
भागलपुर: भागलपुर जिले के नाथनगर प्रखंड स्थित केलापुर मलमला टोला इन दिनों पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है। यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसने कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनते ही कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से भर उठा।
व्यास पीठ पर विराजमान देवी राज नंदनी जी ने जब सुदामा और भगवान कृष्ण के मिलन का वर्णन किया, तो कथा स्थल पर मौजूद हजारों श्रद्धालु पूरी तरह कथा में डूब गए। भजनों, झांकियों और धार्मिक प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
सुदामा चरित्र का भावुक प्रसंग बना आकर्षण का केंद्र
कथा के सातवें दिन भगवान कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के मिलन का प्रसंग विस्तार से सुनाया गया। कथा वाचन के दौरान बताया गया कि निर्धनता के बावजूद सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे थे।
देवी राज नंदनी जी ने भावुक शैली में वर्णन किया कि सुदामा अपने घर-घर भिक्षाटन कर जुटाए गए चावल के भूंजे को भेंट स्वरूप लेकर गए थे। द्वारका पहुंचने पर द्वारपालों ने उन्हें रोका, लेकिन जैसे ही भगवान कृष्ण को यह पता चला कि उनका बाल सखा सुदामा मिलने आया है, वे नंगे पांव दौड़ते हुए महल के मुख्य द्वार तक पहुंचे।
कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने सुदामा को गले लगाया और बड़े प्रेम से उनका स्वागत किया। जब उन्होंने सुदामा की लाई हुई छोटी सी पोटली देखी तो उसे बड़े स्नेह से खोला और उसमें रखा चावल का भूंजा खाने लगे। इस दृश्य का वर्णन सुनते ही कथा पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू बहने लगे।
भक्तिमय माहौल में डूबा कथा पंडाल
सुदामा चरित्र के दौरान पूरा कथा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा सुनते रहे। कई लोग हाथ जोड़कर भगवान कृष्ण का स्मरण करते दिखाई दिए।
कथा स्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि मित्रता, प्रेम और भक्ति का ऐसा भावुक प्रसंग सुनकर मन पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी श्रद्धालु कथा में तल्लीन दिखाई दिए।
भजनों और झांकियों ने बांधा समां
कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों और धार्मिक झांकियों ने आयोजन को और भव्य बना दिया। अयोध्या से आए कलाकारों के समूह ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सौरव, सुनील, अशोक और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। भगवान कृष्ण, सुदामा और विभिन्न धार्मिक प्रसंगों पर आधारित झांकियों को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
भक्ति संगीत और धार्मिक कला के इस संगम ने कथा स्थल के माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। श्रद्धालु देर तक भजनों पर झूमते और भगवान का नाम स्मरण करते रहे।
आयोजकों ने जताया ग्रामवासियों के प्रति आभार
कथा आयोजन से जुड़े आचार्य ब्रह्मदेव पासवान और राजीव राय ने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया। उनके साथ निवेदक पंडित रंजन झा ने कहा कि गांव के लोगों के सहयोग और श्रद्धा के कारण ही इतना बड़ा धार्मिक आयोजन संभव हो पाया है।
आयोजन समिति के अध्यक्ष हरदेव पासवान, सचिव लड्डू राय, कोषाध्यक्ष भुट्टो मंडल और प्रधान सेवक बच्चू साह ने भी गांव के सभी लोगों को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था के मार्ग पर चलने वालों का कभी अनिष्ट नहीं होता। साथ ही लोगों से सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की अपील की गई।
युवाओं को धर्म से जोड़ने की अपील
कार्यक्रम के दौरान बच्चू साह की पुत्री राजलक्ष्मी सोनी ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और विज्ञान के साथ-साथ धार्मिक ज्ञान भी जीवन के लिए आवश्यक है। राजलक्ष्मी ने कहा कि पुराणों और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन व्यक्ति को सही मार्ग दिखाता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा देता है।
उनका कहना था कि गांव के युवाओं ने इस धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो समाज के लिए अच्छा संकेत है।
प्राचीन परंपरा से जुड़ा है आयोजन
आचार्य ब्रह्मदेव पासवान, राजीव राय यादव और पंडित रंजन झा ने बताया कि इस स्थल पर प्राचीन समय से मां बुढ़िया काली की पूजा होती आ रही है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से यहां भक्तों की मनोकामना पूरी होने पर श्रीमद्भागवत कथा और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते रहे हैं। लोगों की आस्था है कि मां बुढ़िया काली भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं।
आयोजकों के अनुसार हर दिन विधिवत मंत्रोच्चार और देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद कथा का आयोजन किया जाता है।
अंतिम दिन को लेकर उत्साह
आयोजन समिति ने बताया कि रविवार कथा का अंतिम दिन है। ऐसे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
गांव और आसपास के क्षेत्रों से लगातार लोग कथा सुनने पहुंच रहे हैं। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं के बैठने और प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई है।
रोजाना हो रहा भंडारा और प्रसाद वितरण
कथा के दौरान प्रतिदिन भोग-भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है। आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच खीर प्रसाद का वितरण किया गया।
भक्तों ने बड़ी श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने बताया कि कथा समाप्ति तक यह व्यवस्था लगातार जारी रहेगी।
पूरे गांव का मिला सहयोग
आयोजन को सफल बनाने में गांव के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भुट्टो राय, हरदेव पासवान, लड्डू राय, हरि राय, विष्णु पासवान, संजय पासवान, सुभाष पासवान और हीरा लाल पासवान सहित कई ग्रामवासियों ने तन, मन और धन से सहयोग दिया।
ग्रामवासियों का कहना है कि धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश देते हैं।
श्रद्धा और आस्था से भरा आयोजन
कथा के सातवें दिन की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं के मन में गहरी श्रद्धा और आस्था का संचार किया।
भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने और सकारात्मक सोच फैलाने का भी माध्यम बनते हैं।
पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, संगीत, कथा और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने केलापुर मलमला टोला को पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में बदल दिया।


