
पटना। बिहार की राजधानी पटना में नशे के सौदागरों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक ऐसा तरीका ईजाद किया, जिसे जानकर पुलिस भी हैरान रह गई। शहर की तंग गलियों और मुख्य सड़कों पर सवारी ढोने वाले साधारण ई-रिक्शा अब केवल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि नशे की खेप पहुँचाने के ‘चलते-फिरते गोदाम’ बन चुके थे। पटना पुलिस ने एक बड़े अभियान के तहत ई-रिक्शा से घूम-घूमकर नशे का इंजेक्शन बेचने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। शुक्रवार की रात हुई इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के छह सक्रिय सदस्यों को दबोच लिया है। इनके पास से न केवल भारी मात्रा में नशीले इंजेक्शन बरामद हुए हैं, बल्कि अवैध हथियार और बड़ी संख्या में मोबाइल फोन भी मिले हैं, जो इस गिरोह के खौफनाक व्यापार की कहानी बयां कर रहे हैं। सिटी एसपी (मध्य) परिचय कुमार के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई ने पटना के सुल्तानगंज और पीरबहोर जैसे इलाकों में फैले नशे के जाल को बड़ा झटका दिया है। पकड़े गए सभी आरोपितों को शनिवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
ई-रिक्शा बना ‘स्मगलिंग व्हीकल’: पुलिस को ऐसे मिला सुराग
पटना की सड़कों पर हजारों ई-रिक्शा चलते हैं, जो आम लोगों की लाइफलाइन हैं। इसी का फायदा उठाकर गिरोह के सरगना अफजल ने एक सोची-समझी साजिश रची थी। उसने अपने गुर्गों को ई-रिक्शा पर तैनात किया था ताकि पुलिस को उन पर शक न हो। ये ई-रिक्शा सवारी ढोने के बहाने उन इलाकों में चक्कर काटते थे जहाँ नशेड़ियों का जमावड़ा रहता था। शुक्रवार की रात सिटी एसपी परिचय कुमार को गुप्त सूचना मिली कि सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के गरहुआ मोड़ के पास दो युवक ई-रिक्शा (हवा-हवाई) पर सवार होकर संदिग्ध गतिविधियां कर रहे हैं और नशे की सुई बेच रहे हैं।
सूचना मिलते ही सुल्तानगंज पुलिस ने घेराबंदी की और मौके पर छापेमारी कर राहुल कुमार और विक्की कुमार को धर दबोचा। जब पुलिस ने ई-रिक्शा की तलाशी ली, तो वहां से नशीले इंजेक्शनों का जखीरा बरामद हुआ। इन दोनों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने पटना के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी शुरू की, जिससे एक के बाद एक कई कड़ियां जुड़ती चली गईं।
मोबाइल गिरवी रखो और नशा पाओ: गिरोह का ‘खौफनाक’ बिजनेस मॉडल
इस गिरोह की कार्यप्रणाली केवल नशा बेचने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इन्होंने नशेड़ियों की बेबसी का फायदा उठाने का एक नया जरिया निकाल लिया था। पुलिस को तलाशी के दौरान 32 मोबाइल फोन मिले हैं। पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जब नशेड़ियों के पास इंजेक्शन खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे, तो गिरोह के सदस्य उनका मोबाइल फोन गिरवी रख लेते थे। नशा करने की लत में डूबे युवा अपनी मेहनत की कमाई या परिवार के फोन को भी इन सौदागरों के पास बंधक रख देते थे।
बदले में उन्हें नशे का एक इंजेक्शन दे दिया जाता था। यह तरीका न केवल युवाओं को नशे की गर्त में धकेल रहा था, बल्कि इससे मोबाइल चोरी की घटनाओं को भी बढ़ावा मिल रहा था, क्योंकि नशे की तलब मिटाने के लिए कई युवा राह चलते लोगों के मोबाइल छीनकर इन सौदागरों के पास पहुँचा रहे थे। पुलिस बरामद हुए 32 मोबाइल फोनों के आईएमईआई (IMEI) नंबर खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें से कितने फोन लूट या चोरी के हैं। बरामद 29,420 रुपये नगद भी इसी अवैध धंधे से अर्जित किए गए थे।
मलेरिया ऑफिस से कुनकुन सिंह लेन तक छापेमारी की कड़ियां
राहुल और विक्की की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का अगला पड़ाव मलेरिया कार्यालय का इलाका बना। वहां से पुलिस ने सूर्या उर्फ अभिषेक और विशाल कुमार को गिरफ्तार किया। इनके पास से भी नशीली सुइयों की बड़ी खेप मिली। पुलिस की तफ्तीश यहाँ भी नहीं रुकी। सूर्या और विशाल से मिली सूचना के आधार पर पीरबहोर थाना क्षेत्र के कुनकुन सिंह लेन में दबिश दी गई। यहाँ से पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड अफजल और उसके सहयोगी मो. राजू कुमार को दबोच लिया।
