
भागलपुर, 19 जून 2026। भागलपुर जिले के मानिकपुर गांव में वर्षों से चली आ रही धार्मिक आस्था और श्रद्धा अब एक नए अध्याय की ओर बढ़ रही है। गांव के प्राचीन मां दुर्गा मंदिर में इस वर्ष भव्य पिंडी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसे लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और भक्ति का वातावरण बना हुआ है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक विरासत, सामूहिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार मानिकपुर में मां दुर्गा की आराधना दशकों से लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। वर्ष 1982 से यहां लगातार ग्रामीणों के सहयोग और सामूहिक प्रयासों से शारदीय दुर्गा पूजा का आयोजन होता आ रहा है। पिछले 42 वर्षों में यह पूजा केवल एक वार्षिक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि गांव की पहचान बन चुकी है। अब उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिर में पिंडी प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
42 वर्षों की परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप
मानिकपुर के बुजुर्गों का कहना है कि मां दुर्गा के प्रति गांव की आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है। शुरुआती वर्षों में सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीणों ने एकजुट होकर दुर्गा पूजा की परंपरा को जीवित रखा। धीरे-धीरे लोगों का सहयोग बढ़ता गया और मंदिर निर्माण का सपना आकार लेने लगा।
वर्षों की मेहनत, जनसहयोग और श्रद्धालुओं की आस्था से मंदिर निर्माण का कार्य आगे बढ़ता रहा। अब जब मंदिर लगभग पूर्ण स्वरूप में तैयार है, तब पिंडी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के जरिए मां भगवती की विधिवत स्थापना की जा रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि यह केवल एक धार्मिक उपलब्धि नहीं, बल्कि गांव की सामूहिक शक्ति और समर्पण का परिणाम है

कलश शोभायात्रा से होगी अनुष्ठान की शुरुआत
धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत 20 जून को भव्य कलश शोभायात्रा के साथ होगी। इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, श्रद्धालु और ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे। कलश यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होकर मंदिर परिसर तक पहुंचेगी।
आयोजकों के अनुसार शोभायात्रा के दौरान भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चार और धार्मिक ध्वनियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। गांव के लोग घरों के बाहर रंगोली और पुष्प सजावट के जरिए श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे।
कलश यात्रा को प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण माना जा रहा है, क्योंकि यह पूरे आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करती है।
24 जून को होगा पिंडी प्राण प्रतिष्ठा पूजन
महोत्सव का मुख्य आकर्षण 24 जून को होने वाला पिंडी प्राण प्रतिष्ठा पूजन होगा। यह पूजन आचार्य पंडित रविंद्र झा के सानिध्य में वैदिक विधि-विधान से संपन्न कराया जाएगा।
पूजन के दौरान विशेष यज्ञ, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से मां दुर्गा की पिंडी में प्राण प्रतिष्ठित किए जाएंगे। इस प्रक्रिया को हिंदू धार्मिक परंपरा में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है।
आचार्यों के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा केवल मूर्ति या पिंडी की स्थापना नहीं होती, बल्कि यह दिव्य शक्ति के आवाहन की प्रक्रिया होती है। इसके बाद मंदिर आधिकारिक रूप से नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए पूर्ण धार्मिक स्वरूप प्राप्त कर लेता है।
इस दिन आसपास के गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
जागरण संध्या और भंडारे का भी होगा आयोजन
25 जून को धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला भव्य जागरण संध्या और विशाल भंडारे के साथ आगे बढ़ेगी। जागरण संध्या में मां दुर्गा के भजन, देवी गीत और विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।
रात्रि भर चलने वाले इस आयोजन में भक्त मां भगवती के जयकारों और भजनों के साथ भक्ति रस में डूबे नजर आएंगे। आयोजकों का कहना है कि जागरण के लिए विशेष सजावट, प्रकाश व्यवस्था और मंचीय कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है।
इसके साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन भी होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की संभावना है। ग्रामीणों ने भंडारे की व्यवस्था को लेकर अलग-अलग जिम्मेदारियां बांट ली हैं।
ग्रामीणों की एकजुटता बनी आयोजन की ताकत
इस पूरे महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता गांव के लोगों की एकजुटता है। आयोजन की तैयारियों में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
मंदिर परिसर की सजावट, साफ-सफाई, पूजा सामग्री की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के स्वागत और भोजन प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए अलग-अलग समितियां बनाई गई हैं। गांव के लोग इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का उत्सव मान रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सामूहिक प्रयास ही इस आयोजन की सबसे बड़ी शक्ति है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देकर इस आयोजन को सफल बनाने में जुटा है।
आयोजन समिति निभा रही अहम भूमिका
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कुमार सौरभ मिश्रा, आनंद प्रकाश, अमरजीत भारती, मृत्युंजय सिन्हा, पंकज वर्मा, राजीव सिन्हा, रिशु झा, राहुल झा, रवि मिश्रा, अमरेश झा, संजय झा और डॉक्टर तन्मय सहित कई लोग सक्रिय रूप से तैयारी में लगे हुए हैं।
आयोजन समिति के सदस्यों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना भी है। वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा और आस्था को आगे बढ़ाएं।
आस्था, संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक बना मंदिर
मानिकपुर के ग्रामीणों के लिए मां दुर्गा मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि गांव की पहचान और सामाजिक एकता का केंद्र है। यहां होने वाले धार्मिक आयोजन लोगों को एक मंच पर लाते हैं और आपसी प्रेम तथा भाईचारे को मजबूत करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर ने हमेशा गांव को जोड़ने का कार्य किया है। चाहे खुशी का अवसर हो या संकट का समय, गांव के लोग मंदिर परिसर में एकत्र होकर एक-दूसरे का साथ देते रहे हैं।
अब पिंडी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ यह मंदिर नई ऊर्जा और नए आध्यात्मिक स्वरूप में लोगों के बीच स्थापित होने जा रहा है। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि मां भगवती की कृपा से गांव में सुख, शांति और समृद्धि का नया दौर शुरू होगा।
मानिकपुर में होने वाला यह महोत्सव निश्चित रूप से भागलपुर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल होगा और आने वाले वर्षों तक श्रद्धा का केंद्र बना रहेगा।


