
बिहटा, 19 मई 2026: बिहार में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की कोशिशों के बीच पटना जिले के बिहटा स्थित प्रिंसटन मगध इनलैंड कंटेनर डिपो में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। पहली बार इंडोनेशिया से फैक्ट्री का कच्चा माल लेकर 45 रैक वाला ट्रेन कंटेनर बिहटा ड्राई पोर्ट पहुंचा। इस घटना को बिहार के उद्योग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों ने कंटेनर पहुंचने के बाद पूजा-अर्चना और नारियल फोड़कर इस नई शुरुआत का स्वागत किया।
बिहटा स्थित ड्राई पोर्ट को बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने और आयात-निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के सहयोग से शुरू की गई इस परियोजना का मकसद बिहार को लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों का मजबूत केंद्र बनाना है। अब पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधे कंटेनर पहुंचने से उद्योग जगत में उत्साह का माहौल है।
जानकारी के अनुसार इंडोनेशिया से भेजा गया यह कच्चा माल प्रिंस पाइप फैक्ट्री के लिए मंगाया गया है। कंटेनर ट्रेन कोलकाता बंदरगाह के रास्ते बिहटा ड्राई पोर्ट पहुंची, जहां कस्टम क्लियरेंस और अन्य प्रक्रियाओं के बाद इसे बिहार की विभिन्न फैक्ट्रियों तक सड़क मार्ग से भेजा जाएगा।
इससे पहले फैक्ट्री के लिए आने वाला कच्चा माल कोलकाता से सीधे ट्रकों के जरिए बिहार पहुंचाया जाता था। इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता था और परिवहन लागत भी काफी ज्यादा आती थी। लेकिन अब ड्राई पोर्ट के जरिए कंटेनर सीधे बिहार पहुंचने से समय और लागत दोनों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रिंसटन ड्राई पोर्ट के सेल्स मैनेजर इंचार्ज विपुल कुमार ने बताया कि यह बिहार के औद्योगिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पहली बार इंडोनेशिया से 45 रैक में लोड होकर कच्चा माल सीधे बिहटा पहुंचा है, जो यह दिखाता है कि बिहार अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क से तेजी से जुड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ड्राई पोर्ट की शुरुआत के बाद बिहार के उद्योगों को बड़ा फायदा मिल रहा है। अब आयात और निर्यात के लिए उद्योगपतियों को दूसरे राज्यों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कस्टम क्लियरेंस और कंटेनर हैंडलिंग की सुविधा बिहार में ही उपलब्ध होने से व्यापारिक गतिविधियां और तेज होंगी।
विपुल कुमार ने यह भी बताया कि पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर आयात-निर्यात कारोबार पर पड़ा था। खासकर पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी। इसका असर बिहार के व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी देखने को मिला।
हालांकि अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है और कारोबार फिर रफ्तार पकड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिहटा ड्राई पोर्ट से अब न केवल विदेशों से माल आ रहा है बल्कि बिहार से निर्यात गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। बिहार का चावल दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जा रहा है, जबकि विदेशों से विभिन्न औद्योगिक उत्पाद और कच्चा माल बिहार पहुंच रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्राई पोर्ट की सुविधा मिलने से बिहार में निवेश की संभावनाएं और मजबूत होंगी। अब उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार उत्पाद बाहर भेजने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिलेगी। इससे परिवहन लागत घटेगी और उत्पादन प्रक्रिया भी तेज होगी।
बिहटा क्षेत्र को पहले से ही बिहार का उभरता औद्योगिक हब माना जाता है। यहां कई बड़े उद्योग स्थापित हो रहे हैं और सरकार भी औद्योगिक गलियारे के विकास पर जोर दे रही है। ऐसे में ड्राई पोर्ट की सक्रियता इस क्षेत्र को और मजबूत आर्थिक पहचान दे सकती है।
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी राज्य के औद्योगिक विकास में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि आयात-निर्यात की प्रक्रिया आसान और सस्ती हो जाए तो उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है। बिहटा ड्राई पोर्ट इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
स्थानीय व्यापारियों और उद्योगपतियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अब बिहार के उद्योगों को कच्चे माल और निर्यात के लिए दूसरे राज्यों के बंदरगाहों और गोदामों पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे बिहार में नए उद्योग लगाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
इधर प्रशासन और पोर्ट प्रबंधन का कहना है कि आने वाले समय में ड्राई पोर्ट की क्षमता और बढ़ाई जाएगी। अधिक कंटेनर हैंडलिंग, आधुनिक वेयरहाउस और तेज कस्टम प्रक्रिया के लिए नई योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य बिहार को पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसी रणनीति के तहत सड़क, रेल और बंदरगाह आधारित कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है। बिहटा ड्राई पोर्ट को भी इसी व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
औद्योगिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह अंतरराष्ट्रीय व्यापार गतिविधियां बढ़ती रहीं तो बिहार में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। परिवहन, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ी संख्या में युवाओं को काम मिल सकता है।
फिलहाल बिहटा ड्राई पोर्ट पर पहली बार इंडोनेशिया से पहुंचे कंटेनर को बिहार के औद्योगिक विकास की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में यह सुविधा राज्य की अर्थव्यवस्था और उद्योग क्षेत्र को कितनी नई गति देती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।