अफजल के पास से पुलिस को एक लोडेड पिस्टल और चार जिंदा कारतूस मिले हैं। हथियार की मौजूदगी यह साबित करती है कि यह गिरोह केवल नशे का धंधा ही नहीं कर रहा था, बल्कि जरूरत पड़ने पर हिंसक वारदातों को अंजाम देने के लिए भी तैयार रहता था। अफजल ने शहर के अलग-अलग इलाकों में अपने एजेंट फैला रखे थे, जिन्हें वह ई-रिक्शा उपलब्ध कराता था और हर दिन के हिसाब से टारगेट देता था। पुलिस की इस सिलसिलेवार कार्रवाई ने पूरे सिंडिकेट के पैर उखाड़ दिए हैं।
कौन हैं ये नशे के सौदागर? प्रोफाइल पर एक नजर
गिरफ्तार किए गए सभी छह आरोपित पटना के ही अलग-अलग थाना क्षेत्रों के रहने वाले हैं, जिससे यह साफ होता है कि इनका स्थानीय नेटवर्क काफी मजबूत था।
- अफजल (शाहगंज): गिरोह का सरगना, जो हथियारों और नशीले पदार्थों की आपूर्ति का प्रबंधन करता था।
- विशाल कुमार (सुल्तानगंज): स्थानीय स्तर पर ग्राहकों की पहचान और सप्लाई का जिम्मा।
- सूर्या उर्फ अभिषेक (पीरबहोर): पीरबहोर और आसपास के क्षेत्रों में सिंडिकेट का संचालन।
- विक्की कुमार (मुसल्लहपुर): ई-रिक्शा के माध्यम से वितरण का मुख्य ऑपरेटर।
- राहुल कुमार (नाथुराम चाय टोला): विक्की के साथ मिलकर ‘डोर-टू-डोर’ डिलीवरी का काम।
- मो. राजू कुमार (लालबाग पीरबहोर): हथियारों को सुरक्षित रखने और लेनदेन का हिसाब देखने वाला।
इन सभी आरोपितों के खिलाफ सुल्तानगंज थाने में एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। सिटी एसपी परिचय कुमार ने बताया कि इन सभी का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है और इनके बैंक खातों की भी जांच की जाएगी ताकि इनके पीछे छिपे बड़े वित्तपोषकों (Funders) का पता लगाया जा सके।
बरामदगी की सूची: घातक सुइयां और अवैध हथियार
पुलिस द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई में बरामद सामानों की सूची इस प्रकार है:
- नशे के इंजेक्शन: 457 पीस (विभिन्न घातक रसायनों से निर्मित)।
- अवैध हथियार: 01 लोडेड पिस्टल।
- गोला-बारूद: 04 जिंदा कारतूस।
- मोबाइल फोन: 32 पीस (विभिन्न कंपनियों के स्मार्टफोन)।
- नगद राशि: 29,420 रुपये (नशा बेचकर कमाई गई रकम)।
- वाहन: 01 ई-रिक्शा (हवा-हवाई), जिसका इस्तेमाल तस्करी में होता था।
विशेषज्ञों का कहना है कि बरामद किए गए इंजेक्शन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। ये इंजेक्शन सीधे नसों में लिए जाते हैं, जिससे संक्रमण और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पटना पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल नशे की आपूर्ति रुकी है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को होने वाले बड़े खतरे को भी कम किया गया है।
राजधानी में ‘नशा मुक्त अभियान’ को मिलेगी गति
सिटी एसपी परिचय कुमार ने साफ कर दिया है कि पटना पुलिस अब उन ई-रिक्शा चालकों और अन्य छोटे वाहनों पर विशेष नजर रख रही है जो देर रात संदिग्ध इलाकों में घूमते नजर आते हैं। उन्होंने जनता से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई इस तरह से नशीली दवाओं या इंजेक्शनों का अवैध व्यापार करता है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस का मानना है कि अफजल के पकड़े जाने से अब उन स्रोतों का भी पता चलेगा जहाँ से ये इंजेक्शन भारी मात्रा में मंगवाए जा रहे थे।
आमतौर पर ये दवाइयां थोक दवा मंडी या अवैध गोदामों से सप्लाई की जाती हैं। पुलिस की अगली रेड अब उन ‘वाइट कॉलर’ सप्लायरों पर हो सकती है जो इन अपराधियों को कच्चा माल या तैयार इंजेक्शन उपलब्ध कराते थे। पटना के सुल्तानगंज, पीरबहोर और कदमकुआं जैसे इलाकों में पुलिस ने गश्ती बढ़ा दी है। शनिवार को सभी आरोपितों को जेल भेजने के बाद पुलिस अब इनके मोबाइल डेटा के जरिए उन ग्राहकों (नशेड़ियों) तक भी पहुँचने की कोशिश करेगी ताकि उन्हें परामर्श केंद्रों (Rehab centers) तक पहुँचाया जा सके। ई-रिक्शा जैसे सामान्य वाहन का इस्तेमाल जिस तरह से इस धंधे में हुआ, उसने प्रशासन को भी अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब पटना की सड़कों पर ई-रिक्शा केवल सवारी ही नहीं, बल्कि पुलिस की पैनी नजर का भी सामना करेंगे


