
मोतिहारी/मुजफ्फरपुर, 22 मई 2026। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर के भीतर एक बेहद हृदयविदारक, संवेदनशील और संदेहास्पद घटनाक्रम दर्ज किया गया है। कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल के एक बंद कमरे के भीतर तृतीय सेमेस्टर की एक होनहार छात्रा का शव फंदे से लटकता हुआ पाए जाने के बाद संपूर्ण शैक्षणिक प्रक्षेप में भारी सनसनी, गहरा रोष और प्रशासनिक हड़कंप की अवस्थिति निर्मित हो गई है। इस दुखद घटना के पटल पर आते ही हॉस्टल की अन्य छात्राओं, कॉलेज प्रबंधन और स्थानीय नागरिकों के बीच गहरा अवसाद संधारित देखा जा रहा है।
मृतक छात्रा की पहचान रिमी कुमारी के रूप में मुकम्मत की गई है, जो मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लक्ष्मी चौक प्रक्षेत्र की मूल निवासी थी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय मुफस्सिल थाना पुलिस और जिले के आला पुलिस कप्तान भारी दलबल के साथ तुरंत ग्राउंड जीरो पर मुस्तैद हुए हैं। पुलिस के विशेष जासूसी दस्तों ने मामले की विधिक संचिका तैयार कर हर संभावित एंगल्स पर एक सघन और कड़ा खोजी अभियान लाइव मोड पर सक्रिय कर दिया है।
हॉस्टल के कमरे में दुपट्टे के सहारे झूलता मिला शव, कॉलेज परिसर में मची भारी अफरातफरी
पारिवारिक पृष्ठभूमि और कॉलेज संचिकाओं से संकलित प्राथमिक विलेखों के अनुसार, मृतका रिमी कुमारी मोतिहारी इंजीनियरिंग कॉलेज में ट्रिपल ई (इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग) ट्रेड की 2023 बैच की एक अत्यंत कुशाग्र और नियमित छात्रा संधारित थी। वह अपने सुनहरे भविष्य को विनिर्मित करने और तकनीकी शिक्षा के विन्यासों को आत्मसात करने के उद्देश्य से मोतिहारी के इस सरकारी संस्थान के छात्रावास में रहकर अनवरत पढ़ाई कर रही थी। गुरुवार की दोपहर को जब हॉस्टल की अन्य छात्राएं अपने नियमित शैक्षणिक कार्यों और भोजन प्रक्रमों में व्यस्त संधारित थीं, तभी रिमी कुमारी के कमरे का किवाड़ काफी देर तक भीतर से लॉक पाया गया।
कमरे के भीतर से किसी भी प्रकार की दैनिक हलचल या आवाज बाहर न आने के कारण उसकी सहपाठियों और हॉस्टल वॉर्डन को आंशिक संदेह हुआ। जब सहेलियों ने किवाड़ के झरोखों से कमरे के आंतरिक हिस्से को बारीकी से देखने का प्रयास किया, तो अंदर का विजुअल नजारा पूरी तरह से होश उड़ाने वाला और स्तब्ध करने वाला था। कमरे के भीतर सीलिंग फैन (पंखे) के सहारे रिमी कुमारी का शव उसके अपने ही दुपट्टे के विन्यास से बने फंदे पर संदेहास्पद परिस्थितियों में झूल रहा था।
इस भयानक दृश्य के लाइव होते ही छात्रावास के गलियारों में चीख-पुकार, भगदड़ और भारी कोहराम मच गया। कॉलेज प्रशासन ने बिना किसी लिपिकीय ढिलाई के तुरंत इस सामूहिक विसंगति की सूचना स्थानीय पुलिस और एम्बुलेंस प्रणालियों को हस्तगत कराई। पुलिस बल की प्रविष्टि के बाद छात्रा के शरीर को फंदे से नीचे उतारा गया और तत्काल नजदीकी मुख्य चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों के चिकित्सा दल ने गहन शारीरिक परीक्षण के उपरांत उसे विधिक रूप से मृत घोषित कर दिया। इस दुखद विलेख के सार्वजनिक होते ही कॉलेज परिसर और अस्पताल मुहाने के भीतर सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भारी हुजूम मुस्तैद हो गया, जिससे चारों तरफ अफरातफरी और गहरे तनाव का माहौल संधारित देखा गया।
