​खुशियों की शहनाई से पहले गूंजी चीखें: मुंगेर में हल्दी की रस्म के दौरान दूल्हे को सांप ने डसा, इकलौते बेटे की मौत से उजड़ा परिवार

मुंगेर/असरगंज। नियति का क्रूर मजाक और वक्त की बेरहमी कभी-कभी ऐसी दास्तां लिख देती है, जिसे सुनकर पत्थर दिल भी मोम की तरह पिघल जाए। मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड अंतर्गत बड़ी कोरियन गांव में एक ऐसा ही हृदयविदारक वाकया सामने आया है, जिसने खुशियों के आंगन को श्मशान की खामोशी में तब्दील कर दिया। जहाँ एक घर में बुधवार, 06 मई 2026 की रात मंगल गीत गाए जा रहे थे और हल्दी की रस्म के बीच दूल्हे के चेहरे पर भविष्य के सुनहरे सपने तैर रहे थे, वहीं काल के क्रूर डंक ने सब कुछ राख कर दिया。 शादी से महज 24 घंटे पहले, जब घर में मेहमानों की चहल-पहल थी और खुशियां अपने चरम पर थीं, तभी एक विषैले सांप ने दूल्हे को अपना शिकार बना लिया。 अस्पताल की भागदौड़ और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद 24 वर्षीय नीरज कुमार को नहीं बचाया जा सका। इस घटना ने न केवल एक परिवार का इकलौता चिराग बुझा दिया है, बल्कि पूरे असरगंज इलाके को गमगीन कर दिया है।

हल्दी के उबटन की महक और मातम का सन्नाटा

​बड़ी कोरियन गांव निवासी गणेश सिंह के घर में पिछले कई दिनों से उत्सव का माहौल था। उनके इकलौते पुत्र नीरज कुमार की शादी तय हुई थी और पूरा परिवार इस मांगलिक कार्य को सफल बनाने में जुटा हुआ था。 बुधवार की शाम घर की महिलाएं पारंपरिक गीत गा रही थीं और नीरज को हल्दी व मेहंदी लगाने की रस्म पूरे उत्साह के साथ चल रही थी。 आंगन में जलते दीये और मंगल गीतों के बीच कोई नहीं जानता था कि मौत दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है।

​नीरज, जो अपने जीवन की नई पारी शुरू करने के लिए बेहद उत्साहित था, अपनी शादी की रस्मों का आनंद ले रहा था। हल्दी का पीला रंग उसके चेहरे पर चढ़ा ही था कि तभी उसके मोबाइल पर एक फोन कॉल आई。 ग्रामीण परिवेश में अक्सर उत्सव के दौरान लोग शोर-शराबे से बचने के लिए बात करने बाहर निकल जाते हैं, और नीरज ने भी यही किया। वह फोन पर बात करते हुए जैसे ही घर की दहलीज लांघकर बाहर अंधेरे की ओर बढ़ा, घास में छिपे एक विषैले सांप ने उसके पैर में डस लिया。

एक फोन कॉल और मौत का बुलावा

​प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, नीरज फोन पर किसी से बात करने में इतना मशगूल था कि उसे जमीन पर रेंगते हुए खतरे का आभास तक नहीं हुआ。 सांप के काटते ही उसने चीख मारी और आनन-फानन में घर के अंदर भागा। जब उसने परिजनों को बताया कि उसे किसी जहरीले जीव ने काट लिया है, तो घर में अचानक अफरा-तफरी मच गई। गीतों की आवाज बंद हो गई और मंगल कलश की जगह अस्पताल की चिंताओं ने ले ली।

​सांप इतना विषैला था कि कुछ ही मिनटों में नीरज के शरीर पर जहर का असर दिखने लगा। उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजन और ग्रामीण उसे लेकर नजदीकी अस्पताल की ओर दौड़े। रास्ते भर लोग भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि कल का दूल्हा आज मौत से जंग जीत जाए, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान नीरज की सांसें उखड़ने लगीं और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया。 डॉक्टरों की पुष्टि के बाद जैसे ही उसका शव घर पहुँचा, कोहराम मच गया।

बूढ़े माता-पिता का एकमात्र सहारा छिना

​नीरज कुमार अपने पिता गणेश सिंह का इकलौता पुत्र था。 वह न केवल घर का वारिस था, बल्कि अपने माता-पिता के बुढ़ापे की एकमात्र लाठी भी था। जिस बेटे के सिर पर कल सेहरा बंधना था, आज उसकी अर्थी उठते देख गांव का हर शख्स सिसक उठा। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार बेसुध हो रहे हैं। उनकी आंखों के सामने वे तमाम सपने टूट गए जो उन्होंने अपने इकलौते बेटे की शादी को लेकर संजोए थे।

​गांव के बुजुर्गों का कहना है कि गणेश सिंह ने अपने बेटे को बहुत लाड़-प्यार से पाला था और वे उसकी शादी को लेकर बहुत भावुक थे। जिस घर से बारात निकलनी थी, वहां अब मातम का साया है। बड़ी संख्या में ग्रामीण गणेश सिंह के घर पहुँचकर उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इकलौते बेटे को खोने का गम किसी भी सांत्वना से कम नहीं होने वाला है। शादी के कार्ड जो कल तक लोगों को न्योता दे रहे थे, आज वे एक त्रासद अंत की गवाही दे रहे हैं।

ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश का बढ़ता खतरा

​असरगंज की यह घटना एक बार फिर ग्रामीण बिहार में सर्पदंश के बढ़ते खतरों की ओर इशारा करती है। गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही सांपों का बिलों से बाहर निकलना आम बात है, लेकिन अंधेरे रास्तों और झाड़ियों के पास पर्याप्त सुरक्षा का अभाव अक्सर जानलेवा साबित होता है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि अक्सर ऐसे आपातकालीन समय में स्थानीय स्तर पर एंटी-वेनम (सांप के जहर की दवा) और त्वरित चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण कीमती जान चली जाती है।

​नीरज की मौत ने पूरे बड़ी कोरियन गांव को हिलाकर रख दिया है। शादी की मिठाइयां वैसी ही धरी रह गईं और घर में बना पकवान अब जहर जैसा लग रहा है। जिस दुल्हन के घर में बारात की अगवानी की तैयारी चल रही थी, वहां भी इस खबर के पहुँचते ही सन्नाटा पसर गया है। दो परिवारों के बीच जुड़ने वाला रिश्ता शुरू होने से पहले ही काल की भेंट चढ़ गया।

गाँव में पसरा सन्नाटा और मातम

​गुरुवार की सुबह जब गांव में नीरज का अंतिम संस्कार किया गया, तो शायद ही कोई ऐसी आंख थी जो नम न हो। गाँव के युवाओं ने भारी मन से अपने साथी को अंतिम विदाई दी। इस घटना के बाद से गांव के लोग अब शाम ढलते ही बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की जा रही है कि वे ऐसे सुदूर इलाकों में सर्पदंश के प्राथमिक उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में किसी और ‘नीरज’ की शादी इस तरह मातम में न बदले।

​फिलहाल, बड़ी कोरियन गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। हल्दी के पीले दाग दीवारों पर अब भी मौजूद हैं, जो उस अधूरी कहानी की याद दिला रहे हैं जिसका नायक अब इस दुनिया में नहीं है। गणेश सिंह का घर अब केवल यादों और सिसकियों का केंद्र बन गया है।

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