वरिष्ठ नेता से मुलाकात के बाद भी फैसले पर अड़े मृत्युंजय तिवारी, कहा- पार्टी छोड़ने का निर्णय नहीं बदलूंगा

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। सवाल केवल एक नेता के पार्टी छोड़ने का नहीं, बल्कि यह भी उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। हालांकि, किसी एक नेता के इस्तीफे के आधार पर पूरे समाज या किसी वर्ग की राय का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन इस घटनाक्रम ने संगठन की कार्यशैली और संवाद को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात, लेकिन फैसला बरकरार

शुक्रवार को इस्तीफे के बाद मृत्युंजय तिवारी राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी से मिलने पहुंचे। मुलाकात के बाद उन्होंने साफ कहा कि उनका इस्तीफा वापस लेने का कोई सवाल नहीं है।

उन्होंने कहा,

“सिद्दीकी साहब हमारे अभिभावक हैं। उनसे हमारा पारिवारिक रिश्ता है। लेकिन पार्टी से इस्तीफा देने का जो फैसला लिया है, उस पर आज भी कायम हूं।”

‘पार्टी की दुर्गति पर आत्ममंथन जरूरी’

मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी की वर्तमान स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब राजद कठिन दौर में थी, तब उन्होंने पूरी निष्ठा से संगठन के लिए काम किया और पिछले दो विधानसभा चुनावों में पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनाने में योगदान दिया।

उन्होंने कहा,

“आज पार्टी की दुर्गति हो गई है। आत्ममंथन होना चाहिए कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है? कौन ऐसा व्यक्ति है जिसने पार्टी को भीतर से कमजोर किया?”

सम्मान नहीं मिलने का लगाया आरोप

इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी पद या महत्वाकांक्षा के कारण नहीं, बल्कि आत्मसम्मान से जुड़ा है।

“मेरे सम्मान को ठेस पहुंची, इसलिए मैंने पार्टी छोड़ दी। जहां सम्मान नहीं मिलेगा, वहां रहना संभव नहीं है।”

तेजस्वी यादव का भी किया जिक्र

मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि पार्टी के लिए उन्होंने क्या योगदान दिया, यह सबसे अच्छी तरह तेजस्वी यादव जानते हैं।

उन्होंने कहा,

“तेजस्वी जी का हृदय जानता होगा कि मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के लिए क्या-क्या किया है।”

क्या बढ़ रही है संगठन के भीतर नाराजगी?

मृत्युंजय तिवारी ने यह तो नहीं कहा कि उनके बाद और नेता भी इस्तीफा देंगे, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि संगठन के भीतर कई कार्यकर्ता और नेता असंतुष्ट हैं।

हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि किसी पूरे सामाजिक वर्ग या बड़ी संख्या में नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। लेकिन एक वरिष्ठ नेता का इस तरह सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताना निश्चित रूप से राजद के लिए संगठनात्मक चुनौती माना जा रहा है।

चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह इस्तीफा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि राजद नेतृत्व इन आरोपों का क्या जवाब देता है और संगठन के भीतर उठ रहे असंतोष को किस तरह संभालता है।

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