नवादा में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान, टीकाकरण और नसबंदी का काम तेज

नवादा, 19 मई 2026: बिहार के नवादा शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नगर परिषद ने बड़ा अभियान शुरू किया है। लगातार सामने आ रही डॉग बाइट की घटनाओं और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब शहरभर में आवारा कुत्तों को पकड़कर उनका टीकाकरण और नसबंदी कराने में जुट गया है। नगर परिषद का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल कुत्तों की संख्या नियंत्रित करना नहीं बल्कि शहरवासियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है।

इसी अभियान के तहत मंगलवार को नवादा सदर अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों से कई आवारा कुत्तों को पकड़कर विशेष केंद्र तक पहुंचाया गया। नगर परिषद की टीम ने प्रशिक्षित कर्मियों और डॉक्टरों की मदद से इन कुत्तों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर बुधौल बस स्टैंड के समीप बनाए गए अस्थायी केंद्र में भेजा, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और ऑपरेशन किया जा रहा है।

शहर में पिछले कुछ महीनों से आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही थीं। खासकर बाजार, अस्पताल, स्कूल और रिहायशी इलाकों में लोगों को कुत्तों के झुंड से परेशानी हो रही थी। कई जगहों पर बच्चों और बुजुर्गों को कुत्तों के काटने की घटनाएं भी सामने आईं, जिसके बाद नगर परिषद पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था।

मुख्य पार्षद प्रतिनिधि संजय साहू ने बताया कि शहर के विभिन्न इलाकों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि आवारा कुत्ते लोगों को काटकर घायल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नगर परिषद ने विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत आवारा कुत्तों को पकड़कर उनका ऑपरेशन और एंटी-रेबीज टीकाकरण कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पकड़े गए कुत्तों को ऑपरेशन के बाद लगभग छह दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा। इस दौरान डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखेंगे। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें उसी क्षेत्र में वापस छोड़ा जाएगा जहां से पकड़ा गया था। प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया पशु संरक्षण नियमों के तहत अपनाई जा रही है।

अभियान में शामिल पशु चिकित्सकों ने बताया कि नसबंदी और टीकाकरण दोनों ही बेहद जरूरी हैं। डॉक्टरों के अनुसार यदि आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि शहर में कुत्तों की बढ़ती संख्या का असर लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कुत्तों को हटाना स्थायी समाधान नहीं होता। वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाने से ही उनकी संख्या नियंत्रित की जा सकती है और रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। यही कारण है कि अब कई शहरों में इसी मॉडल पर काम किया जा रहा है।

नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार अभियान को चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर में चलाया जाएगा। पहले उन इलाकों को चिन्हित किया जा रहा है जहां आवारा कुत्तों की संख्या अधिक है या डॉग बाइट की घटनाएं ज्यादा सामने आई हैं। इसके बाद वहां विशेष टीम भेजकर कार्रवाई की जा रही है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। कई नागरिकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से शाम के वक्त सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया था। स्कूल जाने वाले बच्चों और सुबह टहलने निकलने वाले लोगों को कुत्तों के झुंड से डर लगा रहता था। ऐसे में नगर परिषद की कार्रवाई से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

हालांकि कुछ पशु प्रेमियों ने यह भी कहा कि अभियान पूरी संवेदनशीलता और मानवीय तरीके से चलाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कुत्तों के साथ किसी तरह की क्रूरता नहीं होनी चाहिए और उनकी देखभाल का पूरा ध्यान रखा जाए। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि अभियान पूरी तरह पशु कल्याण नियमों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है।

डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान कुत्तों की स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है। बीमार या घायल कुत्तों का इलाज अलग से किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन दी जा रही है ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम हो सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज एक गंभीर बीमारी है और कुत्तों के काटने के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने पर जान का खतरा भी हो सकता है। इसलिए आवारा कुत्तों के टीकाकरण अभियान को सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नगर परिषद ने लोगों से भी अपील की है कि वे अभियान में सहयोग करें और आवारा कुत्तों को लेकर किसी भी प्रकार की सूचना प्रशासन तक पहुंचाएं। अधिकारियों ने कहा कि शहर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए नागरिकों का सहयोग जरूरी है।

सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में नगर परिषद इस अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाने की तैयारी में है। शहर के अन्य इलाकों में भी विशेष टीमें भेजी जाएंगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त अस्थायी केंद्र बनाए जा सकते हैं।

नवादा में शुरू किया गया यह अभियान फिलहाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन को उम्मीद है कि लगातार अभियान चलाने से शहर में आवारा कुत्तों की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा और डॉग बाइट जैसी घटनाओं में कमी आएगी।

फिलहाल नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम अभियान को सफल बनाने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पहल से शहरवासियों को कितनी राहत मिलती है और आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर कितना प्रभावी नियंत्रण हो पाता है।

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