नालंदा विश्वविद्यालय राजगीर में पासपोर्ट सेवा शिविर सफल: 55 लाभार्थियों को मिला लाभ

राजगीर। बिहार की ज्ञान भूमि और वैश्विक विरासत के केंद्र राजगीर में शनिवार को कूटनीति और जन-सेवा का एक अनूठा संगम देखने को मिला। राजगीर न्यूज़ के गलियारों में आज चर्चा उस प्रशासनिक सुगमता की है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले नालंदा विश्वविद्यालय के परिसर में ही ‘वैश्विक उड़ान’ का रास्ता साफ कर दिया। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO), पटना ने विदेश मंत्रालय की महत्वाकांक्षी और जन-केंद्रित पहल “पासपोर्ट सेवा – आपके द्वार पर पासपोर्ट” के तहत 11 अप्रैल 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय में एक विशेष मोबाइल वैन शिविर का आयोजन किया। यह शिविर केवल एक प्रशासनिक गतिविधि नहीं थी, बल्कि यह आधुनिक शासन व्यवस्था के उस चेहरे को दर्शाता है जहाँ सरकारी सेवाएं जनता की दहलीज तक पहुँच रही हैं। इस एक दिवसीय शिविर के माध्यम से विश्वविद्यालय के छात्रों और शोधार्थियों को अब पासपोर्ट बनवाने के लिए पटना के चक्कर काटने की मजबूरी से मुक्ति मिल गई है।

ज्ञान के प्राचीन केंद्र में आधुनिक सेवा का आगाज़

​राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय का महत्व केवल ईंट-पत्थरों की इमारत तक सीमित नहीं है। यह प्राचीन भारत की उस मेधा का पुनरुद्धार है, जिसने कभी पूरी दुनिया को शिक्षा और दर्शन की दिशा दिखाई थी। वर्तमान में यह विश्वविद्यालय भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सीधे अधीन कार्य करता है और यहाँ विश्वभर के विभिन्न देशों से छात्र और विद्वान अकादमिक शोध के लिए आते हैं। प्राचीन नालंदा महाविहार की परंपरा को जीवित रखते हुए आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय वैश्विक शैक्षणिक सहयोग का एक बड़ा मंच बन चुका है।

​ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान में पासपोर्ट शिविर का आयोजन करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। चूँकि यहाँ के छात्रों और शिक्षकों को अक्सर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, शोध कार्यों और अकादमिक दौरों के लिए विदेश यात्रा करनी पड़ती है, इसलिए उनके व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए परिसर के भीतर ही पासपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी मांग थी। इस पहल ने न केवल आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को भी मजबूती दी है।

उद्घाटन और उच्चस्तरीय भागीदारी: सिबी जॉर्ज और सचिन चतुर्वेदी की मौजूदगी

​इस विशेष पासपोर्ट शिविर का उद्घाटन भारतीय विदेश सेवा के अनुभवी अधिकारी और 1993 बैच के राजदूत सिबी जॉर्ज ने किया। सिबी जॉर्ज वर्तमान में विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) के महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं। उनके साथ नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी भी मौजूद रहे। इन दोनों दिग्गजों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन युवाओं के वैश्विक भविष्य को लेकर कितने गंभीर हैं।

​उद्घाटन सत्र के दौरान कूटनीतिक और अकादमिक चर्चाओं के बीच पासपोर्ट सेवा मोबाइल वैन को क्रियाशील किया गया। यह वैन अपने आप में एक चलता-फिरता हाई-टेक कार्यालय है, जो सभी आवश्यक उपकरणों से लैस है। सिबी जॉर्ज ने इस दौरान कहा कि मंत्रालय का लक्ष्य पासपोर्ट सेवाओं को इतना सरल और सुलभ बनाना है कि किसी भी नागरिक को अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के सपनों को पूरा करने के लिए दफ्तरों के बोझिल चक्कर न काटने पड़ें। वहीं कुलपति सचिन चतुर्वेदी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

55 लाभार्थियों की सफल प्रक्रिया: तकनीक और गति का मेल

​शनिवार को आयोजित इस एक दिवसीय शिविर में कुल 55 लाभार्थियों ने अपनी पासपोर्ट संबंधी प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह संख्या भले ही छोटी लगे, लेकिन एक शैक्षणिक संस्थान के भीतर, जहाँ हर मिनट शोध और अध्ययन के लिए कीमती होता है, वहां 55 लोगों का काम बिना किसी भाग-दौड़ के हो जाना एक बड़ी उपलब्धि है। मोबाइल वैन की सुविधा ने आवेदकों को वह माहौल दिया जो सामान्यतः बड़े शहरों के पीएसके (Passport Seva Kendra) में मिलता है।

​शिविर के दौरान स्थल पर ही संपूर्ण आवेदन प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण तीन चरण शामिल थे:

  1. दस्तावेज़ सत्यापन: आवेदकों के मूल दस्तावेजों की मौके पर ही जांच की गई।
  2. बायोमेट्रिक डेटा संग्रहण: फिंगरप्रिंट्स और फोटो को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया गया।
  3. आवेदन जमा करना: सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आवेदन को तत्काल सिस्टम में अपलोड कर दिया गया।

​इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि छात्रों को अपनी नियमित कक्षाओं और शोध कार्यों को छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ी। वे अपने ब्रेक के समय में आकर चंद मिनटों में अपनी प्रक्रिया पूरी कर वापस अपने अध्ययन में जुट गए।

वैश्विक करियर और उच्च शिक्षा की ओर बढ़ते कदम

​शिविर में भाग लेने वाले अधिकांश छात्र वे थे जो उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की योजना बना रहे हैं या जिन्हें अंतरराष्ट्रीय इंटर्नशिप के अवसर मिल रहे हैं। आधुनिक दौर में एक पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज नहीं, बल्कि एक ‘वैश्विक पहचान पत्र’ है। नालंदा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान में, जहाँ छात्र पहले से ही वैश्विक मानसिकता (Global Mindset) के साथ पढ़ रहे हैं, वहां ऐसी सुविधाएं उनके करियर के लिए उत्प्रेरक का काम करती हैं।

​विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शिविरों से छात्रों के भीतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक करियर की संभावनाओं को लेकर उत्साह बढ़ता है। जब सरकार स्वयं आपके पास आकर यह कहे कि “हम आपके वैश्विक सपनों के लिए तैयार हैं,” तो यह युवाओं के आत्मविश्वास को एक अलग स्तर पर ले जाता है। इस पहल ने पासपोर्ट सेवाओं की पहुँच और सुविधा को बढ़ाकर इसे अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना दिया है।

आरपीओ पटना का बिहारव्यापी अभियान: 17 शिविर और 2200 आवेदन

​क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO), पटना की यह सक्रियता केवल राजगीर तक सीमित नहीं है। पिछले दो वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि बिहार के सुदूरवर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों में पासपोर्ट सेवाओं को पहुँचाने के लिए आरपीओ पटना ने युद्धस्तर पर काम किया है। अब तक बिहार के विभिन्न जिलों में कुल 17 पासपोर्ट सेवा मोबाइल वैन शिविर आयोजित किए जा चुके हैं।

​इन शिविरों के माध्यम से अब तक 2,200 से अधिक आवेदनों का प्रसंस्करण (Processing) किया गया है। यह आंकड़ा उन लोगों के लिए एक राहत की खबर है जो पहले पासपोर्ट के नाम से ही घबराते थे। विशेष रूप से वे क्षेत्र जहाँ से लोग बड़ी संख्या में रोजगार या शिक्षा के लिए बाहर जाते हैं, वहां इन मोबाइल वैनों ने किसी मसीहा की तरह काम किया है। मंत्रालय की यह पारदर्शी और कुशल कार्यप्रणाली बिहार के बदलते प्रशासनिक परिवेश की एक सुखद तस्वीर पेश करती है।

सांस्थानिक सहयोग और भविष्य की राह

​नालंदा विश्वविद्यालय के प्रशासन ने इस शिविर के सफल संचालन के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। विश्वविद्यालय और मंत्रालय के बीच का यह संयुक्त प्रयास यह संदेश देता है कि जब दो बड़े संस्थान एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो उसका लाभ सीधे तौर पर युवाओं और नागरिकों को मिलता है। राजगीर की इस ऐतिहासिक धरती पर शुरू हुई यह पहल अब बिहार के अन्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के लिए भी एक रोल मॉडल बन सकती है।

​आधुनिक शासन व्यवस्था अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सक्रिय (Proactive) और समावेशी (Inclusive) हो चुकी है। राजगीर का यह शिविर इस बात का प्रमाण है कि सरकार अपनी सेवाओं को जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल रही है। भविष्य में उम्मीद की जा रही है कि ऐसे मोबाइल शिविरों की संख्या और बढ़ेगी, जिससे बिहार का हर वह युवा जो दुनिया को देखने और उसमें अपना स्थान बनाने का हौसला रखता है, उसे तकनीकी बाधाओं का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष: सुशासन और सुविधा की नई परिभाषा

​क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय पटना और नालंदा विश्वविद्यालय के इस साझा उपक्रम ने यह साबित कर दिया है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो, तो जटिल से जटिल प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया जा सकता है। राजदूत सिबी जॉर्ज और कुलपति सचिन चतुर्वेदी की अगुवाई में संपन्न हुआ यह शिविर राजगीर के इतिहास में विकास और सेवा के एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। 55 लाभार्थियों के चेहरों पर जो संतोष दिखा, वह इस पूरी मेहनत की सार्थकता को सिद्ध करता है।

The Voice of Bihar की टीम इस प्रगतिशील पहल का स्वागत करती है। यह केवल एक पासपोर्ट शिविर नहीं था, बल्कि बिहार के युवाओं के लिए वैश्विक अवसरों का खुला द्वार था। सुशासन के इस दौर में “पासपोर्ट आपके द्वार” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक धरातलीय हकीकत बन चुका है। आने वाले समय में राजगीर के इन युवाओं की सफलता की कहानियाँ जब सात समंदर पार सुनाई देंगी, तब इस एक दिवसीय शिविर की अहमियत और अधिक समझ आएगी।

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