​मुजफ्फरपुर-हाजीपुर रेलखंड की ‘गुमटी’ पर कर्नाटक पुलिस की पैनी नजर: ट्रिपल लेंस कैमरों ने बढ़ाई धड़कनें; NIA ने भी डाली दबिश

मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर-हाजीपुर रेलखंड पर स्थित एक साधारण सी दिखने वाली रेलवे गुमटी अचानक राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराज्यीय पुलिस जांच का केंद्र बन गई है। सराय रेलवे गुमटी संख्या 43 सी के हाइटगेट पर लगाए गए अत्याधुनिक ‘ट्रिपल लेंस’ कैमरों ने न केवल स्थानीय रेल पुलिस बल्कि देश की शीर्ष जांच एजेंसी एनआईए (NIA) को भी सक्रिय कर दिया। शुरुआती दौर में जब इन कैमरों की भनक स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया को लगी, तो इसे किसी बड़ी आतंकी साजिश या खुफिया निगरानी से जोड़कर देखा जाने लगा। अफवाहों का बाजार इस कदर गर्म हुआ कि पटना से एनआईए के अधिकारियों को दौड़ लगानी पड़ी। हालांकि, जब जांच की परतें खुलीं, तो मामला दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य से जुड़ा हुआ निकला। मुजफ्फरपुर रेल पुलिस द्वारा की गई गहन छानबीन में यह स्पष्ट हुआ है कि ये कैमरे किसी आतंकी संगठन ने नहीं, बल्कि कर्नाटक पुलिस ने एक बेहद शातिर और ‘हार्डकोर’ अपराधी की तलाश में लगाए थे। इस घटना ने एक बार फिर अपराधी और पुलिस के बीच चल रहे ‘डिजिटल चूहे-बिल्ली’ के खेल को उजागर कर दिया है, जहाँ हजारों किलोमीटर दूर बैठी पुलिस बिहार के एक रेलवे फाटक पर अपनी तीसरी आंख तैनात कर चुकी है।

सराय रेलवे फाटक पर ‘तीसरी आंख’ का रहस्य

​मुजफ्फरपुर-हाजीपुर रेलखंड सामरिक और यातायात के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी खंड पर सराय रेलवे गुमटी संख्या 43 सी स्थित है। पिछले कुछ दिनों से यहाँ के हाइटगेट (भारी वाहनों को रोकने के लिए लगाया गया लोहे का ढांचा) पर कुछ विशेष प्रकार के उपकरण देखे गए थे। ये साधारण सीसीटीवी कैमरे नहीं थे, बल्कि उच्च क्षमता वाले ट्रिपल लेंस कैमरे थे, जो रात के अंधेरे में भी स्पष्ट तस्वीर लेने और चेहरों की पहचान (Facial Recognition) करने में सक्षम हैं। इन कैमरों को इतनी गोपनीयता और मजबूती से लगाया गया था कि स्थानीय रेल कर्मियों को भी इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं थी।

​जैसे ही इन कैमरों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए, स्थानीय लोगों में डर व्याप्त हो गया। दावों के बीच यह बात फैल गई कि आतंकी संगठन रेलवे ट्रैक की निगरानी कर रहे हैं या किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। सोशल मीडिया पर ‘आतंकी साजिश’ की हेडलाइन के साथ ये खबरें वायरल होने लगीं, जिसके बाद मुजफ्फरपुर रेल पुलिस के कान खड़े हो गए। रेल एसपी बीना कुमारी ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत एक जांच टीम गठित की और खुद भी तकनीकी पहलुओं पर नजर रखनी शुरू की।

NIA की एंट्री और सुरक्षा एजेंसियों में खलबली

​मामला जब ‘आतंकी साजिश’ के संदिग्ध एंगल तक पहुँचा, तो पटना स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के कार्यालय में भी हलचल तेज हो गई। शनिवार की दोपहर एनआईए पटना के एक वरिष्ठ अधिकारी मुजफ्फरपुर रेल थाने पहुँचे। उन्होंने वहां मौजूद पुलिस पदाधिकारियों से इन कैमरों की तकनीकी बनावट, इन्हें लगाए जाने के समय और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के बारे में विस्तृत जानकारी ली।

​एनआईए की टीम ने सराय रेलवे फाटक संख्या 43 सी पर जाकर भौतिक निरीक्षण भी किया। अधिकारियों ने वहां तैनात गेटमैन और आसपास के दुकानदारों से पूछताछ की कि आखिर ये कैमरे कब और किन लोगों द्वारा लगाए गए थे। हालांकि, रेल पुलिस ने एनआईए की इस जांच को ‘रूटीन इनफार्मेशन शेयरिंग’ बताया है और आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि करने से बचती रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आतंकी इनपुट की खबरों के कारण केवल एनआईए ही नहीं, बल्कि खुफिया ब्यूरो (IB) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने भी अपने स्तर से इस कैमरे की सच्चाई जानने की कोशिश की है। पूरे दोपहर सराय गुमटी का इलाका खाकी और सादे लिबास में घूम रहे अधिकारियों से भरा रहा।

कर्नाटक पुलिस का ‘मिशन हार्डकोर’ और बिहार कनेक्शन

​जब मुजफ्फरपुर रेल एसपी बीना कुमारी ने तकनीकी जांच और आईपी एड्रेस (IP Address) के जरिए कैमरों के डेटा सेंटर को ट्रैक किया, तो एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इन कैमरों का सीधा लिंक कर्नाटक पुलिस से जुड़ा पाया गया। रेल एसपी ने तुरंत कर्नाटक पुलिस के उच्चाधिकारियों से संपर्क साधा, जिसके बाद पूरी तस्वीर साफ हो गई।

