भागलपुर में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की तैयारियां तेज, 28 जून से 6.74 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की खुराक

भागलपुर, 18 जून 2026। पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों को सुरक्षित रखने और जिले में शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भागलपुर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की तैयारियां तेज कर दी हैं। 28 जून से शुरू होने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए गुरुवार को जिला टास्क फोर्स (डीटीएफ) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक सिविल सर्जन की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें अभियान की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने अभियान को लेकर माइक्रोप्लान, वैक्सीन उपलब्धता, टीम गठन, लॉजिस्टिक्स और जन-जागरूकता जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की।

6 लाख 74 हजार से अधिक बच्चों को टीकाकरण का लक्ष्य

बैठक को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन ने बताया कि 28 जून से 4 जुलाई 2026 तक चलने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के दौरान जिले के 5 वर्ष से कम आयु के 6 लाख 74 हजार 744 बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अभियान की सफलता तभी संभव होगी जब कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रह जाए। इसके लिए सभी प्रखंडों को सटीक योजना बनाकर कार्य करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को निर्देश दिया गया कि बूथ आधारित टीकाकरण के साथ-साथ घर-घर जाकर भी बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित की जाए।

सिविल सर्जन ने कहा कि पोलियो उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्य नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक परिवार, समुदाय और प्रशासनिक इकाई का सहयोग अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण होगा।

माइक्रोप्लान की होगी गहन समीक्षा

बैठक में अभियान के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से माइक्रोप्लानिंग पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रत्येक प्रखंड अपने क्षेत्र की विस्तृत सूची तैयार करे, जिसमें सभी टोले, गांव, वार्ड और संवेदनशील इलाकों की जानकारी शामिल हो।

माइक्रोप्लान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टीकाकरण टीमों की पहुंच हर उस स्थान तक हो, जहां पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे रहते हैं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि बूथों की संख्या, कर्मियों की तैनाती और भ्रमण मार्ग का निर्धारण समय रहते पूरा कर लिया जाए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत माइक्रोप्लान ही सफल पोलियो अभियान की रीढ़ होता है, क्योंकि यही तय करता है कि कोई बच्चा छूटे नहीं।

प्रवासी परिवारों और हाई रिस्क क्षेत्रों पर विशेष फोकस

सिविल सर्जन ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा जिन्हें उच्च जोखिम वाला माना जाता है। इनमें प्रवासी परिवारों के बच्चे, ईंट-भट्ठों पर रहने वाले श्रमिक परिवार, निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चे, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहरी मलिन बस्तियां शामिल हैं।

ऐसे क्षेत्रों में अक्सर बच्चों का नियमित स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता, जिसके कारण टीकाकरण छूटने की संभावना अधिक रहती है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि इन स्थानों के लिए अलग रणनीति तैयार की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि इन संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रयास नहीं किए गए तो अभियान का लक्ष्य अधूरा रह सकता है। इसलिए हर टीम को हाई रिस्क पॉकेट्स की सूची के साथ काम करना होगा।

वैक्सीन और कोल्ड चेन प्रबंधन पर जोर

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बैठक में वैक्सीन उपलब्धता और कोल्ड चेन प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पोलियो वैक्सीन की गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है और इसके लिए कोल्ड चेन सिस्टम पूरी तरह सक्रिय रहना चाहिए।

टीकों को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखना अभियान की सफलता का अहम हिस्सा है। यदि तापमान नियंत्रण में लापरवाही हुई तो वैक्सीन की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी कोल्ड चेन प्वाइंट्स की जांच अभियान शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाए। साथ ही वैक्सीन परिवहन और भंडारण की निगरानी भी सख्ती से की जाए।

टीमों का प्रशिक्षण होगा निर्णायक

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि अभियान में शामिल सभी स्वास्थ्य कर्मियों, पर्यवेक्षकों और सहयोगी कर्मचारियों का प्रशिक्षण समय पर पूरा किया जाए। प्रशिक्षण के दौरान टीकाकरण प्रक्रिया, लाभार्थियों की पहचान, रिकॉर्ड प्रबंधन और रिपोर्टिंग की जानकारी दी जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षित टीम न केवल बेहतर तरीके से टीकाकरण कर सकती है, बल्कि अभिभावकों की शंकाओं का समाधान भी कर सकती है।

कई बार जागरूकता की कमी या अफवाहों के कारण परिवार बच्चों को टीकाकरण से दूर रखते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित टीम का संवाद कौशल बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

WHO ने दी विशेष सलाह

बैठक में उपस्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर ने भारत की पोलियो मुक्त स्थिति को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्षों की मेहनत से पोलियो मुक्त दर्जा हासिल किया है और इसे बनाए रखने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले अभियान लगातार आवश्यक हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी रखी जाए। साथ ही घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने की गतिविधियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने तीव्र पक्षाघात (एएफपी) निगरानी प्रणाली को भी मजबूत करने की सलाह दी। यह निगरानी प्रणाली संभावित पोलियो मामलों की शीघ्र पहचान में मदद करती है।

जन-जागरूकता अभियान होगा तेज

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि केवल वैक्सीन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, लोगों की जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। इसी कारण जन-जागरूकता कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया है।

आंगनबाड़ी सेविकाएं, आशा कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षकों और सामुदायिक संगठनों को अभियान से जोड़ा जाएगा। गांवों और शहरी बस्तियों में माइकिंग, पोस्टर, बैनर और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि व्यापक जन सहयोग के बिना निर्धारित लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा।

समन्वित प्रयास से बनेगा अभियान सफल

बैठक के अंत में सभी प्रखंडों को निर्देश दिया गया कि अभियान शुरू होने से पहले शत-प्रतिशत तैयारी सुनिश्चित की जाए। स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और सहयोगी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

भागलपुर में होने वाला यह राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को पोलियो जैसी अपंगता से सुरक्षित रखने का संकल्प है। यदि सभी विभाग और नागरिक मिलकर सहयोग करें, तो जिले का हर बच्चा सुरक्षित भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकेगा।

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