गुटखा खाना पड़ा महंगा: पीरपैंती पुलिस ने युवक से वसूला जुर्माना

पीरपैंती (भागलपुर)। सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता और तंबाकू नियंत्रण को लेकर सरकार और प्रशासन की कड़ाई अब धरातल पर दिखने लगी है। अक्सर लोग सरकारी कार्यालयों और थानों को असुरक्षित मानकर वहां नियमों की अनदेखी कर देते हैं, लेकिन भागलपुर जिले के पीरपैंती थाना परिसर में शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को हुई एक कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून की नजर से कोई भी बच नहीं सकता। पीरपैंती बाजार निवासी एक युवक को उस समय भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ा जब उसने थाने जैसी संवेदनशील जगह पर गुटखा खाने का दुस्साहस किया। थानाध्यक्ष की पैनी नजर और कानून के प्रति उनकी संजीदगी ने न केवल उस युवक को सबक सिखाया, बल्कि समाज के अन्य लोगों के लिए भी एक नजीर पेश की है। यह घटना दर्शाती है कि स्वच्छता अभियान केवल कागजों पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता से सफल हो रहा है।

थाना परिसर में लापरवाही और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार की दोपहर पीरपैंती बाजार निवासी कारू महलदार किसी निजी कार्य से पीरपैंती थाना पहुँचे थे। थाना परिसर एक सार्वजनिक और प्रतिबंधित क्षेत्र है जहाँ नशा और गंदगी फैलाना कानूनी रूप से वर्जित है। बावजूद इसके, कारू महलदार ने बेखौफ होकर गुटखा निकालकर उसे खाने का प्रयास किया। वे शायद इस बात से अनजान थे कि उनकी हर गतिविधि पर पुलिस अधिकारियों की नजर है।

​तभी थाने में मौजूद थानाध्यक्ष पंकज रावत की नजर अचानक युवक पर पड़ गई। पंकज रावत ने देखा कि युवक कानून के मंदिर में ही सार्वजनिक स्वच्छता के नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। उन्होंने तत्काल पुलिस कर्मियों को निर्देश देकर युवक को पकड़ने का आदेश दिया। पुलिस ने जब कारू महलदार को पकड़ा, तो वह सकपका गया। थानाध्यक्ष ने उसे स्पष्ट रूप से बताया कि थाना परिसर में इस तरह का कृत्य न केवल अमर्यादित है, बल्कि तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध भी है।

तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत लगा आर्थिक दंड

​पुलिस ने कारू महलदार के विरुद्ध ‘तंबाकू उत्पाद अधिनियम’ (COTPA) की सुसंगत धाराओं के उल्लंघन के तहत कार्रवाई की। थानाध्यक्ष पंकज रावत ने कानून का पालन सुनिश्चित करते हुए युवक पर तत्काल दो सौ रुपये (₹200) का जुर्माना लगाया। यह जुर्माना केवल एक राशि नहीं, बल्कि एक संदेश था कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

​युवक ने अपनी गलती स्वीकार की और मौके पर ही जुर्माने की राशि सरकारी कोष में जमा की। पुलिस ने उसे कड़ी चेतावनी दी कि भविष्य में यदि वह किसी भी सार्वजनिक स्थल, विशेषकर सरकारी कार्यालयों में इस तरह की हरकत करता पाया गया, तो उस पर और भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जुर्माने की रसीद कटने के बाद युवक को वहां से छोड़ा गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान थाने में मौजूद अन्य लोगों ने भी यह समझा कि नियमों का उल्लंघन कहीं भी और कभी भी भारी पड़ सकता है।

स्वच्छता और कानून का समन्वय: थानाध्यक्ष का संदेश

​इस कार्रवाई के बाद थानाध्यक्ष पंकज रावत ने मीडिया और वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालय और थाना परिसर आम जनता की सेवा के लिए होते हैं। इन स्थानों की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। तंबाकू, गुटखा या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए तो हानिकारक है ही, साथ ही इसके सेवन के बाद इधर-उधर थूकने से बीमारियाँ फैलती हैं और सार्वजनिक संपत्ति गंदी होती है।

