नीट परीक्षा में सेंधमारी करने वाले गिरोह का नालंदा में भंडाफोड़: स्कॉर्पियो के डैशबोर्ड से निकला नोटों का जखीरा; एमबीबीएस छात्र ही निकला सॉल्वर गैंग का चेहरा

नालंदा/पावापुरी। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) को लेकर एक बार फिर बिहार में जालसाजों की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। बिहार पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो परीक्षा केंद्रों पर मेधावी छात्रों की जगह ‘सॉल्वर’ बिठाकर धांधली करने की फिराक में था। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि भविष्य में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाला एक एमबीबीएस (MBBS) द्वितीय वर्ष का छात्र ही इस काली कमाई और फर्जीवाड़े के धंधे का मुख्य सिपाही निकला। नालंदा जिले की पावापुरी पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान फिल्मी अंदाज में इस गिरोह के सदस्यों को दबोचा और उनके पास से लाखों की नकदी सहित आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई ने उन हजारों परीक्षार्थियों की उम्मीदों को सुरक्षा प्रदान की है जो अपनी मेहनत के दम पर इस परीक्षा में शामिल होने वाले थे। वर्तमान में पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके संपर्कों की गहनता से जांच कर रही है।

पावापुरी में चेकिंग के दौरान पकड़ी गई स्कॉर्पियो और ब्रेजा

​घटना की शुरुआत 02 मई 2026 को हुई, जब नालंदा जिले के पावापुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस द्वारा नियमित वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। पुलिस की टीम सड़क से गुजरने वाले संदेहास्पद वाहनों की तलाशी ले रही थी, तभी एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो और एक ब्रेजा कार वहां पहुँची। पुलिस ने जब इन गाड़ियों को रुकने का इशारा किया, तो चालकों के चेहरे पर घबराहट साफ देखी जा सकती थी। अधिकारियों ने नियमों के मुताबिक दोनों वाहनों की विधिवत् तलाशी लेने का निर्णय लिया।

​तलाशी के दौरान स्कॉर्पियो के चालक ने अपनी पहचान अवधेश कुमार के रूप में बताई, जो मुजफ्फरपुर जिले का रहने वाला है। पूछताछ में अवधेश ने जो खुलासा किया, उसने पुलिस अधिकारियों के भी कान खड़े कर दिए। उसने बताया कि वह विम्स (VIMS) कॉलेज का एमबीबीएस द्वितीय सत्र का छात्र है। वहीं, ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे व्यक्ति ने अपना नाम अमन कुमार सिंह बताया, जो मोतिहारी जिले का निवासी है। एक मेडिकल छात्र की मौजूदगी ने पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया कि इन गाड़ियों में कुछ तो ऐसा है जो सामान्य नहीं है।

डैशबोर्ड के नीचे नोटों की गड्डी और डिजिटल सबूतों का भंडार

​जब पुलिस ने स्कॉर्पियो की सघन तलाशी ली, तो गाड़ी के डैशबोर्ड के नीचे एक विशेष जगह छिपाकर रखी गई नोटों की गड्डियां बरामद हुईं। गिनती करने पर यह कुल 2,95,000/- (दो लाख पंचानबे हजार) रुपये निकले। इतनी बड़ी रकम का स्रोत बताने में गाड़ी में सवार लोग पूरी तरह विफल रहे। इसके बाद पुलिस ने उनके मोबाइल फोन खंगालने शुरू किए, जहाँ से फर्जीवाड़े की पूरी परतें एक-एक कर खुलने लगीं।

​एमबीबीएस छात्र अवधेश कुमार के मोबाइल से पुलिस ने नीट (NEET) परीक्षा के एडमिट कार्ड, ए०ई०ओ० (AEO) के एडमिट कार्ड और बी०एस०एन०एल० (BSNL) परीक्षा के एडमिट कार्ड बरामद किए। मोबाइल के व्हाट्सएप और अन्य चैटिंग एप्स में परीक्षा से संबंधित संदिग्ध चैट और मोटी रकम के लेन-देन के पुख्ता सबूत पाए गए। इतना ही नहीं, मोबाइल में पैसे का डिजिटल लेन-देन करने वाला ‘स्कैनर’ भी पाया गया, जिसका उपयोग अभ्यर्थियों से एडवांस लेने के लिए किया जा रहा था। इन सबूतों ने साफ कर दिया कि यह गिरोह केवल नीट ही नहीं, बल्कि अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सेंधमारी करने का पुराना खिलाड़ी है।

सॉल्वर बिठाने की साजिश: उज्जवल उर्फ राजा बाबू का कनेक्शन

​पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक पूछताछ में अवधेश कुमार ने गिरोह के तौर-तरीकों का खुलासा किया है। उसने बताया कि उसका एक दोस्त उज्जवल उर्फ राजा बाबू इस पूरे रैकेट का सूत्रधार है, जो नीट परीक्षा में ‘स्कॉलर’ या ‘सॉल्वर’ बिठाने का काम करता है। यह गिरोह ऐसे मेधावी छात्रों (विशेषकर एमबीबीएस के छात्रों) को लालच देकर तैयार करता था, जो मूल परीक्षार्थी की जगह परीक्षा हॉल में बैठकर पेपर हल कर सकें। इसके बदले में असली परीक्षार्थी से लाखों रुपये वसूले जाते थे और सॉल्वर को उसका हिस्सा दिया जाता था।

​पुलिस ने इस मामले में कुल 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 3 मोबाइल फोन, दो लग्जरी गाड़ियां और फर्जी एडमिट कार्ड के साथ-साथ नकद राशि जब्त की गई है। पुलिस अब उज्जवल उर्फ राजा बाबू की तलाश में छापेमारी कर रही है, जिसके पकड़े जाने के बाद इस रैकेट के तार अन्य राज्यों और बड़े कोचिंग संस्थानों से जुड़ने की संभावना है। यह गिरोह संभवतः उन छात्रों को निशाना बनाता था जो किसी भी कीमत पर मेडिकल सीट हासिल करना चाहते थे।

बिहार पुलिस का ‘जीरो टॉलरेंस’: परीक्षा की शुचिता सर्वोपरि

​नीट जैसी संवेदनशील परीक्षा में फर्जीवाड़े के प्रयास ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे, लेकिन बिहार पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। नालंदा पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के पकड़े जाने से परीक्षा के दौरान होने वाले संभावित फर्जीवाड़े को रोकने में बड़ी सफलता मिली है। बरामद एडमिट कार्ड्स की जांच की जा रही है ताकि उन अभ्यर्थियों की पहचान की जा सके जिन्होंने इस गिरोह को पैसे दिए थे।

​बिहार पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। एमबीबीएस छात्र की संलिप्तता ने चिकित्सा शिक्षा जगत में भी चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि जो छात्र खुद डॉक्टर बनने की राह पर हैं, वे ही शिक्षा प्रणाली को खोखला करने में जुटे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ के आधार पर जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल, जब्त किए गए तीनों मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है ताकि डिलीट किए गए डेटा और चैट्स को रिकवर कर गिरोह के पूरे नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा तैयार किया जा सके।

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