पिता प्रदीप कुमार का प्रखर दावा: बेटी की गला दबाकर की गई है निर्मम हत्या, न्याय की गुहार
इस संदेहास्पद और हृदयविदारक मौत की भनक जैसे ही मुजफ्फरपुर के लक्ष्मी चौक पर रह रहे मृतका के परिजनों को हस्तगत हुई, संपूर्ण परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। मृतका के पिता प्रदीप कुमार भारी विलाप और कोहराम के बीच अपने सहोदर रिश्तेदारों के साथ मोतिहारी पहुंचे। अस्पताल के विंग में अपनी लाडली बेटी के निर्जीव शरीर को देखकर पिता का धैर्य पूरी तरह से टूट गया और उन्होंने रोते हुए कॉलेज प्रबंधन व कतिपय अज्ञात तत्वों के खिलाफ बेहद प्रखर और गंभीर आरोप मढ़ना शुरू कर दिया।
पिता प्रदीप कुमार ने पुलिस कप्तानों के समक्ष अपना विधिक स्टैंड रखते हुए सीधे शब्दों में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी किसी भी प्रकार के मानसिक अवसाद या शैक्षणिक दबाव के चक्रव्यूह में नहीं थी कि वह स्वयं ऐसा कोई खौफनाक आत्मघाती कदम उठा सके। पिता का स्पष्ट और कड़ा दावा है कि यह आत्महत्या का मामला कतई नहीं है, बल्कि हॉस्टल परिसर के भीतर सक्रिय कतिपय तत्वों द्वारा सोची-समझी साजिश के तहत पहले उनकी बेटी की गला दबाकर निर्मम हत्या की गई है।
परिजनों का आरोप है कि इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के बाद फॉरेंसिक साक्ष्यों को पूरी तरह से नष्ट और ब्लॉक करने के उद्देश्य से हत्यारों ने शव को पंखे से लटकाकर उसे आत्महत्या का कूटनीतिक रूप देने का प्रयास किया है। पीड़ित पिता ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से इस पूरे ब्लाइंड मर्डर केस की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्पीडी ट्रायल जांच मुकम्मल कराने तथा दोषियों को फांसी के कड़े दंडात्मक विन्यास से एकीकृत करने की प्रखर मांग पटल पर रखी है।
मुफस्सिल थानाध्यक्ष सह डीएसपी प्रियंका कुमारी ने संभाली कमान, साक्ष्य जुटाने में मुस्तैद हुई एफएसएल टीम
मामले की संवेदनशीलता, वीआईपी छात्र प्रक्षेप और हत्या के गंभीर आरोपों को देखते हुए मोतिहारी पुलिस प्रशासन तुरंत पूरी क्षमता के साथ एक्शन मोड में लाइव हो गया है। मुफस्सिल थानाध्यक्ष सह पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) प्रियंका कुमारी ने भारी पुलिस बल और महिला कमांडो के दस्ते के साथ खुद घटना स्थल यानी हॉस्टल के उस विशिष्ट कमरे की विधिक घेराबंदी (कॉर्डन ऑफ) मुकम्मल की। पुलिस कप्तानों के सीधे विनिर्देश पर मुजफ्फरपुर से फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) की एक विशेष वैज्ञानिक खोजी टीम को तुरंत मोतिहारी के लिए डाइवर्ट किया गया।
