
पटना। बिहार सरकार ने राज्य की बैंकिंग व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, प्रभावी और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि बैंक अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करते और राज्य के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें सरकारी जमा राशि (गवर्नमेंट डिपॉजिट) पर रोक लगाने जैसे कठोर कदम भी शामिल हैं।
उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसाओं को मंजूरी दे दी है। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति ने बैंकिंग व्यवस्था में सुधार के लिए पांच महत्वपूर्ण रणनीतिक सुझाव दिए हैं। इन सुझावों का उद्देश्य राज्य में ऋण वितरण बढ़ाना, साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) में सुधार करना और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन को लेकर सरकार गंभीर
राज्य सरकार का मानना है कि बिहार के आर्थिक विकास में बैंकिंग क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उद्योग, कृषि, स्वरोजगार, शिक्षा और विभिन्न विकास योजनाओं के लिए बैंकिंग नेटवर्क की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होती है।
हालांकि समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई बड़े बैंक राज्य के वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। विशेष रूप से ऋण वितरण और सीडी रेशियो के मामले में कई बैंक अपेक्षित परिणाम देने में पीछे हैं।
इसी कारण सरकार ने निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने का फैसला किया है।
क्या है सीडी रेशियो और क्यों है महत्वपूर्ण?
सीडी रेशियो यानी क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो किसी राज्य या क्षेत्र में जमा राशि के मुकाबले दिए गए ऋण का अनुपात होता है। यह दर्शाता है कि बैंक स्थानीय स्तर पर जमा धन का कितना हिस्सा ऋण के रूप में वापस अर्थव्यवस्था में लगा रहे हैं।
यदि सीडी रेशियो कम होता है तो इसका अर्थ है कि बैंक जमा राशि तो ले रहे हैं, लेकिन उसके अनुपात में ऋण नहीं दे रहे हैं। इससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और निवेश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
बिहार सरकार लंबे समय से राज्य का सीडी रेशियो बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि कृषि, उद्योग और स्वरोजगार क्षेत्र को पर्याप्त वित्तीय सहायता मिल सके।
वार्षिक साख योजना के लिए नया लक्ष्य
उच्च स्तरीय समिति ने अपनी पहली अनुशंसा में कहा है कि राज्य का सीडी रेशियो बढ़ाने के लिए वार्षिक साख योजना (ACP) का लक्ष्य अधिक महत्वाकांक्षी बनाया जाना चाहिए।
समिति के अनुसार संभावित जमा राशि का कम से कम 80 प्रतिशत ऋण लक्ष्य निर्धारित किया जाना चाहिए। इसी दिशा में नाबार्ड द्वारा संभावित ऋण योजना (PLP) को संशोधित करते हुए 3.55 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अब राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) से अनुरोध किया जाएगा कि नए आंकड़ों के आधार पर वार्षिक साख योजना तैयार की जाए।
बड़े बैंकों के प्रदर्शन पर उठे सवाल
समिति की दूसरी महत्वपूर्ण अनुशंसा राज्य के सीडी रेशियो से जुड़ी है। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कुछ बड़े बैंक अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं।
विश्लेषण में सामने आया कि यदि केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को अलग कर दिया जाए तो राज्य का सीडी रेशियो 68 प्रतिशत से अधिक हो जाता है। वहीं यदि एसबीआई और पंजाब नेशनल बैंक दोनों को अलग कर दिया जाए तो यह अनुपात 72 प्रतिशत से ऊपर पहुंच जाता है।
इससे यह संकेत मिलता है कि कई छोटे और मध्यम बैंक ऋण वितरण के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसलिए समिति ने सुझाव दिया है कि बड़े बैंकों को अधिक ऋण लक्ष्य दिया जाए ताकि उनका प्रदर्शन सुधर सके।
जनसमर्थ पोर्टल के उपयोग पर जोर
सरकार की तीसरी अनुशंसा डिजिटल बैंकिंग और ऋण वितरण को आसान बनाने से जुड़ी है।
