नई दिल्ली में सहकारी डेयरी क्षेत्र पर बैठक: ‘श्वेत क्रांति 2.0’ की नींव मजबूत करने की पहल

तीन नई बहुराज्यीय सहकारी समितियों के गठन का निर्णय

नई दिल्ली, 20 मई 2025:केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज सहकारी डेयरी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी और सर्क्युलैरिटी विषय पर एक अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सहकारिता मंत्री ने ‘श्वेत क्रांति 2.0’ की अवधारणा को साकार करने की दिशा में ठोस पहल करते हुए तीन नई बहुराज्यीय सहकारी समितियों की स्थापना का निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए बनाई जा रही इन समितियों के कार्य क्षेत्र होंगे:

  1. पशु आहार निर्माण, रोग नियंत्रण और कृत्रिम गर्भाधान
  2. गोबर प्रबंधन मॉडल का विकास
  3. मृत मवेशियों के अवशेषों का सर्क्युलर उपयोग

सतत विकास के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था पर जोर

श्री शाह ने कहा कि अब समय है कि डेयरी सहकारिताओं को दक्ष और सतत बनाते हुए ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाए जो चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे। उन्होंने कार्बन क्रेडिट का प्रत्यक्ष लाभ किसानों को देने और एकीकृत सहकारी नेटवर्क के निर्माण की जरूरत पर बल दिया।


बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी हुए शामिल

इस उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री श्री कृष्णपाल सिंह गुर्जर, श्री मुरलीधर मोहोल, सहकारिता मंत्रालय के सचिव श्री आशीष भूटानी, डेयरी व पशुपालन विभाग की सचिव श्रीमती अलका उपाध्याय, NDDB के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह और नाबार्ड के अध्यक्ष श्री शाजी केवी भी शामिल हुए।


ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की रीढ़

श्री अमित शाह ने कहा कि सहकारी डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, महिलाओं की भागीदारी और लघु किसानों को बाजार, ऋण और पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने का सशक्त माध्यम बन चुका है।


अमूल मॉडल का उल्लेख, तकनीक और सहयोग पर बल

उन्होंने अमूल जैसे सफल सहकारी मॉडलों का उदाहरण देते हुए कहा कि अब सहकारिता संस्थाएं तकनीकी सेवाओं, बायोगैस, खाद्य प्रसंस्करण और गोबर प्रबंधन जैसे कार्यों को खुद अंजाम देंगी, जो पहले निजी क्षेत्र के माध्यम से होते थे।


राष्ट्रीय संस्थाओं की सराहना

अंत में श्री शाह ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, NDDB और नाबार्ड जैसी संस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इनका समन्वय और सहयोग देश भर में किसान-केंद्रित योजनाओं को लागू करने में मील का पत्थर साबित होगा।


 

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