समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में बड़ा फोकस: दिव्यांगजन सुविधाओं, बाल संरक्षण और दत्तक ग्रहण जागरूकता को लेकर मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता के सख्त निर्देश

पटना, 21 मई 2026। बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग ने राज्य में संचालित सामाजिक सुरक्षा, बाल संरक्षण और दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को पटना में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक में विशेष रूप से बच्चों के संरक्षण, दत्तक ग्रहण जागरूकता, आफ्टरकेयर योजना और दिव्यांगजन सशक्तिकरण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

यह समीक्षा बैठक समाज कल्याण निदेशालय, राज्य बाल संरक्षण समिति और दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय के कार्यों को लेकर आयोजित की गई थी। बैठक में समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एच. आर. श्रीनिवास, सामाजिक सुरक्षा कोषांग के निदेशक धर्मेंद्र कुमार, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय के निदेशक योगेश कुमार सागर सहित विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने कहा कि समाज कल्याण विभाग की योजनाएं सीधे समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में योजनाओं के क्रियान्वयन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी पात्र लाभार्थी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।

मंत्री ने राज्य में बच्चों के संरक्षण से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए कहा कि बाल संरक्षण प्रणाली को और मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने राज्य बाल संरक्षण समिति को निर्देश दिया कि अनाथ, बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

बैठक में दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि समाज में अभी भी दत्तक ग्रहण को लेकर जागरूकता की कमी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग कानूनी प्रक्रिया के तहत दत्तक ग्रहण को अपनाएं। उन्होंने कहा कि कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें परिवार और संरक्षण की आवश्यकता है, इसलिए समाज को इस दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करनी होगी।

डॉ. श्वेता गुप्ता ने दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इच्छुक परिवारों को अनावश्यक प्रक्रियात्मक जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़े और उन्हें समय पर उचित मार्गदर्शन मिले।

बैठक में आफ्टरकेयर योजना की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संस्थागत देखरेख से बाहर आने वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गंभीरता से कार्य किया जाए। मंत्री ने कहा कि केवल संरक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें शिक्षा एवं रोजगार से जोड़ना भी जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आफ्टरकेयर योजना के तहत रहने वाले बच्चों को कौशल विकास, उच्च शिक्षा और रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण से जोड़ा जाए ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

बैठक में दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय द्वारा संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मंत्री और अपर मुख्य सचिव एच. आर. श्रीनिवास ने राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि दिव्यांगजनों को मिलने वाली सभी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।

बैठक में मुख्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण छत्र योजना ‘सम्बल’ के अंतर्गत बैट्री चालित ट्राईसाइकिल और अन्य सहायक उपकरणों के वितरण की समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सहायक उपकरणों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने वितरण प्रक्रिया को तेज करने और लाभार्थियों तक समय पर उपकरण पहुंचाने के निर्देश दिए।

इसके अलावा दिव्यांगजन सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री दिव्यांगजन उद्यमी योजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से दिव्यांग युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और स्वरोजगार के लिए सहायता प्रदान की जा रही है।

मंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं।

बैठक में विशेष विद्यालयों और विशेष गृहों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि इन संस्थानों में रहने वाले बच्चों और दिव्यांगजनों को बेहतर सुविधा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने संस्थानों की नियमित निगरानी और गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया।

अपर मुख्य सचिव एच. आर. श्रीनिवास ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से तैयार की जाए और जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत की जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तकनीक और डिजिटल प्रणाली का अधिक उपयोग किया जाए।

बैठक में केंद्र प्रायोजित योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं के तहत लाभार्थियों की संख्या, वित्तीय प्रगति और प्रशासनिक चुनौतियों की जानकारी दी। मंत्री ने आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि समाज कल्याण विभाग की यह समीक्षा बैठक आने वाले समय में राज्य की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को नई गति दे सकती है। बाल संरक्षण, दत्तक ग्रहण और दिव्यांगजन सशक्तिकरण जैसे विषयों पर सरकार का बढ़ता फोकस सामाजिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक के अंत में मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने सभी अधिकारियों से कहा कि वे अपने कार्य को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी न समझें, बल्कि समाज सेवा के रूप में लें। उन्होंने कहा कि जब योजनाओं का लाभ सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुंचेगा, तभी सरकार की मंशा पूरी तरह सफल मानी जाएगी।

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