कूड़ा फेंकने के मामूली विवाद ने ली बुजुर्ग की जान, मारपीट के आरोप के बीच गांव में तनाव; परिजनों ने पड़ोसियों पर लगाए गंभीर आरोप

मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले से एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां कूड़ा फेंकने को लेकर शुरू हुआ एक मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि इसी विवाद के दौरान हुई मारपीट में गंभीर रूप से घायल एक बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल है, जबकि मृतक के परिजनों ने पड़ोसी पक्ष पर न केवल मारपीट बल्कि घर से सामान और जेवरात लेकर फरार होने का भी आरोप लगाया है।

यह मामला असरगंज थाना क्षेत्र के अमिया संग्रामपुर गांव का है, जहां हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मृतक की पहचान कंपनी पासवान के रूप में हुई है। परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते विवाद को शांत करा दिया जाता तो आज एक परिवार अपने मुखिया को नहीं खोता।

मामूली बात से शुरू हुआ विवाद

ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर छोटे-छोटे घरेलू मुद्दे विवाद का कारण बन जाते हैं, लेकिन कई बार यही विवाद गंभीर घटनाओं में बदल जाते हैं। अमिया संग्रामपुर गांव में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

परिजनों के अनुसार घटना की शुरुआत घर के सामने कूड़ा फेंकने को लेकर हुई थी। मृतक की पत्नी ने पड़ोस में रहने वाले लोगों से अनुरोध किया था कि वे घर के मुख्य गेट के सामने कूड़ा न डालें और थोड़ी दूरी पर कूड़ा फेंकें ताकि घर के आसपास गंदगी न फैले।

बताया जा रहा है कि इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले बहस हुई और बाद में विवाद बढ़ता चला गया। स्थानीय लोगों के अनुसार शुरुआती कहासुनी को यदि उसी समय शांत करा दिया जाता तो मामला आगे नहीं बढ़ता।

कहासुनी के बाद बढ़ा तनाव

परिवार का आरोप है कि कूड़ा फेंकने को लेकर हुई बहस के बाद दोनों पक्षों के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया था। कुछ देर बाद विवाद ने अधिक गंभीर रूप ले लिया।

मृतक की पुत्री पिंकी देवी का कहना है कि कहासुनी के बाद पड़ोसी पक्ष के कई लोग उनके घर पहुंच गए। आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उन्होंने कंपनी पासवान के साथ मारपीट शुरू कर दी।

परिवार का दावा है कि हमलावरों ने लाठी-डंडों का इस्तेमाल किया, जिससे बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी भयभीत हो गए और गांव में अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई।

गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया

मारपीट के बाद घायल कंपनी पासवान की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत असरगंज के अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में प्राथमिक उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उनकी हालत को गंभीर बताया। चोटों की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें भागलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मायागंज अस्पताल) रेफर कर दिया।

परिजनों को उम्मीद थी कि बड़े अस्पताल में इलाज के बाद उनकी जान बचाई जा सकेगी, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो सका।

मायागंज अस्पताल में तोड़ा दम

भागलपुर के मायागंज अस्पताल में कंपनी पासवान का इलाज शुरू किया गया। चिकित्सकों की टीम ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी स्थिति लगातार गंभीर बनी रही।

इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची, पूरे परिवार में कोहराम मच गया। घर में मातम का माहौल छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

ग्रामीणों के अनुसार कंपनी पासवान परिवार के वरिष्ठ सदस्य थे और गांव में उनकी पहचान एक शांत स्वभाव के व्यक्ति के रूप में थी। उनकी मौत के बाद स्थानीय लोगों में भी दुख और आक्रोश देखा जा रहा है।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक के परिवार ने घटना को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि मारपीट की घटना के बाद आरोपी पक्ष के लोग घर से कुछ सामान और जेवरात लेकर फरार हो गए।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन परिवार लगातार इसकी जांच और कार्रवाई की मांग कर रहा है।

परिजनों का कहना है कि घटना केवल मारपीट तक सीमित नहीं थी, बल्कि घर में रखी मूल्यवान वस्तुओं को भी नुकसान पहुंचाया गया। परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

परिवार ने न्याय की लगाई गुहार

मृतक की पुत्री पिंकी देवी ने आरोप लगाया है कि उनके पिता की मौत के लिए पड़ोसी पक्ष जिम्मेदार है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

परिवार का कहना है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए ताकि उन्हें न्याय मिल सके। उन्होंने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।

परिजनों का कहना है कि परिवार ने अपना सबसे महत्वपूर्ण सदस्य खो दिया है और अब उन्हें न्याय की उम्मीद प्रशासन और कानून व्यवस्था से है।

गांव में पसरा मातम और तनाव

घटना के बाद अमिया संग्रामपुर गांव में शोक और तनाव दोनों का माहौल है। एक ओर मृतक के घर में लोगों का तांता लगा हुआ है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के बीच घटना को लेकर चर्चा जारी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे विवादों को समय रहते सुलझाने की आवश्यकता होती है, क्योंकि कई बार मामूली झगड़े भी बड़े अपराधों में बदल जाते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

पुलिस जांच पर टिकी सबकी नजर

घटना के बाद अब पूरे मामले में पुलिस जांच महत्वपूर्ण हो गई है। परिजनों के आरोपों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और चिकित्सीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मारपीट और मौत के बीच सीधा संबंध स्थापित होता है, तो मामला गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत दर्ज किया जा सकता है।

साथ ही घर से सामान और जेवरात ले जाने के आरोपों की भी अलग से जांच की जा सकती है।

छोटी बात से बड़ी त्रासदी

अमिया संग्रामपुर की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता और छोटी बातों पर हिंसा किस दिशा में जा रही है। जिस विवाद की शुरुआत केवल कूड़ा फेंकने को लेकर हुई थी, वह अंततः एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति में बदल गया।

एक बुजुर्ग की मौत ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। परिवार को उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और उन्हें न्याय मिलेगा।

फिलहाल गांव में स्थिति पर नजर रखी जा रही है और स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है।

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