ईरान-अमेरिका तनाव में बिहार के मरीन इंजीनियर की मौत, गोपालगंज का बेटा रोहन गुप्ता नहीं लौटा; परिवार पार्थिव शरीर का कर रहा इंतजार

गोपालगंज: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक दर्दनाक खबर बिहार के गोपालगंज जिले से सामने आई है। थावे प्रखंड के थावे बाजार निवासी मरीन इंजीनियर रोहन गुप्ता उर्फ सोनू गुप्ता की मर्चेंट शिप पर कथित ईरानी हमले में मौत हो गई। इस खबर के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है। माता-पिता और परिजन अब अपने बेटे के पार्थिव शरीर के भारत पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उसका अंतिम संस्कार किया जा सके।

तीन दिन बाद भी नहीं पहुंचा पार्थिव शरीर

घटना को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन रोहन का पार्थिव शरीर अब तक उनके पैतृक गांव नहीं पहुंच सका है। परिवार की निगाहें हर पल दरवाजे पर टिकी हैं। परिजनों का कहना है कि बेटे के खोने का दर्द कभी कम नहीं होगा, लेकिन अंतिम बार उसका चेहरा देखने और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने की इच्छा है।

भारत सरकार से लगाई मदद की गुहार

पीड़ित परिवार ने भारत सरकार, बिहार सरकार और विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि यह मामला दो देशों के बीच सैन्य तनाव से जुड़ा है, इसलिए पार्थिव शरीर को भारत लाने में राजनयिक और कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं। परिवार ने प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

पिता बोले- समुद्र किनारे पहुंच चुका है शव

रोहन के पिता संजय प्रसाद ने बताया कि उन्हें कंपनी की ओर से सूचना मिली है कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर समुद्र के किनारे पहुंच चुका है और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि रोहन करीब 25 दिन पहले ही ड्यूटी पर गया था और जहाज के इंजन रूम में मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में कार्यरत था।

बड़े भाई ने याद किए आखिरी शब्द

रोहन के बड़े भाई आलोक कुमार ने बताया कि घटना से ठीक पहले उनकी भाई से फोन पर बातचीत हुई थी।

रोहन ने कहा था कि सब कुछ सामान्य है और जहाज दुबई से आगे बढ़ रहा है। इसके बाद संपर्क टूट गया।

आलोक भावुक होकर कहते हैं कि रोहन के कई सपने अधूरे रह गए। वह अक्सर कहता था कि पहले भाइयों को अच्छी तरह से सेटल करेगा, नया घर बनाएगा और उसके बाद ही शादी करेगा।

पड़ोसी बोले- पूरे घर की मुस्कान था रोहन

रोहन के पड़ोसी निशांत कुमार ने बताया कि वह परिवार का सबसे छोटा और सबसे दुलारा बेटा था। जब भी घर आता था, पूरे परिवार और मोहल्ले में खुशियां बिखेर देता था।

उन्होंने बताया कि वह करीब एक महीने पहले ही जहाज पर गया था और दिसंबर में छुट्टी लेकर घर लौटने वाला था।

बचपन से मेधावी, मेहनत से बनाया करियर

रोहन शुरू से ही पढ़ाई में बेहद होनहार था। पांचवीं कक्षा में उसने प्रखंड स्तरीय क्विज प्रतियोगिता जीती थी। उसने न्यूटन पब्लिक स्कूल से 89 प्रतिशत अंकों के साथ मैट्रिक और 92 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की।

इसके बाद वर्ष 2016 में कोलकाता के डीएमईटी कॉलेज में मरीन इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और 2020 में बीटेक पूरा किया।

कैंपस प्लेसमेंट से शुरू हुआ सफर, 48 लाख के पैकेज तक पहुंचे

कॉलेज से कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उनका चयन एक शिपिंग कंपनी में हुआ। शुरुआती वेतन करीब 18 लाख रुपये सालाना था। मेहनत और अनुभव के दम पर छह महीने पहले ही उन्होंने एडनॉक (ADNOC) कंपनी जॉइन की थी, जहां उनका सालाना पैकेज करीब 48 लाख रुपये था।

पिता ने छुट्टी लेने को कहा था

संजय प्रसाद ने बताया कि उन्होंने बेटे से कहा था कि जिस क्षेत्र में वह काम कर रहा है, वहां हालात ठीक नहीं हैं, इसलिए कुछ दिन की छुट्टी लेकर घर आ जाए।

लेकिन रोहन ने जवाब दिया कि अब हालात सामान्य हो गए हैं और तीन महीने बाद छुट्टी लेकर आएगा। उसी दौरान परिवार उसकी शादी की तैयारी भी करने वाला था।

परिवार ने उसे खुशी-खुशी विदा किया था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वह इस तरह हमेशा के लिए बिछड़ जाएगा।

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