
पटना, 30 मार्च। बिहार में गन्ना और चीनी उद्योग को फिर से मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के गन्ना उद्योग विभाग और राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड (NFCSF), नई दिल्ली के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पहल से राज्य में गन्ना उत्पादन बढ़ाने, बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और नए उद्योग स्थापित करने का रास्ता साफ होगा।
गन्ना उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम
एग्जीबिशन रोड स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार की मौजूदगी में यह समझौता हुआ। संयुक्त ईखायुक्त जयप्रकाश नारायण सिंह और NFCSF के प्रबंध निदेशक प्रकाश नायकनावरे ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
मंत्री ने इसे बिहार के गन्ना और चीनी उद्योग के इतिहास में एक अहम मील का पत्थर बताया।
‘मिशन शुगरकेन बिहार’ को मिलेगी गति
सरकार का लक्ष्य ‘मिशन शुगरकेन बिहार’ के तहत गन्ने की खेती का विस्तार और उत्पादन बढ़ाना है। इसके साथ ही राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और नई मिलों की स्थापना पर भी जोर दिया जा रहा है।
सात निश्चय-3 योजना के तहत ‘समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार’ के विजन को आगे बढ़ाने के लिए यह साझेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तकनीक और AI से बढ़ेगी उत्पादकता
इस समझौते के तहत किसानों को उन्नत गन्ना किस्में उपलब्ध कराई जाएंगी और आधुनिक खेती तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। सिंचाई, पोषण प्रबंधन, कीट नियंत्रण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर रहेगा।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
सरकार का मानना है कि इस पहल से न सिर्फ गन्ना उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पर्याप्त कच्चा माल मिलने से चीनी मिलों का संचालन भी सुचारू रूप से हो सकेगा।
नई और बंद मिलों पर विशेष ध्यान
अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने बताया कि सरकार 25 नई चीनी मिलों की स्थापना और बंद पड़ी मिलों को फिर से चालू करने की दिशा में काम कर रही है। सकरी और रैयाम चीनी मिल परियोजनाओं पर काम शुरू करने की तैयारी चल रही है।
NFCSF का सहयोग, AI का बढ़ेगा उपयोग
NFCSF के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि बिहार में गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। डीपीआर तैयार करने से लेकर आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल तक हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
यह एमओयू सिर्फ एक औपचारिक समझौता नहीं, बल्कि बिहार के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए नई उम्मीद है। अगर योजनाएं जमीन पर उतरीं, तो आने वाले समय में बिहार फिर से देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है।


