बारिश बनी बाधा, राज्यपाल और कृषि मंत्री नहीं पहुंच सके सबौर; वीडियो कॉल से किया राष्ट्रीय आम समागम का समापन

भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का समापन समारोह रविवार को उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। हालांकि खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश के कारण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन तथा कृषि मंत्री विजय सिन्हा कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सके। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते उनका हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, जिसके बाद दोनों अतिथियों ने वीडियो कॉलिंग के माध्यम से समारोह को संबोधित किया और कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया।

समापन समारोह में भागलपुर के सांसद अजय मंडल, भागलपुर विधायक रोहित पांडे, सुल्तानगंज विधायक ललित कुमार तथा पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, प्रगतिशील किसान और देश के विभिन्न राज्यों से आए आम उत्पादकों ने भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लिया।

राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का उद्देश्य आम उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीकों, नई प्रजातियों के विकास तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था। दो दिनों तक चले इस आयोजन में आम की खेती से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद के जरिए खेती में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार-विमर्श हुआ।

समारोह के दौरान आम की विभिन्न किस्मों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। देश के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए आमों की विविध प्रजातियों ने आगंतुकों का ध्यान खींचा। प्रदर्शनी में पारंपरिक किस्मों के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान से विकसित उन्नत किस्मों को भी प्रदर्शित किया गया। किसानों ने इन किस्मों की उत्पादन क्षमता, स्वाद, गुणवत्ता और बाजार मूल्य के बारे में जानकारी हासिल की।

वीडियो कॉल के माध्यम से संबोधित करते हुए राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और फल उत्पादन, विशेषकर आम की खेती, किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार की जलवायु और मिट्टी आम उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त है तथा यहां आम उत्पादन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने किसानों से नई तकनीकों को अपनाने और वैज्ञानिक सलाह के साथ खेती करने की अपील की।

राज्यपाल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल शोध तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि शोध के परिणाम सीधे किसानों तक पहुंचने चाहिए। जब प्रयोगशाला की तकनीक खेत तक पहुंचेगी तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होगा। उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजन कृषि विकास को नई दिशा देते हैं।

कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने भी वीडियो कॉलिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि फलोत्पादन और बागवानी क्षेत्र में बिहार तेजी से आगे बढ़ रहा है और आम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। किसानों को आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बिहार को आम उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, बेहतर पैकेजिंग और मजबूत बाजार व्यवस्था आवश्यक है। यदि किसान आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं तो उत्पादन लागत कम होगी और लाभ अधिक मिलेगा। उन्होंने किसानों से विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की अपील की।

कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी राष्ट्रीय आम समागम की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन भागलपुर और आसपास के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा। सांसद अजय मंडल ने कहा कि भागलपुर कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं का केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

विधायक रोहित पांडे ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर लगातार कृषि अनुसंधान और किसान हित में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

समारोह के दौरान वैज्ञानिकों ने आम उत्पादन से जुड़ी कई तकनीकी जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन, कीट प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और उन्नत पौधों के चयन जैसे कारक उत्पादन पर सीधा असर डालते हैं। किसानों को वैज्ञानिक तरीके से बागवानी करने की सलाह दी गई ताकि उत्पादन बढ़ने के साथ गुणवत्ता भी बेहतर हो सके।

विशेषज्ञों ने आम की फसल में रोग नियंत्रण, पोषण प्रबंधन और कटाई के बाद संरक्षण तकनीकों पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसान फसल कटाई के बाद सही भंडारण और परिवहन व्यवस्था अपनाएं तो नुकसान कम होगा और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे और अपनी समस्याएं साझा कीं। किसानों ने बाजार तक पहुंच, लागत नियंत्रण और फसल सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए, जिनका वैज्ञानिकों ने विस्तार से समाधान बताया। इस संवाद ने किसानों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया।

दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम ने यह स्पष्ट किया कि बिहार में आम उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपार संभावनाएं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और सरकारी सहयोग का सही समन्वय हो, तो बिहार देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

बारिश के कारण राज्यपाल और कृषि मंत्री का शारीरिक रूप से कार्यक्रम में शामिल न हो पाना निश्चित रूप से निराशाजनक रहा, लेकिन वीडियो कॉलिंग के माध्यम से उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखी। समापन समारोह ने किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के बीच बेहतर तालमेल का संदेश दिया और यह भरोसा भी जगाया कि कृषि क्षेत्र में नवाचार के माध्यम से किसानों का भविष्य और अधिक समृद्ध बनाया जा सकता है।

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