
मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार की शिक्षा का प्रमुख केंद्र कहे जाने वाले बाबा साहब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) परिसर से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे और छात्रों के बीच हड़कंप मचा दिया है। जहाँ कलम और किताबों की चर्चा होनी चाहिए थी, वहां पुलिस ने भारी मात्रा में अवैध कारतूसों का जखीरा बरामद किया है। विश्वविद्यालय के पीजी हॉस्टल के एक कमरे को अपराधियों ने अपनी सुरक्षित पनाहगाह बना रखा था। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए हॉस्टल के कमरे से 200 जिंदा कारतूस, एक मैगजीन और पिस्टल का होलस्टर बरामद किया है। इस मामले में पुलिस ने दो शातिर अपराधियों को दबोचा है, जिनमें से एक सीवान जिले का कुख्यात आर्म्स सप्लायर है। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार अपराधी अब पुलिस की नजरों से बचने के लिए शैक्षणिक संस्थानों के छात्रावासों का उपयोग अपने ‘बेस कैंप’ के रूप में कर रहे हैं। मुजफ्फरपुर एसएसपी कांतेश मिश्र ने स्वयं इस बड़ी कार्रवाई की पुष्टि की है और विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
हॉस्टल बना ‘अवैध शस्त्रागार’: 200 राउंड गोलियों की गूँज
मुजफ्फरपुर पुलिस को पिछले कुछ दिनों से इनपुट मिल रहे थे कि विश्वविद्यालय परिसर के भीतर कुछ संदिग्ध लोग अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं। काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले इस विशाल परिसर के पीजी हॉस्टल में बाहरी लोगों की आवाजाही की शिकायतें भी मिल रही थीं। इसी कड़ी में पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि हॉस्टल के एक विशिष्ट कमरे में हथियारों की एक बड़ी खेप पहुँचाई गई है, जिसे मुजफ्फरपुर के ही किसी बड़े अपराधी गिरोह को सप्लाई किया जाना है।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी कांतेश मिश्र ने एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस टीम ने जब योजनाबद्ध तरीके से पीजी हॉस्टल के संबंधित कमरे में छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। कमरे के भीतर से 200 राउंड जिंदा कारतूस बरामद किए गए। गोलियों की इतनी बड़ी संख्या यह बताने के लिए काफी थी कि अपराधी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे या फिर वे शहर के अपराधियों को बड़े पैमाने पर गोला-बारूद सप्लाई करने की तैयारी में थे। कारतूसों के साथ-साथ पुलिस ने एक पिस्टल की मैगजीन, पिस्टल रखने वाला होलस्टर और एक बिना नंबर की संदिग्ध बाइक भी जब्त की है।
सीवान और सीतामढ़ी के अपराधियों का ‘नेक्सस’
हॉस्टल के उस कमरे से पुलिस ने दो युवकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान सीवान जिले के रहने वाले अभिषेक तिवारी (20 वर्ष) और सीतामढ़ी जिले के सुप्पी थाना क्षेत्र निवासी अनमोल कुमार (19 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। गिरफ्तार अभिषेक तिवारी कोई मामूली अपराधी नहीं है; वह आर्म्स सप्लाई के धंधे का पुराना खिलाड़ी है।
अभिषेक तिवारी का आपराधिक इतिहास खंगालने पर पता चला कि वह वर्ष 2023 में भी मुजफ्फरपुर के मनियारी थाना क्षेत्र से आर्म्स एक्ट के मामले में जेल जा चुका है। जेल से बाहर आने के बाद उसने अपना नेटवर्क और बढ़ा लिया और अब वह सीवान से हथियार और कारतूस लाकर मुजफ्फरपुर के विभिन्न गिरोहों को उपलब्ध कराता था। वहीं, 19 वर्षीय अनमोल कुमार उसके सहायक के तौर पर काम कर रहा था। ये दोनों अपराधी मुजफ्फरपुर में किसी ‘बड़ी पार्टी’ को यह खेप सौंपने वाले थे और तब तक सुरक्षित रहने के लिए उन्होंने बिहार यूनिवर्सिटी के हॉस्टल का चुनाव किया था, क्योंकि वहां पुलिस की सामान्य गश्त कम होती है और बाहरी लोगों का घुलना-मिलना आसान होता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के सुरक्षा दावों की खुली पोल
शिक्षा के इस सर्वोच्च संस्थान में बाहरी अपराधियों का इस तरह डेरा जमाना विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर ये अपराधी किस हैसियत से हॉस्टल के कमरे में रह रहे थे? क्या हॉस्टल के वार्डन या अन्य कर्मचारियों को इनकी भनक नहीं थी? या फिर इन्हें किसी प्रभावशाली छात्र या नेता का संरक्षण प्राप्त था? एसएसपी कांतेश मिश्र ने इन सभी बिंदुओं पर जांच के आदेश दिए हैं।