गुरुवार की शाम को ही एफएसएल की टीम ने घटना स्थल के आंतरिक कमरों, किवाड़ों, पंखे के ब्लेड्स और दुपट्टे के रेशों की अत्यंत सूक्ष्म और वैज्ञानिक स्क्रूटनी शुरू कर दी। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने कमरे के भीतर से कतिपय फिंगरप्रिंट्स के विन्यास, पैरों के निशान और अन्य भौतिक साक्ष्यों को अपनी सीलबंद संचिकाओं में विधिक रूप से दर्ज कर लिया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के समय कमरे में किसी अन्य बाहरी व्यक्ति की भौतिक उपस्थिति संधारित थी या नहीं। पुलिस ने मृतका के शव का विधिक पंचनामा (इनक्वेस्ट रिपोर्ट) तैयार करने के उपरांत उसे कड़े पहरे के बीच पोस्टमार्टम प्रक्रम के लिए मेडिकल बोर्ड के सुपुर्द कर दिया है।
सेलफोन जब्त, साइबर सेल खंगाल रही है सीडीआर और व्हाट्सएप चैट्स का डिजिटल डंप
मुफस्सिल थानाध्यक्ष सह डीएसपी प्रियंका कुमारी ने इस ब्लाइंड केस के अद्यतन स्टेटस और तकनीकी अनुसंधान के विन्यासों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पुलिस हर एक बिंदु पर अत्यंत बारीकी और गहराई के साथ जांच-पड़ताल की कड़ियों को आपस में जोड़ रही है। पुलिस ने घटना स्थल की प्राथमिक तलाशी के दौरान मृतका रिमी कुमारी के पास से बरामद किए गए उसके एंड्रॉइड मोबाइल फोन (सेलफोन) को विधिक रूप से अपने कब्जे में ले लिया है।
साइबर सेल और जासूसी विंग की मदद से छात्रा के मोबाइल का लॉक खोलकर उसके कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR), हालिया दिनों के व्हाट्सएप चैट्स, सोशल मीडिया प्रविष्टियों और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री के डिजिटल डेटा डंप की गहन स्क्रूटनी लाइव मोड पर संचालित की जा रही है। पुलिस यह बारीकी से खंगाल रही है कि घटना के ठीक पूर्व रिमी कुमारी के मोबाइल पर किसका आखिरी कॉल आया था या वह पिछले कतिपय हफ्तों से किसी अज्ञात ब्लैकमेलिंग, रैगिंग अथवा मानसिक चक्रव्यूह का सामना तो नहीं कर रही थी। इसके समानांतर, हॉस्टल के मुख्य प्रवेश द्वारों और कॉलेज कैंपस के चारों तरफ स्थापित नाइट-विज़न सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के डिजिटल टाइम-स्टैम्प फुटेज को भी पूरी कड़ाई से स्कैन किया जा रहा है, ताकि गुरुवार की सुबह से दोपहर के बीच हॉस्टल विंग में आने-जाने वाले प्रत्येक संदिग्ध चेहरे की सांख्यिकी को प्रामाणिक रूप से वेरिफाई किया जा सके।
डीएसपी प्रियंका कुमारी ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि परिजनों द्वारा लगाए गए हत्या के आरोपों को केस डायरी में प्राथमिक स्थान दिया गया है, परंतु मौत के वास्तविक और प्रामाणिक कारणों का विधिक खुलासा मेडिकल बोर्ड द्वारा सौंपी जाने वाली विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट के विलेख पटल पर आने के बाद ही मुकम्मल हो पाएगा। पुलिस प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने या किसी भी प्रकार के शारीरिक बल प्रयोग के फॉरेंसिक अंश हस्तगत होते हैं, तो मामले को तुरंत हत्या की कड़क व गैर-जमानती धाराओं में डाइवर्ट कर दोषियों के खिलाफ ऐसी कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई लाइव की जाएगी जो नजीर साबित हो सके। कॉलेज के भीतर कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सशस्त्र पुलिस बलों की मुस्तैदी हॉस्टल द्वारों पर संधारित कर दी गई है।


