंक हो सकते हैं जरूरी

पटना: NEET UG 2026 का परिणाम जारी होने के बाद अब लाखों अभ्यर्थियों की नजर मेडिकल काउंसलिंग और कॉलेज आवंटन पर है। इस बार परीक्षा का सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि 700 से अधिक अंक हासिल करने वाले छात्रों की संख्या घटकर केवल 19 रह गई, जिससे स्पष्ट है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार प्रश्नपत्र अधिक चुनौतीपूर्ण रहा।

बिहार से 68,968 अभ्यर्थी हुए क्वालीफाई

इस वर्ष बिहार से 68,968 छात्रों ने NEET UG 2026 क्वालीफाई किया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि PMCH, NMCH, AIIMS पटना और अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए कितने अंक और रैंक की आवश्यकता होगी।

बिहार में 740 नई MBBS सीटों का बड़ा फायदा

इस बार राज्य के छात्रों के लिए राहत की खबर यह है कि बिहार में 740 नई MBBS सीटें बढ़ाई गई हैं।

  • सरकारी मेडिकल कॉलेजों में: 190 नई सीटें
  • निजी मेडिकल कॉलेजों में: 550 नई सीटें
  • PMCH में: 50 अतिरिक्त सीटें
  • NMCH में: 50 अतिरिक्त सीटें

सीटों में बढ़ोतरी से खासकर मध्यम रैंक वाले अभ्यर्थियों को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की संभावना पहले से अधिक मानी जा रही है।

कठिन पेपर की वजह से घटे हाई स्कोरर्स

NEET एवं मेडिकल प्रवेश परीक्षा विशेषज्ञ विकास चौहान के अनुसार, इस वर्ष NTA ने अपेक्षाकृत कठिन प्रश्नपत्र तैयार किया था। विशेष रूप से फिजिक्स के प्रश्न JEE स्तर के थे, जिसके कारण बहुत कम छात्र 700 से अधिक अंक तक पहुंच सके।

PMCH में एडमिशन के लिए कितने अंक हो सकते हैं जरूरी?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि PMCH जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों को सुरक्षित प्रवेश के लिए लगभग 610 या उससे अधिक अंक की आवश्यकता पड़ सकती है।

उनके अनुसार ऑल इंडिया रैंक (AIR) लगभग 12,000 तक PMCH की अधिकांश सीटें भरने की संभावना है। सीटें बढ़ने के बावजूद PMCH की लोकप्रियता और प्रतिस्पर्धा पहले की तरह बनी रहेगी।

550+ अंक वालों के लिए बढ़ी उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष 550 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की संभावना बेहतर हो सकती है। अनुमान है कि करीब 16 हजार रैंक तक राज्य के अधिकांश सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें भर सकती हैं।

सबसे अधिक फायदा उन छात्रों को मिलने की उम्मीद है, जिनके अंक 550 से 580 के बीच हैं।

राज्य कोटा से मिलेगा बड़ा लाभ

बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में:

  • 85% सीटें राज्य कोटा के तहत बिहार के छात्रों के लिए आरक्षित रहती हैं।
  • 15% सीटें ऑल इंडिया कोटा के माध्यम से भरी जाती हैं।

इस व्यवस्था के कारण बिहार के छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के अपेक्षाकृत अधिक अवसर मिलते हैं।

काउंसलिंग में गलती पड़ सकती है भारी

विशेषज्ञ विकास चौहान ने छात्रों को सलाह दी है कि अब सबसे महत्वपूर्ण चरण काउंसलिंग और चॉइस फिलिंग का है। कई बार अच्छी रैंक होने के बावजूद गलत विकल्प भरने के कारण पसंदीदा मेडिकल कॉलेज नहीं मिल पाता।

उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि अपनी रैंक, श्रेणी और पिछले वर्षों के कट-ऑफ ट्रेंड का अध्ययन कर ही कॉलेजों का चयन करें। जरूरत पड़ने पर अनुभवी काउंसलर या मेंटर की सहायता अवश्य लें।

अब पहले राउंड की कट-ऑफ पर टिकी नजर

NEET UG 2026 में कठिन परीक्षा के बावजूद बिहार के छात्रों के लिए इस बार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की संभावनाएं पहले से बेहतर दिखाई दे रही हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर मेडिकल काउंसलिंग के पहले राउंड और वास्तविक कट-ऑफ जारी होने के बाद ही साफ होगी।

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