
बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा विभाग ने सीमांचल के चार जिलों—Purnia, Araria, Katihar और Kishanganj—के 120 सरकारी स्कूलों में परोसे जा रहे भोजन की वैज्ञानिक जांच कराने का फैसला किया है।
इस जांच के लिए दिल्ली की एक मान्यता प्राप्त एजेंसी को अधिकृत किया गया है, जो स्कूलों में बनने वाले भोजन के नमूनों की लैब टेस्टिंग करेगी। शिक्षा विभाग का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है।
हर जिले के 30 स्कूलों से लिए जाएंगे सैंपल
मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय के निर्देश के अनुसार, चारों जिलों से 30-30 स्कूल चुने गए हैं। जिन स्कूलों का चयन किया गया है, वहां उस दिन बनने वाले सभी खाद्य पदार्थों के अलग-अलग नमूने लिए जाएंगे।
यदि किसी दिन मेन्यू में चावल, दाल और सब्जी शामिल होगी, तो तीनों व्यंजनों के सैंपल अलग-अलग जांच के लिए भेजे जाएंगे।
एक हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट
मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक Vinayak Mishra ने निर्देश दिया है कि नमूना लेने के बाद अधिकतम एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट विभाग को सौंपनी होगी।
रिपोर्ट में स्कूल का नाम, स्थान, सैंपल लेने की तारीख और उस दिन का मेन्यू स्पष्ट रूप से दर्ज करना अनिवार्य होगा।
लापरवाही पर नहीं होगा भुगतान
शिक्षा विभाग ने साफ कहा है कि अगर जांच रिपोर्ट अधूरी, अस्पष्ट या मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा और संबंधित एजेंसी को भुगतान भी नहीं किया जाएगा।
बच्चों के स्वास्थ्य पर रहेगा फोकस
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के पोषण का बड़ा हिस्सा मिड डे मील पर निर्भर करता है। ऐसे में यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए अहम मानी जा रही है। विभाग का मानना है कि इससे मिड डे मील योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और भोजन की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी संभव हो सकेगी।


