जमुई में नक्सली सिकंदर कोडा गिरफ्तार: 9 साल से फरार था, पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़ा

जमुई/लखीसराय — बिहार के जमुई जिले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 9 साल से फरार चल रहे कुख्यात नक्सली सिकंदर कोडा को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी जमुई और लखीसराय के बॉर्डर इलाके में हुई है, जहां पुलिस, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और जिले की डीआईयू टीम ने संयुक्त कार्रवाई में उसे दबोचा।

लखीसराय के चानन का रहने वाला है गिरफ्तार नक्सली

सिकंदर कोडा, लखीसराय जिले के चानन थाना क्षेत्र के कछुआ गांव का निवासी है। वह 2016 से फरार चल रहा था और पुलिस को उसकी लंबे समय से तलाश थी। बरहट थाना पुलिस ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के बाद उसे हिरासत में लेकर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

“पुलिस लगातार नक्सलियों की गिरफ्तारी के लिए काम कर रही है। सरेंडर का मौका सबको दिया जा रहा है। जो नहीं मानेंगे, उन्हें या तो गिरफ्तार किया जाएगा या मारे जाएंगे। सरेंडर करने वालों को सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ मिलेगा।”

– मदन कुमार आनंद, पुलिस अधीक्षक, जमुई

2010 और 2016 में दर्ज हैं गंभीर मामले

गिरफ्तार नक्सली सिकंदर कोडा पर 2010 और 2016 में नक्सली गतिविधियों, गोलीबारी और अन्य आपराधिक मामलों में केस दर्ज है। वह यूपीए एक्ट का भी आरोपी है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह पहली बार है जब सिकंदर कोडा को गिरफ्तार किया गया है।

बरहट थाना क्षेत्र में उस पर दो मामले दर्ज हैं, और वह क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क को मजबूत करने का प्रयास कर रहा था।

बांका से फूलो राय की भी हुई थी गिरफ्तारी

गौरतलब है कि इससे पहले, 17 अप्रैल को भी पुलिस को एक और सफलता मिली थी जब जमुई का वांछित नक्सली तारकेश्वर राय उर्फ खिताबी राय उर्फ तारो उर्फ फूलो राय को सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने चरकापत्थर (जमुई) से गिरफ्तार किया था। वह मुंगेर, खड़गपुर और बांका समेत कई जिलों में आपराधिक मामलों में वांछित था।

नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी मजबूती

पुलिस और सुरक्षा बलों की इन लगातार कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि बिहार सरकार नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए गंभीर है। सिकंदर कोडा जैसे वांछित नक्सली की गिरफ्तारी से नक्सली नेटवर्क को करारा झटका लगा है और सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता मिली है।

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