समिति ने सुझाव दिया है कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अन्य सरकारी ऋण योजनाओं को जनसमर्थ पोर्टल से जोड़ा जाए। इससे आवेदकों को एक ही मंच पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी और आवेदन की सुविधा मिलेगी।
जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से सभी बैंकों को सीधे आवेदन प्राप्त होंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में भी सुधार आएगा।
पंचायत स्तर तक पहुंचेगी डिजिटल बैंकिंग
समिति की चौथी अनुशंसा ग्रामीण क्षेत्रों में जनसमर्थ पोर्टल के प्रचार-प्रसार से संबंधित है।
सरकार चाहती है कि पंचायत स्तर पर आयोजित सहयोग शिविरों के माध्यम से किसानों और ग्रामीण नागरिकों को डिजिटल ऋण आवेदन प्रणाली से जोड़ा जाए।
विशेष रूप से किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अधिक से अधिक आवेदन ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
जीविका समूहों, स्वयं सहायता समूहों और लाखों पंजीकृत किसानों को इस अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों पर सख्ती
समिति की पांचवीं और सबसे महत्वपूर्ण अनुशंसा बैंक प्रदर्शन की निगरानी से जुड़ी है।
राज्य सरकार ने 100 अंकों के प्रदर्शन सूचकांक के आधार पर बैंकों की रैंकिंग तैयार करने का निर्णय लिया है। जिन बैंकों का सीडी रेशियो सुधार बेहद कम है या जिनकी उपलब्धि 50 प्रतिशत से नीचे है, उन्हें विशेष निगरानी सूची में रखा जाएगा।
इसके अलावा जिन बैंकों की वार्षिक साख योजना उपलब्धि 60 प्रतिशत से कम है, उनके प्रदर्शन की भी लगातार समीक्षा की जाएगी।
छह महीने का मिला समय
वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि कमजोर प्रदर्शन वाले बैंकों को सुधार के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा।
यदि इस अवधि में उनके प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार नहीं दिखता है तो राज्य सरकार उनके सरकारी डिपॉजिट पर रोक लगाने जैसे कड़े कदम उठा सकती है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से बैंक अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करेंगे और राज्य के विकास कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
निगरानी सूची में शामिल 15 प्रमुख बैंक
सरकार ने जिन बैंकों के प्रदर्शन पर विशेष निगरानी रखने का निर्णय लिया है उनमें यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बंधन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कर्नाटक बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंडसइंड बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक और करूर वैश्य बैंक शामिल हैं।
इन संस्थानों को वित्त विभाग की ओर से सुधार के लिए विशेष निर्देश जारी किए जाएंगे।
पहले भी बनी थी उच्च स्तरीय समिति
राज्य सरकार ने जनवरी 2026 में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक के बाद इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था।
समिति का उद्देश्य राज्य में बैंकिंग गतिविधियों की नियमित समीक्षा करना, वार्षिक साख योजना की प्रगति का मूल्यांकन करना और वित्तीय समावेशन को मजबूत बनाना है।
यह समिति समय-समय पर बैंकों के प्रदर्शन का आकलन करेगी और आवश्यक सुधारात्मक सुझाव देती रहेगी।
आर्थिक विकास को गति देने की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंक अधिक सक्रिय रूप से ऋण वितरण बढ़ाते हैं तो इसका सीधा लाभ किसानों, उद्यमियों, छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को मिलेगा।
बिहार सरकार की यह पहल केवल बैंकों की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य राज्य की अर्थव्यवस्था को अधिक गतिशील बनाना और विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है।
सरकार का संदेश स्पष्ट है कि राज्य के विकास में बैंकिंग क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है और जो बैंक इस दिशा में अपेक्षित योगदान नहीं देंगे, उन्हें जवाबदेह बनाया जाएगा। आने वाले छह महीने बिहार के बैंकिंग क्षेत्र के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। :::