​पंकज रावत ने स्पष्ट किया कि पीरपैंती पुलिस अब केवल अपराध नियंत्रण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक अनुशासन और स्वच्छता के प्रति भी सजग है। उन्होंने कहा कि पुलिस स्टेशन एक ऐसी जगह है जहाँ लोग न्याय की उम्मीद में आते हैं, ऐसे में वहां का वातावरण स्वच्छ और अनुशासित होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र की जनता से अपील की कि वे तंबाकू उत्पादों के सेवन से बचें और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी न फैलाएं।

कोटपा (COTPA) कानून की गंभीरता और जागरूकता की कमी

​यह घटना ‘सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003’ (COTPA) की प्रासंगिकता को एक बार फिर सामने लाती है। इस कानून की धारा 4 के तहत किसी भी सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान या तंबाकू का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि, ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में अक्सर लोग इस कानून के प्रति अनभिज्ञ रहते हैं। पीरपैंती में हुई यह कार्रवाई इसी अनभिज्ञता को दूर करने की एक कोशिश है।

​आंकड़े बताते हैं कि बिहार में गुटखा और तंबाकू के सेवन के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का ग्राफ बढ़ा है। सरकार ने गुटखा पर प्रतिबंध तो लगा रखा है, लेकिन चोरी-छिपे इसकी बिक्री और सेवन अब भी जारी है। ऐसे में जब पुलिस प्रशासन खुद सक्रिय होकर जुर्माना वसूलता है, तो इसका असर सीधे तौर पर आम जनता के व्यवहार पर पड़ता है। कारू महलदार पर लगाया गया जुर्माना भागलपुर जिले में तंबाकू नियंत्रण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन: एक सामाजिक जरूरत

​भागलपुर जिले के विभिन्न प्रखंडों में अक्सर देखा जाता है कि लोग अस्पतालों, स्कूलों और अदालतों की दीवारों को गुटखा खाकर लाल कर देते हैं। पीरपैंती थाने में हुई यह छोटी सी कार्रवाई दरअसल उस बड़ी बीमारी का इलाज है जो हमारे सामाजिक आचरण को खोखला कर रही है। कानून की हनक जब तक छोटी गलतियों पर नहीं पड़ेगी, तब तक बड़े बदलाव की उम्मीद करना बेमानी है।

​स्थानीय नागरिकों ने पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस तरह के कड़े फैसलों से युवाओं में एक डर पैदा होगा और वे सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादा बनाए रखेंगे। पीरपैंती बाजार के लोगों का कहना है कि पंकज रावत ने जो मिसाल पेश की है, वह अन्य सरकारी विभागों के लिए भी प्रेरणादायक होनी चाहिए। यदि हर विभाग का मुखिया अपने परिसर में इसी तरह की कड़ाई बरते, तो पूरा भागलपुर स्वच्छ और सुंदर बन सकता है।

निष्कर्ष: सुशासन का जमीनी असर

​पीरपैंती थाने में कारू महलदार पर लगाया गया जुर्माना यह सिद्ध करता है कि कानून की नजर हर जगह है। दो सौ रुपये की यह राशि उस युवक के लिए एक कड़ा सबक है और समाज के लिए एक चेतावनी। स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए केवल झाड़ू उठाना काफी नहीं है, बल्कि पंकज रावत जैसे अधिकारियों की तरह नियमों का सख्ती से पालन कराना भी अनिवार्य है।

​भागलपुर पुलिस प्रशासन ने इस घटना के माध्यम से यह संदेश दिया है कि ‘अंग जनपद’ की गरिमा और स्वच्छता के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस कार्रवाई के बाद पीरपैंती ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के लोग सार्वजनिक स्थलों पर तंबाकू सेवन से तौबा करेंगे और अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझेंगे। कानून का मंदिर अब न केवल न्याय देगा, बल्कि नागरिक अनुशासन का पाठ भी पढ़ाएगा।

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