
पटना, 30 मार्च। अपराध के बदलते स्वरूप और तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए बिहार पुलिस खुद को तेजी से अपडेट कर रही है। आधुनिक जांच तकनीकों और नए कानूनों के अनुरूप पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे हर तरह के केस की बेहतर तरीके से जांच कर सकें और दोषियों को सजा दिलाने में कोई कमी न रहे।
2018 पुलिसकर्मियों को मिल चुकी है विशेष ट्रेनिंग
सीआईडी के एडीजी पारसनाथ ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान 6 बैच में कुल 2018 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। हर बैच में औसतन 300 से 350 कर्मियों को शामिल किया जाता है। इसके लिए सीआईडी के अंतर्गत एडवांस ट्रेनिंग स्कूल (ATS) का संचालन किया जा रहा है।
12 दिन का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
पुलिसकर्मियों के लिए 12 दिनों का एक व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसमें केस जांच, केस डायरी लेखन, डिजिटल साक्ष्य और नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा रही है।
इन आधुनिक विषयों पर फोकस
प्रशिक्षण के दौरान जिन प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है, उनमें—
- सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम)
- ई-साक्ष्य और डिजिटल एविडेंस
- साक्ष्य संग्रह और संरक्षण की प्रक्रिया
- कंप्यूटर साक्षरता
- फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तकनीक
- फॉरेंसिक जांच से जुड़े पहलू
डिजिटल अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिसकर्मियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट में भी भागीदारी
एडीजी ने बताया कि नागपुर में आयोजित ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट में बिहार पुलिस के कई कर्मी हिस्सा ले रहे हैं। फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, डॉग स्क्वॉड और एंटी-सबोटाज चेकिंग जैसी स्पर्धाओं में राज्य के प्रशिक्षित पुलिसकर्मी शामिल हुए हैं।
बिहार में पहली बार डीएनए प्रतियोगिता और कार्यशाला
अप्रैल महीने में बिहार में पहली बार डीएनए से जुड़ी विशेष कार्यशाला और प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें देशभर के फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह कार्यक्रम पुलिसकर्मियों को वैज्ञानिक जांच के नए आयामों से जोड़ने में मदद करेगा।
राष्ट्रीय संस्थानों से भी मिल रहा सहयोग
पुलिस अधिकारियों को उन्नत प्रशिक्षण देने के लिए नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (नई दिल्ली), एनसीआरबी, चंडीगढ़ स्थित सीडीटीआई और नॉर्थ ईस्ट पुलिस अकादमी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का भी सहयोग लिया जा रहा है।
बिहार पुलिस की यह पहल साफ दर्शाती है कि अब अपराध से लड़ाई सिर्फ पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि तकनीक और वैज्ञानिक जांच के सहारे लड़ी जा रही है। उन्नत प्रशिक्षण के जरिए पुलिसकर्मियों को और सक्षम बनाया जा रहा है, जिससे न्याय प्रक्रिया और अधिक मजबूत होगी।


