
पटना | 28 फरवरी, 2026: पटना की नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। शुक्रवार को सीबीआई की टीम पटना के प्रभात अस्पताल पहुंची, जहाँ छात्रा को इलाज के लिए लाया गया था। करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ में अस्पताल की एक महिला स्टाफ ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे अस्पताल द्वारा दी गई शुरुआती रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अस्पताल में 5 घंटे की पूछताछ: क्या-क्या खुला?
सीबीआई ने महिला स्टाफ से छात्रा के अस्पताल पहुँचने के वक्त की स्थिति पर विस्तृत सवाल पूछे:
- छात्रा की स्थिति: महिला स्टाफ ने बताया कि जब छात्रा को अस्पताल लाया गया, तब वह पूरी तरह बेहोशी की हालत में थी।
- शरीर पर निशान: पूछताछ के दौरान स्टाफ ने पुष्टि की कि छात्रा के शरीर पर खरोंच के निशान मौजूद थे।
- घिनौनी हरकत की चर्चा: स्टाफ के अनुसार, उस वक्त अस्पताल परिसर में यह चर्चा चल रही थी कि छात्रा के साथ कोई घिनौनी हरकत हुई है।
- रिपोर्ट में विरोधाभास: जहाँ पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की बात सामने आई है, वहीं अस्पताल ने मौत की वजह नशीली दवा का ओवरडोज बताई थी। महिला स्टाफ ने इस विसंगति पर कहा कि इसका जवाब लैब स्टाफ ही दे पाएंगे।
कोर्ट का रुख: CBI को ‘शो-कॉज’ और आज जमानत पर सुनवाई
इस मामले के मुख्य आरोपी और हॉस्टल संचालक मनीष रंजन की कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है:
- जमानत याचिका: 26 फरवरी को मनीष रंजन की जमानत याचिका खारिज हो गई थी, जिस पर आज (28 फरवरी) पॉक्सो कोर्ट में दोबारा सुनवाई होनी है।
- CBI को नोटिस: कोर्ट ने 26 फरवरी को सीबीआई को शो-कॉज जारी कर पूछा था कि जब मामला पहले से पॉक्सो कोर्ट में चल रहा है, तो अलग से FIR क्यों दर्ज की गई।
- अधिकारियों की पेशी: कोर्ट ने आज की सुनवाई में सीबीआई के आईओ (IO) और एसआईटी (SIT) को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
सवालों के घेरे में ‘प्रभात अस्पताल’
महिला स्टाफ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह सीबीआई की जांच में पूरा सहयोग करेंगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या रिपोर्ट बदली गई थी, तो उन्होंने इसे जांच का विषय बताया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीआई ने अस्पताल के डॉक्टर सतीश के बारे में उनसे कोई पूछताछ नहीं की है।
VOB का नजरिया: मेडिकल रिपोर्ट का ‘खेल’ या कुछ और?
नीट छात्रा का मामला अब केवल एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि साक्ष्यों के साथ कथित छेड़छाड़ का भी बनता जा रहा है। एक तरफ पोस्टमार्टम रिपोर्ट ‘दुष्कर्म’ की पुष्टि कर रही है और दूसरी तरफ अस्पताल इसे ‘ओवरडोज’ बता रहा था। सीबीआई का 5 घंटे तक स्टाफ को ग्रिल करना यह संकेत है कि जांच की आंच अब अस्पताल के बड़े प्रबंधन तक पहुँचने वाली है। आज पॉक्सो कोर्ट का रुख यह तय करेगा कि मामले की दिशा क्या होगी।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


