पिछले वर्ष 45 लाख से अधिक पशुओं का इलाज, बिहार बना पशु चिकित्सा सेवाओं में अग्रणी राज्य

गांव-गांव पहुंची चिकित्सा सुविधा, करीब 7 करोड़ पशुओं का हुआ टीकाकरण

पटना, 28 जून।बिहार सरकार ने पशु चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज करते हुए वर्ष 2024-25 में अब तक 45.70 लाख पशुओं का इलाज कराया है। यह आंकड़ा न केवल राज्य की चिकित्सीय पहुँच का प्रमाण है, बल्कि पशुपालकों की आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी है। सरकार की ओर से संचालित एम्बुलेट्री वैन और मोबाइल पशु चिकित्सा यूनिट ने सुदूर ग्रामीण इलाकों में पशु चिकित्सा को सुलभ बना दिया है।


चिकित्सा सेवाओं का विस्तार: अब 24×7 सुविधा

  • वर्ष 2005 तक राज्य में कुल 814 पशु चिकित्सालय
  • वर्तमान में बढ़कर हो गए 1,135 चिकित्सालय
  • सभी जिला मुख्यालयों पर 24×7 सेवा उपलब्ध
  • 58 एम्बुलेट्री वैन और 534 मोबाइल यूनिट सक्रिय
  • अब तक आयोजित 3,167 पशु चिकित्सा शिविरों में
    • 4.18 लाख पशुओं का इलाज
    • 5,712 नमूनों की पैथोलॉजिकल जांच

जनवरी 2025 तक के आँकड़े: उपलब्धियों की झलक

सेवा प्रकारआँकड़े (जनवरी 2025 तक)
कुल इलाज45.70 लाख पशु
कृत्रिम गर्भाधान36.90 लाख
बधियाकरण1.54 लाख
पैथोलॉजिकल नमूने27,262

20 वर्षों में ऐतिहासिक प्रगति

  • वर्ष 2006-07 में मात्र 24.96 लाख पशुओं को इलाज मिला
  • अब 2024-25 में यह संख्या 45 लाख से अधिक
  • कृत्रिम गर्भाधान: 2.38 लाख → 44 लाख+
  • टीकाकरण: शुरुआत 2006-07 में, अब करीब 7 करोड़ पशु

यह परिवर्तन पशुपालन को न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी बना रहा है बल्कि दुग्ध उत्पादन व नस्ल सुधार जैसे क्षेत्रों में भी प्रभावी योगदान दे रहा है।


सरकार की प्रतिबद्धता: पशुपालकों के द्वार तक सेवा

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने पशु चिकित्सा को घर-घर पहुँचाने की रणनीति पर काम किया है। विभाग के अनुसार, पहले जहां ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की भारी कमी थी, वहीं अब मोबाइल सेवाओं के जरिए इलाज, जांच और टीकाकरण सीधे गांवों में पहुंच रहा है।

राज्य सरकार का यह प्रयास न केवल पशुपालकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि स्वस्थ पशु संसाधन तैयार कर दुग्ध, मांस व कृषि सहायक सेवाओं को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।


आत्मनिर्भर बिहार की ओर एक और कदम

बिहार सरकार की पशु चिकित्सा सेवाओं में यह प्रगति दर्शाती है कि राज्य अब केवल कृषि प्रधान नहीं, बल्कि पशुपालन-समर्थ प्रदेश की पहचान भी प्राप्त कर रहा है। आने वाले वर्षों में यह सेवाएं पशुपालकों की आर्थिक रीढ़ को और अधिक मजबूत बनाएंगी।


 

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