एसएसपी ने स्पष्ट कहा है कि इस मामले में बिहार यूनिवर्सिटी प्रशासन से पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि वह कमरा किसके नाम पर आवंटित था और क्या आवंटित छात्र की जानकारी में ये अपराधी वहां रह रहे थे। अक्सर यह देखा जाता है कि हॉस्टलों में अवैध रूप से बाहरी लोग कब्जा जमा लेते हैं, और प्रशासन इस पर मूकदर्शक बना रहता है। इस बार तो अपराधियों ने हद ही पार कर दी और हॉस्टल को बारूद के गोदाम में तब्दील कर दिया। पुलिस अब उन लोगों की भी पहचान कर रही है जिन्होंने इन अपराधियों को हॉस्टल में प्रवेश दिलाने और वहां रुकवाने में मदद की थी।
सप्लायर अभिषेक तिवारी: सीवान से मुजफ्फरपुर तक फैला जाल
अभिषेक तिवारी का मुख्य काम आर्म्स सप्लाई करना था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह सीवान के स्थानीय माफियाओं से संपर्क में रहता था और वहां से अवैध कारतूसों की खेप मुजफ्फरपुर पहुँचाता था। मुजफ्फरपुर के अपराधी गिरोहों के लिए वह एक ‘भरोसेमंद सप्लायर’ बन चुका था। 200 कारतूसों की बरामदगी यह संकेत देती है कि शहर में किसी बड़ी गैंगवार या लूटपाट की बड़ी योजना बनाई जा रही थी।
पुलिस अब अभिषेक के मोबाइल फोन और उसके संपर्क सूत्रों की जांच कर रही है। इसमें मुजफ्फरपुर के कई स्थानीय अपराधियों के नाम सामने आने की संभावना है। एसएसपी ने बताया कि अभिषेक पहले भी जेल जा चुका है, इसलिए उसका गिरोह में सक्रिय होना और फिर से उसी धंधे में उतरना पुलिस के लिए चिंता का विषय है। पुलिस अब इसके ‘बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज’ की जांच कर रही है ताकि उस मुख्य सरगना तक पहुँचा जा सके जो सीवान में इस अवैध कारोबार का केंद्र है।
एसएसपी कांतेश मिश्र की कड़ी चेतावनी और भविष्य की योजना
मुजफ्फरपुर एसएसपी कांतेश मिश्र ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि पुलिस अब विश्वविद्यालय परिसर के भीतर अन्य हॉस्टलों की भी सघन जांच करेगी। उन्होंने कहा कि गुप्त सूचना के आधार पर यह एक बड़ी कामयाबी है, अन्यथा ये 200 कारतूस शहर की सड़कों पर खून बहाने के काम आते। एसएसपी ने कहा कि विश्वविद्यालय एक पवित्र स्थान है और यहाँ अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
पुलिस अब इस मामले में यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर और हॉस्टल सुप्रीटेंडेंट से भी जवाब तलब करने की तैयारी में है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या पूर्व में भी इस तरह की गतिविधियां वहां संचालित होती रही हैं। पकड़े गए दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एसएसपी ने यह भी संकेत दिया कि मुजफ्फरपुर पुलिस अब अपराधियों के ‘सेफ हाउस’ को निशाना बना रही है, चाहे वह हॉस्टल हो, होटल हो या फिर कोई निजी आवास।
इस छापेमारी ने पूरे मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे को अलर्ट मोड पर ला दिया है। कारतूसों की इतनी बड़ी बरामदगी के बाद पुलिस अब शहर के प्रवेश द्वारों पर चेकिंग और गश्त बढ़ा रही है। अभिषेक तिवारी और अनमोल कुमार से हो रही पूछताछ में कई ऐसे ठिकानों का पता चला है जहाँ आर्म्स सप्लाई के सिंडिकेट से जुड़े लोग शरण लेते हैं। पुलिस की विशेष टीम इन ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी कर रही है। बिहार यूनिवर्सिटी परिसर में पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब सुरक्षा की उन दीवारों के भीतर घुसने की कोशिश कर रहे हैं जहाँ समाज का भविष्य तैयार होता है।
विश्वविद्यालय के छात्रों में भी इस घटना के बाद भय का माहौल है। आम छात्रों का कहना है कि वे यहाँ पढ़ने आते हैं, लेकिन अपराधियों की मौजूदगी उनके जीवन को खतरे में डालती है। पुलिस प्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है और परिसर को पूरी तरह से अपराध मुक्त किया जाएगा। बरामद बाइक की भी जांच हो रही है कि क्या वह चोरी की है या किसी लूट की वारदात में इस्तेमाल की गई थी। मुजफ्फरपुर पुलिस के लिए यह केस न केवल एक आर्म्स रिकवरी का मामला है, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क के पर्दाफाश का जरिया भी बन गया है।


