
पटना, 18 जून 2026। बिहार सरकार ने भूमि और संपत्ति से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए प्राक्कलित न्यूनतम मूल्य (एमवीआर) में व्यापक संशोधन किया है। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की सरकारी न्यूनतम दर 1.6 गुना तक बढ़ गई है, जबकि शहरी और पेरिफेरल क्षेत्रों में यह वृद्धि दो गुना तक की गई है। इस निर्णय का सीधा असर जमीन खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री, स्टाम्प शुल्क और भूमि अधिग्रहण से मिलने वाले मुआवजे पर पड़ेगा।
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य वर्षों पुरानी मूल्य निर्धारण प्रणाली को वर्तमान बाजार दरों के अनुरूप बनाना है, ताकि किसानों, भूमि मालिकों और आम नागरिकों को वास्तविक मूल्य के अनुसार लाभ मिल सके। साथ ही महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने पर अतिरिक्त छूट देकर महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देने की कोशिश की गई है।
आखिर क्या है MVR और क्यों जरूरी है इसका संशोधन?
एमवीआर यानी प्राक्कलित न्यूनतम मूल्य वह सरकारी दर है, जिसके आधार पर जमीन और संपत्ति की खरीद-बिक्री के समय स्टाम्प शुल्क और निबंधन शुल्क तय किया जाता है। यह दर बाजार मूल्य से अलग होती है और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाती है।
बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एमवीआर का अंतिम बड़ा पुनरीक्षण वर्ष 2013 में किया गया था, जबकि शहरी क्षेत्रों के लिए यह संशोधन 2016 में हुआ था। इसके बाद एक लंबे अंतराल तक इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। इस दौरान बाजार में जमीन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई, लेकिन सरकारी मूल्य पुराने ढांचे पर ही आधारित रहे।
यही अंतर सरकार के लिए चिंता का कारण बन गया। बाजार दर और सरकारी दर के बीच बढ़ते अंतर को कम करने के लिए अब नया संशोधन लागू किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में 1.6 गुना, शहरों में दोगुनी वृद्धि
नए निर्णय के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान एमवीआर को 1.6 गुना तक बढ़ाया गया है। वहीं शहरी और पेरिफेरल क्षेत्रों में एमवीआर को दो गुना तक बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब है कि अब शहरों में संपत्ति खरीदने वालों को पहले की तुलना में अधिक स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क देना पड़ सकता है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव जमीन खरीद-बिक्री के लेनदेन पर दिखाई देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जबकि ग्रामीण इलाकों में भी इसका असर महसूस किया जाएगा।
हालांकि सरकार का दावा है कि यह वृद्धि वर्तमान बाजार स्थिति को ध्यान में रखकर की गई है और लंबे समय में इससे आर्थिक पारदर्शिता बढ़ेगी।
हर साल स्वतः बढ़ेगा MVR
सरकार ने केवल एक बार का संशोधन नहीं किया, बल्कि भविष्य के लिए भी नया तंत्र तैयार किया है। अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एमवीआर में स्वतः 5 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान किया गया है।
इसके अतिरिक्त हर तीन वर्ष पर विभाग द्वारा व्यापक पुनरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान नई सड़कों, औद्योगिक क्षेत्रों, शहरी विस्तार, हवाई अड्डों, रेलवे परियोजनाओं, सिंचाई योजनाओं और अन्य विकास परियोजनाओं को ध्यान में रखकर नए मूल्य तय किए जाएंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में बाजार दर और सरकारी मूल्य के बीच बड़ा अंतर न बने।
किसानों को मिलेगा अधिक मुआवजा
सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष किसानों के लिए बताया जा रहा है। जब सरकार या कोई एजेंसी विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहित करती है, तो मुआवजा अक्सर एमवीआर के आधार पर तय होता है।
अब बढ़ी हुई दरों का सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। राज्य सरकार की परियोजनाओं के लिए वर्तमान एमवीआर पर कुल अनुमानित मुआवजा 14,897 करोड़ रुपये था। नई दरों के अनुसार यह राशि बढ़कर 18,637 करोड़ रुपये हो जाएगी।
इसका अर्थ है कि किसानों को लगभग 3,740 करोड़ रुपये अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे भूमि देने वाले किसानों को अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
केंद्र की परियोजनाओं में भी बड़ा लाभ
केवल राज्य परियोजनाओं में ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के अधीन संचालित परियोजनाओं में भी इस संशोधन का बड़ा असर दिखेगा।
वर्तमान दरों के अनुसार केंद्र की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का अनुमानित मुआवजा 24,629 करोड़ रुपये था। संशोधित एमवीआर लागू होने के बाद यह राशि बढ़कर 39,460 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
इस तरह किसानों और भूमि मालिकों को लगभग 14,831 करोड़ रुपये अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई पूंजी आएगी और स्थानीय बाजारों में खर्च क्षमता बढ़ सकती है।
महिलाओं के लिए अतिरिक्त स्टाम्प छूट
बिहार सरकार ने महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने पर अतिरिक्त राहत भी दी है। यदि किसी महिला के पक्ष में विक्रय पत्र या दान पत्र के माध्यम से संपत्ति का निबंधन कराया जाता है, तो स्टाम्प शुल्क में छूट बढ़ा दी गई है।
पहले यह छूट 0.3 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर अब 0.4 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा निबंधन शुल्क में पहले से मिलने वाली 0.1 प्रतिशत छूट जारी रहेगी।
इस प्रकार महिलाओं को अब कुल 0.5 प्रतिशत की राहत मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी।
स्टाम्प शुल्क बढ़ने से खरीददारों पर असर
जहां किसानों और महिलाओं के लिए यह फैसला लाभकारी माना जा रहा है, वहीं सामान्य खरीददारों के लिए लागत बढ़ने की संभावना भी है। सरकार ने सामान्य स्टाम्प दर में 1 प्रतिशत वृद्धि करने का निर्णय लिया है।
इससे संपत्ति खरीदने वालों को अधिक शुल्क चुकाना होगा। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में घर, फ्लैट या व्यावसायिक जमीन खरीदने वाले लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दौर में संपत्ति बाजार पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबे समय में पारदर्शी मूल्य निर्धारण से बाजार स्थिर हो सकता है।
भूमि श्रेणियों का भी किया गया पुनर्गठन
सरकार ने केवल दरों में बदलाव नहीं किया बल्कि भूमि श्रेणियों को भी सरल बनाया है। वर्तमान में अलग-अलग जिलों में भूमि श्रेणियों का निर्धारण अलग-अलग तरीके से किया जाता था, जिससे भ्रम की स्थिति बनती थी।
अब इन श्रेणियों का समेकन किया गया है। ग्रामीण और पेरिफेरल क्षेत्रों में भूमि की कुल 7 श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जबकि शहरी और महानगरीय क्षेत्रों में कुल 6 श्रेणियां तय की गई हैं।
इससे मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होगी।
बिहार सरकार का यह फैसला राज्य की भूमि अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। एक ओर किसानों को बेहतर मुआवजा और महिलाओं को अतिरिक्त राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर जमीन खरीदने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि नया एमवीआर राज्य की अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट बाजार को किस दिशा में लेकर जाता है।


