खबर के मुख्य बिंदु:
- बड़ा बजट: मुसल्लहपुर कृषि बाजार के कायाकल्प के लिए 68.41 करोड़ रुपये स्वीकृत।
- डिजिटल मंडी: ई-नाम (e-NAM) प्लेटफॉर्म से जुड़ेगी मंडी; अब दुनिया भर के व्यापारियों से सीधे जुड़ेंगे किसान।
- मंत्री का तेवर: सीमांकन में देरी पर कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने जताई नाराजगी; CO और SDO को अल्टीमेटम।
- नई सुविधाएं: CA कोल्ड स्टोरेज, संतरा चैंबर और प्रदर्शनी हॉल बनाने की मांग पर मंत्री ने दिए निर्देश।
पटना: बिहार के किसानों और व्यापारियों के लिए राजधानी पटना से एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पटना की प्रसिद्ध मुसल्लहपुर कृषि उत्पादन बाजार समिति का जल्द ही रूप बदलने वाला है। शुक्रवार को सूबे के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने मंडी प्रांगण का निरीक्षण किया और साफ़ कर दिया कि साल 2026 के अंत तक यह मंडी बिहार की सबसे आधुनिक मंडियों में से एक होगी। अब किसानों को अपने फल और सब्जियों को बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
मंडी में क्या-क्या बदलेगा? (The Modernization Plan)
सरकार का लक्ष्य मुसल्लहपुर मंडी को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक ‘एग्रो-हब’ बनाना है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रांगण में आधुनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, बड़े गोदाम, शुद्ध पेयजल, शौचालय और हाई-मास्ट लाइटें लगाई जा रही हैं।
- सुरक्षा: पूरे परिसर को सीसीटीवी और आधुनिक सुरक्षा तंत्र से लैस किया जा रहा है।
- e-NAM कनेक्टिविटी: मंडी को नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (e-NAM) से जोड़ा जाएगा, जिससे किसान घर बैठे अपनी फसल की ऑनलाइन बोली लगा सकेंगे।
अधिकारियों को फटकार: “काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं”
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने पाया कि मंडी के लगभग तीन-चौथाई हिस्से का सीमांकन (Demarcation) अभी तक नहीं हुआ है, जिससे चहारदीवारी का काम रुका हुआ है।
“मंत्री ने संबंधित अंचलाधिकारी (CO) और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) पर नाराजगी व्यक्त की और आदेश दिया कि अविलंब जमीन की नापी कर बाउंड्री का काम शुरू कराया जाए।”
व्यापारियों की मांग: संतरा चैंबर और कोल्ड स्टोरेज
निरीक्षण के दौरान पटना फल-सब्जी विक्रेता संघ के अध्यक्ष शशिकांत प्रसाद ने मंत्री को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए:
- CA कोल्ड स्टोरेज: लंबे समय तक फल-सब्जियों को ताजा रखने के लिए ‘कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर’ स्टोरेज की मांग।
- विशेष चैंबर: संतरा भंडारण के लिए दो विशेष आधुनिक चैंबरों का निर्माण।
- नो-एंट्री से राहत: गेट नंबर-2 से आने वाले किसान वाहनों को पुलिस की ‘नो-एंट्री’ से मुक्त करने का आग्रह, ताकि मंडी तक पहुंच आसान हो। कृषि मंत्री ने इन मांगों को जायज बताते हुए अधिकारियों को योजना में शामिल करने का निर्देश दिया है।
VOB का नजरिया: क्या 2026 के अंत तक बदलेगी तस्वीर?
मुसल्लहपुर मंडी सालों से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही थी। 68 करोड़ का निवेश और ई-नाम से जुड़ाव निश्चित रूप से किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा। हालांकि, पुल निर्माण निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती समय सीमा (दिसंबर 2026) के भीतर काम पूरा करना है। अगर प्रशासन सीमांकन की बाधा को जल्द दूर नहीं करता, तो यह प्रोजेक्ट भी फाइलों में उलझ सकता है।


