श्रावणी मेला 2026 की तैयारियां तेज: सुल्तानगंज से दुम्मा तक शिवमय होगा पूरा मार्ग, टेंट सिटी से लेकर ड्रोन शो तक की होगी विशेष व्यवस्था

पटना/भागलपुर। बिहार के विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंचने लगी हैं। इस वर्ष आयोजित होने वाले श्रावणी मेले को पहले से अधिक भव्य, आकर्षक और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए बिहार सरकार ने व्यापक स्तर पर कार्ययोजना तैयार की है। पर्यटन विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार सुल्तानगंज स्थित बाबा अजगैबीनाथ धाम से लेकर झारखंड सीमा के दुम्मा तक पूरा कांवरिया पथ शिवमय वातावरण में नजर आएगा।

बुधवार को पर्यटन विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने विभागीय अधिकारियों तथा भागलपुर, मुंगेर और बांका जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में श्रावणी मेला 2026 की तैयारियों की समीक्षा की गई और विभिन्न विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

30 जुलाई से शुरू होगा श्रावणी मेला

बैठक में जानकारी दी गई कि इस वर्ष श्रावणी मेला 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान देशभर से लाखों शिवभक्त और कांवरिया सुल्तानगंज पहुंचेंगे और गंगाजल लेकर पैदल देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना होंगे।

हर वर्ष की तरह इस बार भी बिहार के भागलपुर, मुंगेर और बांका जिले श्रावणी यात्रा के प्रमुख केंद्र होंगे। प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

शिवमय बनेगा पूरा कांवरिया पथ

पर्यटन विभाग की सबसे महत्वाकांक्षी योजना इस बार पूरे मेला मार्ग को शिवमय स्वरूप प्रदान करने की है।

सुल्तानगंज के बाबा अजगैबीनाथ मंदिर से लेकर बिहार सीमा दुम्मा तक यात्रा मार्ग पर विशेष सजावट की जाएगी। जगह-जगह भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे और आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था होगी।

मार्ग पर शिव मंत्रों, भजनों और धार्मिक ध्वनियों की गूंज सुनाई देगी ताकि श्रद्धालुओं को पूरी यात्रा के दौरान आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हो सके।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मार्ग की सजावट और सौंदर्यीकरण का कार्य समय पर पूरा किया जाए।

पहली बार कई नए स्थानों पर बनेगी टेंट सिटी

श्रावणी मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस बार कई नए स्थानों पर टेंट सिटी विकसित की जाएगी।

पर्यटन विभाग के अनुसार बाबा अजगैबीनाथ धाम, सुल्तानगंज में पहले जहां 200 बेड की व्यवस्था होती थी, वहीं इस बार इसे बढ़ाकर 500 बेड किया जाएगा।

इसके अलावा बांका जिले के अबरखा में 600 बेड की क्षमता वाली टेंट सिटी बनाई जाएगी।

पहली बार धौरी में 200 बेड और गोड़ियारी में 250 बेड की व्यवस्था की जाएगी।

मुंगेर जिले के खैरा और धोबई में 200-200 बेड की सुविधा उपलब्ध होगी। वहीं पहली बार असरगंज में 300 बेड, तारापुर में 200 बेड और संग्रामपुर में 200 बेड वाले आवासीय शिविर विकसित किए जाएंगे।

श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

पर्यटन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी टेंट सिटी में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

प्रत्येक टेंट सिटी में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्नानघर, स्वास्थ्य सुविधा, बिजली, सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था रहेगी।

इसके अलावा कांवर रखने के लिए अलग से कांवर स्टैंड भी बनाए जाएंगे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

सरकार का प्रयास है कि लंबी पैदल यात्रा करने वाले कांवरियों को विश्राम के दौरान सभी आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकें।

जीविका दीदी की रसोई होगी विशेष आकर्षण

इस बार श्रावणी मेले में जीविका समूहों की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है।

सभी टेंट सिटी में जीविका दीदी की रसोई की व्यवस्था की जाएगी, जहां श्रद्धालुओं को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

इस पहल से एक ओर कांवरियों को बेहतर भोजन सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय के अवसर भी बढ़ेंगे।

अधिकारियों का मानना है कि यह पहल महिला सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

ड्रोन शो और लेजर शो से बढ़ेगा आकर्षण

श्रावणी मेला 2026 को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष बनाया जाएगा।

पर्यटन सचिव ने निर्देश दिया है कि प्रमुख स्थलों पर लाइट एंड साउंड शो, फाउंटेन शो, लेजर शो और ड्रोन शो का आयोजन किया जाए।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से बाबा अजगैबीनाथ धाम और श्रावणी मेले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को प्रस्तुत किया जाएगा।

विशेष रूप से सुल्तानगंज और प्रमुख टेंट सिटी क्षेत्रों में इन आयोजनों को लेकर विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।

पूरे मेले में होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

श्रावणी मेला अवधि के दौरान श्रद्धालुओं के मनोरंजन और सांस्कृतिक अनुभव को समृद्ध बनाने के लिए व्यापक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

मेला उद्घाटन और समापन समारोह में राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।

इसके अतिरिक्त प्रत्येक सोमवार को राज्यस्तरीय कलाकार कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे, जबकि अन्य दिनों में जिला स्तरीय कलाकारों को मंच दिया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को बढ़ावा देना भी है।

कलाकारों के चयन के लिए बनेगी समिति

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर स्क्रीनिंग समिति गठित की जाएगी।

यह समिति कलाकारों का चयन करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रावणी मेले की गरिमा और धार्मिक भावना के अनुरूप हों।

पर्यटन विभाग चाहता है कि स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का पर्याप्त अवसर मिले।

भागलपुर में बनेंगे स्विस कॉटेज

पर्यटन विभाग ने भागलपुर में विशेष व्यवस्था के तहत 25 स्विस कॉटेज विकसित करने का निर्णय लिया है।

यह व्यवस्था सोनपुर मेले की तर्ज पर की जाएगी, जहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और विशिष्ट अतिथि बेहतर आवास सुविधा प्राप्त कर सकेंगे।

इसके लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी गई है।

अधिकारियों का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और बिहार की पर्यटन क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।

धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने की तैयारी

श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय व्यापार, परिवहन, होटल, खाद्य सेवाओं और अन्य क्षेत्रों को भी बड़ा लाभ मिलता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार इस बार मेले को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक बनाने पर विशेष जोर दे रही है।

पर्यटन विभाग का लक्ष्य है कि श्रद्धालु जब सुल्तानगंज से अपनी यात्रा शुरू करें तो उन्हें पूरी यात्रा के दौरान आध्यात्मिक वातावरण, बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित अनुभव प्राप्त हो।

यदि सभी तैयारियां निर्धारित समय पर पूरी हो जाती हैं, तो श्रावणी मेला 2026 न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में भी बिहार के इतिहास में एक नई मिसाल बन सकता है।

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