​कर्नाटक पुलिस के अनुसार, वे एक ‘हार्डकोर’ अपराधी की तलाश में हैं, जिसने दक्षिण भारत में किसी संगीन वारदात को अंजाम दिया है और उसके बिहार के रास्ते नेपाल भागने या उत्तर बिहार के जिलों में छिपे होने की पुख्ता सूचना मिली थी। अपराधी के मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए कर्नाटक पुलिस की एक तकनीकी टीम ने गुप्त रूप से बिहार का दौरा किया था और सराय रेलवे गुमटी को एक रणनीतिक स्थान के रूप में चुना। चूंकि यह रूट मुजफ्फरपुर और हाजीपुर को जोड़ता है, इसलिए यहाँ से गुजरने वाले हर वाहन और व्यक्ति पर नजर रखना आसान था। कर्नाटक पुलिस ने रेलवे के हाइटगेट का उपयोग इसलिए किया क्योंकि वहां से गुजरने वाली गाड़ियों की रफ्तार कम होती है और कैमरों को सटीक फुटेज मिल सकती है।

अफवाहों का अंत: रेल एसपी ने दी सफाई

​सोशल मीडिया पर चल रही आतंकी साजिश की थ्योरी को रेल एसपी बीना कुमारी ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैमरे लगाए जाने की प्रक्रिया पूरी तरह से पुलिसिया जांच का हिस्सा है। रेल एसपी ने कहा कि कर्नाटक पुलिस की टीम ने अपराधी की गिरफ्तारी के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया है। उन्होंने यह भी बताया कि इंटर-स्टेट पुलिसिंग में कई बार ऐसी गुप्त कार्रवाइयां की जाती हैं ताकि अपराधी को भनक न लगे।

​हालांकि, स्थानीय रेल पुलिस के साथ समन्वय की कमी के कारण यह भ्रम की स्थिति पैदा हुई। बीना कुमारी ने कहा, “हमने कर्नाटक पुलिस से संपर्क कर पूरी जानकारी ले ली है। यह किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि या संदिग्ध साजिश का हिस्सा नहीं है। यह केवल एक अपराधी को पकड़ने के लिए बिछाया गया जाल है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और न ही सोशल मीडिया की भ्रामक खबरों पर विश्वास करना चाहिए।” पुलिस अब उन लोगों को भी चिह्नित करने की कोशिश कर रही है जिन्होंने जानबूझकर इस घटना को साम्प्रदायिक या आतंकी रंग देने की कोशिश की थी।

हाइटगेट पर ट्रिपल लेंस तकनीक की महत्ता

​सराय गुमटी पर लगाए गए ये ट्रिपल लेंस कैमरे आधुनिक निगरानी तंत्र का हिस्सा हैं। ये कैमरे तीन अलग-अलग कोणों से तस्वीर लेते हैं, जिससे किसी भी चलते हुए वाहन या व्यक्ति का 3D प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है। इसमें एक लेंस चौड़ी निगरानी (Wide angle), दूसरा जूम (Optical zoom) और तीसरा रात के विजन (Infrared/Night vision) के लिए होता है।

​रेलवे गुमटियों पर ऐसे कैमरों का लगाया जाना यह दर्शाता है कि अपराधी अब सड़कों के साथ-साथ रेलखंडों के किनारे के रास्तों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। कर्नाटक पुलिस को अंदेशा था कि वांछित अपराधी इसी सराय फाटक के रास्ते से गुजर सकता है। अपराधी कितना ‘हार्डकोर’ है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में आकर इतनी आधुनिक तकनीक का जाल बिछा रही है। फिलहाल ये कैमरे अभी भी वहां लगे हुए हैं या नहीं, इसे लेकर पुलिस ने सुरक्षा कारणों से चुप्पी साध रखी है।

स्थानीय लोगों में कौतूहल और पुलिस की चुनौती

​इस पूरे घटनाक्रम ने सराय इलाके के लोगों के बीच चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लोग इस बात से हैरान हैं कि उनके छोटे से गांव की गुमटी इतनी महत्वपूर्ण कैसे हो गई कि कर्नाटक की पुलिस यहाँ कैमरा लगाने आ गई। वहीं, रेल पुलिस के लिए चुनौती यह है कि भविष्य में ऐसी किसी भी बाहरी एजेंसी की गतिविधि की जानकारी स्थानीय स्तर पर भी साझा की जाए ताकि एनआईए जैसी एजेंसियों को भाग-दौड़ न करनी पड़े और आम जनता में अनावश्यक भय का माहौल न बने।

​जांच में शामिल कई अन्य एजेंसियों ने भी अपनी रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को सौंप दी है। फिलहाल, सराय रेलवे फाटक संख्या 43 सी पर स्थिति सामान्य है, लेकिन हाइटगेट पर लगे उन कैमरों ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि अब बिहार के किसी भी कोने में छिपना अपराधियों के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि पुलिस की नजरें सरहदों के पार से भी निगरानी कर रही हैं। मुजफ्फरपुर रेल पुलिस अब कर्नाटक पुलिस के साथ मिलकर उस अपराधी के संभावित ठिकाने पर छापेमारी की तैयारी में जुटी है, जिसकी तलाश में यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हुआ था।

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